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खतरे में आ जाएगा हमारा दाना-पानी, सिंधु समझौते पर बौखलाया पाकिस्तान अब UNSC पहुंचा

सिंधु जल समझौते के तहत पाकिस्तान को लगभग 80 फीसदी पानी पर अधिकार दिया गया है, जबकि भारत को उदारता दिखाने और अपना हक छोड़ने के बावजूद केवल 20 प्रतिशत पानी ही दिया गया.

खतरे में आ जाएगा हमारा दाना-पानी, सिंधु समझौते पर बौखलाया पाकिस्तान अब UNSC पहुंचा
यह संधि 1960 से भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के डिस्ट्रीब्यूशन और इस्तेमाल को कंट्रोल करती है.
  • पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने UNSC अध्यक्ष को चिट्ठी लिखा है.
  • इसमें कहा गया है कि भारत की ओर से सिंधु जल संधि निरस्त कर देने से पाकिस्तान में खाद्य दिक्कतें आ गई हैं.
  • भारत और पाकिस्तान के बीच यह संधि 1960 से चली आ रही है.

सिंधु जल संधि को लेकर एक बार फिर पाकिस्तान की बौखलाहट साफ दिख रही है. पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का दरवाजा खटखटाते हुए भारत पर संधि के उल्लंघन का आरोप लगाया है. इस्लामाबाद का दावा है कि भारत की ओर से चिनाब नदी प्रणाली से जुड़े कुछ बुनियादी ढांचा परियोजनाएं संधि की भावना के खिलाफ हैं और इससे पाकिस्तान की जल सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा तथा अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है. यानी पाकिस्तान ये मान रहा है कि इस संधि से उसका दाना-पानी रुक सकता है.

पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री इशाक डार ने UNSC अध्यक्ष को पत्र लिखकर भारत की कथित गतिविधियों पर ध्यान देने की मांग की है. संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने यह पत्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्ष, कोलंबिया की राजदूत लियोनोर जालाबाता टोरेस को सौंपा है.

भारत पर जल प्रवाह बदलने की कोशिश का आरोप

पाकिस्तान का आरोप है कि भारत चिनाब नदी प्रणाली से जुड़ी दो परियोजनाओं के जरिए पश्चिमी नदियों के जल प्रवाह और उपयोग के स्थापित ढांचे को बदलने की कोशिश कर रहा है. इस्लामाबाद का कहना है कि ऐसी गतिविधियां सिंधु जल संधि के प्रावधानों के अनुरूप नहीं हैं और इनसे क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित हो सकती है.

पाकिस्तानी राजदूत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि सुरक्षा परिषद से इस मामले का संज्ञान लेने और भारत को कथित उल्लंघनों के लिए जवाबदेह ठहराने की अपील की गई है. साथ ही उन्होंने दक्षिण एशिया की स्थिति और जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र किया.

एक साल से ज्यादा समय से जारी है विवाद

इशाक डार इससे पहले अप्रैल में भी UNSC को पत्र लिख चुके हैं. उस पत्र में उन्होंने भारत की तरफ सिंधु जल संधि को प्रभावी रूप से स्थगित रखने के फैसले के एक वर्ष पूरे होने का हवाला देते हुए संभावित मानवीय और सुरक्षा संबंधी प्रभावों की बात कही थी.

हाल के दिनों में पाकिस्तान ने यह भी दावा किया है कि भारत की ओर से सिंधु नदी तंत्र से जुड़ी 17 परियोजनाएं भविष्य में नई दिल्ली को जल संसाधनों पर अधिक नियंत्रण का साधन दे सकती हैं. हालांकि भारत की ओर से लगातार यह कहा जाता रहा है कि परियोजनाएं अपने अधिकारों और जरूरतों के अनुरूप हैं.

विश्व बैंक की मध्यस्थता में वर्ष 1960 में हुई सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी प्रणाली के जल बंटवारे को नियंत्रित करती है. इसके तहत रावी, ब्यास और सतलुज नदियों का उपयोग मुख्य रूप से भारत को मिला, जबकि सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों का अधिकांश जल पाकिस्तान के हिस्से में जाता है.

दशकों तक यह संधि दोनों देशों के बीच सबसे सफल समझौतों में गिनी जाती रही और युद्धों तथा कूटनीतिक तनाव के बावजूद कायम रही. लेकिन 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने हमले के लिए पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद को जिम्मेदार ठहराया और इस संधि को आगे के लिए टाल दिया.

यह भी पढ़ें: सिंधु जल समझौता: सबसे बड़ा 'बलिदान' देकर भी उदारता की भारी कीमत चुका रहा भारत

लेखक के बारे में
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चंदन सिंह राजपूत
Senior Sub Editor
चंदन सिंह राजपूत एनडीटीवी हिंदी में बतौर सीनियर सब एडिटर कार्यरत हैं. डिजिटल मीडिया में करीब 5 साल का अनुभव है. एनडीटीवी से पहले बीबीसी हिंदी, क्विंट... और पढ़ें
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