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अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर, क्या गोलियों के साथ ट्रंप की गालियां भी रहीं कारगर?

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के 40वें दिन दो हफ्ते के संघर्षविराम पर रजामंदी बन गई है. हालांकि ये सीजफायर कितना कारगर होगा, ये दोनों देशों के बीच वार्ता के बाद ही साफ होगा.

अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर, क्या गोलियों के साथ ट्रंप की गालियां भी रहीं कारगर?
US President Donald Trump
नई दिल्ली:

अमेरिका और ईरान के बीच डेडलाइन खत्म होने के 90 मिनट पहले संघर्षविराम होने से सबने राहत की सांस ली. दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को तेल के जहाजों की आवाजाही के लिए बुधवार सुबह 5.30 बजे तक होर्मुज न खोलने पर पूरे देश की सभ्यता को नष्ट करने और उसे जहन्नुम बनाने की धमकी दी थी. अमेरिका ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में ईरान के लिए आपत्तिजनक बातें भी लिखी थीं. अल्टीमेटम के कुछ घंटों पहले खार्ग द्वीप समेत कुछ जगहों पर बड़े हमले भी किए गए. तबाही का खतरा देख चीन, पाकिस्तान से लेकर तुर्की तक युद्धस्तर पर कूटनीतिक प्रयास शुरू हो गए और अमेरिका की धमकियों के बीच ईरान मान गया. सवाल उठता है कि क्या जो काम अमेरिकी और इजरायली फौज की गोलियां नहीं कर सकीं, क्यों वो ऐन वक्त में उनकी गालियों ने कर दिखाया. 

ट्रंप ने खुद डेडलाइन के 90 मिनट पहले ऐलान किया कि पाकिस्तान के प्रस्ताव अमेरिका ईरान के साथ 14 दिन के संघर्षविराम पर राजी हो गया है. ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के अनुरोध पर ईरान के खिलाफ होने वाली विनाशकारी कार्रवाई इस शर्त पर रोक दी है कि ईरान होर्मुज को तुरंत पूरी तरह से खोल देगा.

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने भी संघर्षविराम को मान लिया है और वह 10 अप्रैल से इस्लामाबाद में अमेरिका से बातचीत को राजी हो गया है. देखना होगा कि क्या दोनों देश बातचीत की मेज पर आते हैं और संघर्षविराम की शर्तों की धुंधली तस्वीर साफ हो सकेगी. 

बातचीत के बीच ट्रंप ने इजरायल के साथ ईरान पर 28 फरवरी को हमला बोला था और पहले ही दिन ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई शीर्ष अधिकारियों का खात्मा कर दिया था. हालांकि ताबड़तोड़ हमलों के बीच ईरान में सत्ता परिवर्तन, ईरान के जातीय गुटों में फूट जैसे अमेरिका-इजरायल की उम्मीदें चकनाचूर होती नजर आईं.

सीजफायर पर ईरान का प्लान

  • परमाणु कार्यक्रम के लिए संवर्धन की स्वीकृति 
  • ईरान और ओमान होर्मुज से जहाजों से शुल्क लेने की अनुमति 
  • संघर्षविराम के बदले अमेरिकी सैनिकों की ईरानी क्षेत्र से वापसी
  • ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाया जाए
  • ईरान की सीज परिसंपत्तियों पर लगी रोक हटाई जाए
     
Trump

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परमाणु और मिसाइल भंडारों पर हमलों के बावजूद ईरान ने न केवल इजरायल के तेल अवीव, येरूशलम जैसे शहरों में मिसाइलों की बारिश की, बल्कि मिडिल ईस्ट में अमेरिका के मददगार देशों पर भी ड्रोन-मिसाइल अटैक किए तो होर्मुज में हाहाकार मच गया. कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई और उस समुद्री गलियारे के आसपास जहाजों का ट्रैफिक जाम सा लग गया. सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन, ओमान, जॉर्डन, यूएई में ताबड़तोड़ हमले ईरान ने किए.

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इस बीच एफ-35, एफ-15 जैसे लड़ाकू विमान गिरने लगे और ईरान में पायलट के बंधक बनाने के डर से अमेरिका शर्मसार होता नजर आया तो ट्रंप ने असाधारण कदम उठाते हुए फुल एंड फाइनल अटैक का फैसला कर डाला. इससे पूरी दुनिया में खलबली मची. अमेरिकी और इजरायली फौज ने कुछ ब्रिज और खार्ग द्वीप पर आखिरी घंटों में हमलाकर ट्रेलर दिखाया तो कूटनीतिक पहल युद्धस्तर पर शुरू हो गईं. चीन, पाकिस्तान से लेकर तुर्की तक सक्रिय हो गए. आखिरकार ट्रंप की धमकियों, गालियों के बीच ईरान मान गया.  

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