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हसन खुमैनी हो सकते हैं ईरान के नए सुप्रीम लीडर, क्या उनकी उदारवादी' छवि को कट्टरपंथी करेंगे स्वीकार?

Who Will Be Iran's Supreme Leader: हसन खुमैनी को ईरान के सुधारवादी गुटों और उन लोगों का समर्थन मिला हुआ है, जो शासन में थोड़ा बदलाव देखना चाहते हैं. खुमैनी परिवार का नाम बड़ा है, लेकिन कट्टरपंथी गुट और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की भूमिका उत्तराधिकार की इस प्रक्रिया में सबसे अहम होगी.

हसन खुमैनी हो सकते हैं ईरान के नए सुप्रीम लीडर, क्या उनकी उदारवादी' छवि को कट्टरपंथी करेंगे स्वीकार?
कौन बनेगा ईरान का सुप्रीम लीडर
  • ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई की मौत के बाद हसन खुमैनी को अगला नेता बनाए जाने की चर्चा है
  • हसन खुमैनी, रुहोल्लाह खुमैनी के पोते, ईरान में उदारवादी नेता के रूप में पहचाने जाते हैं
  • कट्टरपंथी गुट और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की सहमति के बिना हसन खुमैनी का नेतृत्व चुनना चुनौतीपूर्ण होगा
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नई दिल्ली:

इजरायल-अमेरिका के हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई की मौत हो चुकी है. इस बीच सबके जहन में सवाल एक ही है कि ईरान का अगला सुप्रीम लीडर आखिर कौन होगा? ईरान के ज्यादातर लोग अब उदारवादी नेता चाहते हैं. ऐसी छवि है रुहोल्लाह खुमैनी के पोते हसन खमैनी की. पहले खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई का नाम की चर्चा थी. लेकिन रॉयटर्स के मुताबित, अब खबर है कि अगले सुप्रीम लीडर ईरान के इस्लामी गणराज्य के संस्थापक अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के पोते हो सकते हैं. उदारवादी नेता चाहने वालों के लिए हसन खुमैनी एक अच्छा विकल्प माने जा रहे हैं. लेकिन उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती है कट्टरपंथी गुट और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की सहमति, जिसके बिना हसन खुमैनी का नेतृत्व चुनना चुनौतीपूर्ण होगा. 

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क्या खुमैनी के पोते कट्टरपंथी को स्वीकार करेंगे?

सबसे बड़ी बात यह है कि हमन खुमैनी अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के पोते हैं. रुहोल्लाह खुमैनी भी ईरान के सुप्रीम लीडर रह चुके हैं. ऐसे में हसन खुमैनी अपने दादा की विरासत का प्रतीक हैं. साथ ही वह उदारवादी छवि वाले है. लेकिन सवाल यह है कि क्या उनकी उदारवादी छवि को कट्टरपंथी 'असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स' के बीच स्वीकार किया जाएगा. ईरान की आंतरिर राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है. 

क्या हसन खुमैनी बनेंगे ईरान के सुप्रीम लीडर?

रूबोल्लाह खुमैनी के पोते हसन खुमैनी का नाम ईरान के सुप्रीम लीडर के लिए प्रबल दावेदारों के रूप में लिया जा रहा है. रॉयटर्स की खबर के मुताबिक, हसन खुमैनी ईरान में अयातुल्लाह खामेनेई की जगह ले सकते हैं. वह ईरान के अगले सुप्रीम लीडर हो सकते हैं. हालांकि अब तक आधिकारिक रूप से इस बात का ऐलान नहीं किया गया है. लेकिन हसन के नाम को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है. 

क्या रिवोल्यूशनरी गार्ड्स हसन खुमैनी को स्वीकार करेगा?

हसन खुमैनी को ईरान के सुधारवादी गुटों और उन लोगों का समर्थन मिला हुआ है, जो शासन में थोड़ा बदलाव देखना चाहते हैं. खुमैनी परिवार का नाम बड़ा है, लेकिन कट्टरपंथी गुट और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की भूमिका उत्तराधिकार की इस प्रक्रिया में सबसे अहम होगी. बता दें कि हसन खुमैनी अयातुल्ला खुमैनी के 15 पोते-पोतियों में सबसे अहम जगह रखते हैं. सबसे खास बात यह है कि ईरान के दूसरे इस्लामिक नेताओं की तुलना में उनको ज्यादा उदारवादी माना जाता है. जो लोग ईरान में एक उदारवादी सुप्रीम लीडर चाहते हैं, उनके लिए हमस खुमैनी एक बढ़िया विकल्प माने जा रहे हैं. 

हसन खुमैनी के बारे में जानें

53 साल के हसन खुमैनी के ईरान के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद खातमी और हसन रूहानी समेत अन्य सुधारवादियों से भी रिश्ते बहुत घनिष्ठ हैं. ये वो लोग हैं, जिन्होंने अपने कार्यकाल में पश्चिम के साथ रिश्तों के सुधार की नीति अपनाई थी. फिलहाल वह दक्षिणी तेहरान में अपने दादा के मकबरे के संरक्षक की भमिका निभा रहे हैं. वह सरकार में कभी नहीं रहे. 

ईरान की आंतरिक राजनीति में हसन खुमैनी को खामेनेई के बेटे मोजतबा के प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखा जा रहा है. हसन खुमैनी जहां उदारवादी छवि वाले हैं तो नहीं मोजतबा को कट्टरपंथी छवि वाला माना जाता है. जनवरी में जब ईरान में अशांति फैली तब खामेनेई की जगह एक उदारवादी उत्तराधिकारी की नियुक्ति की बात कुछ ईरानी राजनेताओं के बीच जोर पकड़ने लगी, ताकि बढ़ते असंतोष के बीच इस्लामी गणराज्य को और मजबूत किया जा सके.

अमीनी की मौत के लिए खुमैनी ने मांगी थी जवाबदेही 

खुमैनी का इतिहास सुधारों को बढ़ावा देने वाला रहा है. वह समय-समय पर सत्ता के खिलाफ असहमति भी जताते रहे हैं. साल 2021 में उन्होंने गार्जियन काउंसिल की जमकर आलोचना की थी. वजह थी सुधारवादियों को चुनाव लड़ने से रोका जाना. बता दें कि गार्जियन काउंसिल, ईरान की धार्मिक सरकार की वह शाखा है जो राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों की जांच में अहम भूमिका निभाती है. काउंसिल की वजह से ही कट्टरपंथी इब्राहिम रायसी की जीत का रास्ता खुल गया था, हालांकि साल 2024 में एक हेलीकॉप्टर हादसे में उनकी मौत हो गई. 

खुमैनी ने साल 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद भी जवाबदेही की मांग की थी. अमीनी की मौत रूढ़िवादी पहनावे के नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में पुलिस हिरासत में हुई थी.  इस घटना के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शनों की लहर देखने को मिली थी. हसन खुमैनी के एक करीबी ने साल 2015 में रॉयटर्स से खास बातचीत में उनको म्यूजिक, महिला अधिकारों और सामाजिक स्वतंत्रता के मामले में एक प्रगतिशील धर्मशास्त्री बताया था. हुसैन इस्लामी विचारों के साथ ही वेस्टर्न फिलॉसफी में भी उनकी समान रुचि है.
 

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