- ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में फारस की खाड़ी के कई देशों पर शाहेद ड्रोन से हमला किया
- शाहेद ड्रोन छोटे आकार के होते हैं और 40 किलो तक विस्फोटक लेकर सस्ते दामों में बड़े पैमाने पर बनाए जाते हैं
- रूस ने यूक्रेन युद्ध में ईरान से शाहेद ड्रोन मंगाकर उनका अपना संस्करण गेरान विकसित किया है
27 फरवरी की सुबह जिस तैयारी के साथ इजरायल और अमेरिका ने ईरान को तबाह करने के मकसद से तेहरान में धमाके किए थे, उसके बाद तो डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू ने भी मान लिया था कि इस देश का अंत निश्चित है. ईरान के सुप्रीम लीडर अयोतल्लाह खामेनेई की मौत ने तो ईरान को और भड़का दिया. अपने सर्वेसर्वा नेता सहित बड़े पदों पर बैठे दिग्गज नेताओं के खात्मे के बाद ईरान अब भी कमजोर नहीं पड़ा है, ओमान,कतर, दुबई,कुवैत में अमेरिकी सैन्य बेस पर हमला और लगातार हथियारों से हमले से तो तय है कि ईरान इतना जल्दी तो हार नहीं मानेगा. इसी बीच ईरान के ड्रोन्स ने अमेरिका और इजरायल को भी परेशान कर रखा है. आइए समझते हैं कैसे
कैसे अपने दुश्मनों को उलझा देता है ईरान का ड्रोन?
ईरान के पास उसका सबसे भरोसमंद हथियार के रूप में मशहूर शाहेद ड्रोन जो सालों से यूक्रेन के खिलाफ रूस इस्तेमाल कर रहा है, अब फारस की खाड़ी यानी पर्शियन गल्फ में भी देखा जा रहा है. अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में तेहरान ने ये ड्रोन कई खाड़ी देशों की ओर छोड़े हैं. रूस 2022 की शुरुआत से ही यूक्रेन में शाहेद ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है. ईरान से इन्हें मंगाने के बाद रूस ने अपना वर्जन 'गेरान' (Geran) तैयार किया, जिसे तातारस्तान में भारी संख्या में बनाया जा रहा है. इन ड्रोनों को झुंड में उड़ाया जाता है ताकि दुश्मन का एयर डिफेंस सिस्टम महंगी मिसाइलों को छोड़कर इन्हीं में उलझा रहे और लगातार नुकसान होता रहे. यूक्रेन ने इसके जवाब में मशीन-गन वाली मोबाइल टीमें और इंटरसेप्टर ड्रोन तैनात किए हैं, लेकिन हमलों की बढ़ती संख्या उनकी सुरक्षा व्यवस्था पर भारी पड़ रही है.
Iranian children take a souvenir photo with the famous Iranian drone, #Shahed.#Iran pic.twitter.com/YvZ7a7Rfcb
— IRIB (Islamic Republic of Iran Broadcasting) (@iribnews_irib) February 11, 2026
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले हफ्ते अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद, ईरान ने इजरायल, सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत, कतर और यूएई (UAE) को निशाना बनाया. इन हमलों में बंदरगाहों, तेल केंद्रों, सैन्य अड्डों, हवाई अड्डों और कुछ ऊंची इमारतों पर हमला किया गया था. दुबई में, एयर डिफेंस सिस्टम ने दो दिनों में 165 बैलिस्टिक मिसाइलों, दो क्रूज मिसाइलों और 540 से ज्यादा ड्रोनों को हवा में ही रोक दिया, हालांकि इनके मलबे गिरने से कई जगहों पर आग लगने की भी खबरें मिलीं.

शाहेद की खासियत जानिए
कुछ ईरानी ड्रोन तो साइप्रस स्थित ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स के बेस (अक्रोटिरी) तक भी पहुंच गए.वहां लगातार कई दिनों तक ईरानी ड्रोनों के आने और उन्हें मार गिराए जाने के दौरान खतरे के सायरन बजते रहे.'शाहेद' (Shahed) ड्रोन आकार में छोटे और काफी सस्ते होते हैं, जो अपने साथ 40 किलो तक विस्फोटक ले जा सकते हैं.हालांकि ये मिसाइलों से धीमे चलते हैं, लेकिन इनकी कम कीमत और भारी संख्या की वजह से ईरान किसी भी देश के डिफेंस सिस्टम को आसानी से थका या उलझा सकता है. ये आधुनिक युद्ध के तरीके को पूरी तरह बदल रहे हैं, क्योंकि इनमें निगरानी रखने, सटीक हमला करने और AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) के जरिए निशाना साधने की खूबी होती है.

द गार्डियन में छपी रिपोर्ट के अनुसार, शाहेद ड्रोन की लंबाई 3.5 मीटर और विंगस्पैन 2.5 मीटर होता है. इनकी कीमत कम है और इन्हें बनाना भी आसान है.खासकर बैलिस्टिक मिसाइलों की तुलना में तो और भी आसान. अमेरिका–इजरायल की बमबारी शुरू होने से पहले ईरान हर साल बैलिस्टिक मिसाइलों की सिर्फ कुछ दर्जन ही बना पाता था. इसी वजह से माना जा रहा है कि ये ड्रोन अभी कुछ समय तक इस संघर्ष का हिस्सा बने रहेंगे.
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