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फ्लाइट में प्लंबर ने चाकूबाज पायलट को कैसे काबू किया? जवाब है इजरायल का 'पीपुल्स आर्मी' वाला सीक्रेट

दुबई से तेल अवीव आ रही फ्लाइट में भारतीय कैप्टन पर हमला करने वाले को-पायलट को एक प्लंबर ने काबू में किया. लेकिन एक प्लंबर ने कैसे उसका मुकाबला किया? जानते हैं.

फ्लाइट में प्लंबर ने चाकूबाज पायलट को कैसे काबू किया? जवाब है इजरायल का 'पीपुल्स आर्मी' वाला सीक्रेट
यानिव हायून के साथ नेतन्याहू.
IANS
  • दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट में पायलट ने साथी भारतीय कैप्टन पर हमला कर विमान को कब्जे में लेने की कोशिश की
  • इजरायली यात्री यानिव हायून ने हमलावर पायलट को चाकू से लैस होने के बावजूद काबू कर बड़ा हादसा टाल दिया
  • इजरायल में सभी को अनिवार्य सैन्य सेवा देनी होती है, जिसमें पुरुष 32 महीने और महिलाएं 24 महीने सेवा करती हैं
नई दिल्ली:

30 सितंबर की सुबह Flydubai की दुबई से तेल अवीव जाने वाली फ्लाइट उसमें सवार 174 यात्रियों के लिए जिंदगी भर न भूलने वाली घटना बन गई. विमान के एक पायलट ने अपने ही साथी भारतीय कैप्टन स्मित मछार पर हमला कर विमान को अपने कब्जे में लेने की कोशिश की.

भारतीय पायलट ने बेहद सूझबूझ और बहादुरी से हमलावर का मुकाबला किया. इसी दौरान विमान में सवार एक इजरायली यात्री यानिव हायून, जो पेशे से प्लंबर हैं, ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए चाकू से लैस हमलावर पायलट को काबू में कर लिया और एक बड़ा हादसा टल गया. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी हायून से मुलाकात की.

यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि एक साधारण पेशे से जुड़ा व्यक्ति, बिना किसी डर के चाकू से लैस हमलावर से कैसे भिड़ गया? इसका मुख्य कारण इजरायल की अनिवार्य सैन्य सेवा नीति है, जो हर नागरिक को आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार करती है.

अनिवार्य सैन्य सेवा

इजरायल में 1949 से 'कॉनक्रिप्शन' कानून लागू है. इसके तहत हर यहूदी नागरिक को अपनी पढ़ाई के बाद अनिवार्य रूप से इजरायल डिफेंस फोर्सेस (IDF) में अपनी सेवाएं देनी होती हैं:

  • पुरुषों के लिए: 32 महीने (लगभग 2.5 साल) का सेवा काल.
  • महिलाओं के लिए: 24 महीने (2 साल) का सेवा काल.

यानी, वो व्यक्ति भले ही आज प्लंबर का काम कर रहा हो, लेकिन अपनी युवावस्था के 2 से 3 साल उसने बैरक में, आधुनिक हथियारों के साथ और सख्त सैन्य अनुशासन के बीच बिताए थे.

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संकट में तुरंत एक्शन लेने की ट्रेनिंग

IDF में युवाओं को उनके मेडिकल प्रोफाइल के हिसाब से जिम्मेदारियां दी जाती हैं:

  • कॉम्बैट यूनिट्स: जो शारीरिक रूप से सबसे फिट होते हैं, उन्हें पैदल सेना, इंटेलिजेंस या कॉम्बैट इंजीनियरिंग में भेजा जाता है.
  • सपोर्ट यूनिट्स: बाकी लोगों को आर्मर्ड कॉर्प्स, बॉर्डर पुलिस या लॉजिस्टिक्स की जिम्मेदारी मिलती है.

चाहे कोई कॉम्बैट में रहा हो या सपोर्ट में, हर सैनिक को अनपेक्षित हमलों से निपटने और हाथ से हाथ की लड़ाई की ट्रेनिंग जरूर मिलती है. जब विमान में चाकूबाज ने हमला किया, तो प्लंबर की 'मसल मेमोरी' और सैन्य ट्रेनिंग तुरंत एक्टिव हो गई. घबराने के बजाय उसने सीधे हमलावर को काबू में कर लिया.

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'द पीपुल्स आर्मी' और सामाजिक जिम्मेदारी

इजरायल में सेना केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय पहचान का हिस्सा है. इसे 'द पीपुल्स आर्मी' कहा जाता है. वहां हर नागरिक को सिखाया जाता है कि मुसीबत के समय पुलिस या सेना का इंतजार करने के बजाय, सुरक्षा की 'फ्रंटलाइन' खुद वही हैं.

इजरायली सैन्य व्यवस्था से जुड़े अन्य अहम पहलू:

किन्हें मिलती है छूट?

  • इजरायल के अरब नागरिकों को अनिवार्य सेवा से छूट है. वे अपनी मर्जी से आ सकते हैं.
  • गंभीर मेडिकल स्थिति वाले लोगों या देश के नामी खिलाड़ियों/कलाकारों को राहत मिलती है.
  • 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कट्टरपंथी यहूदी छात्रों को मिलने वाली पुरानी छूट को भी खत्म कर दिया, ताकि युद्ध के समय देश में बराबरी का नियम लागू रहे.
  • सेना छोड़ने के बाद भी नागरिक रिजर्व का हिस्सा रहते हैं और आपातकाल में उन्हें दोबारा बुलाया जा सकता है, जिससे उनकी ट्रेनिंग हमेशा तरो-ताजा रहती है.
  • पेशे से प्लंबर दिखने वाले इजरायली नागरिक दरअसल इजरायल की उसी सैन्य व्यवस्था की उपज थे, जो अपने हर नागरिक को संकट की घड़ी में मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार रखती है.
  • अनिवार्य सैन्य सेवा से मिला यही कड़ा प्रशिक्षण और त्वरित निर्णय लेने का कौशल था, जिसकी बदौलत एक आम नागरिक ने हवा में उड़ते विमान में जान की परवाह न करते हुए भारतीय पायलट का साथ दिया और हमलावर पायलट को काबू में करके सैकड़ों जिंदगियों को एक बड़े हादसे से बचा लिया.

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