काबुल:
अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने बृहस्पतिवार को पाकिस्तान से तालिबान की सुरक्षित पनाहगाहों को खत्म करने की मांग करते हुए इस्लामाबाद पर दबाव बढ़ा दिया। हिलेरी ने काबुल में अफगान राष्ट्रपति हामिद करजई से बातचीत के दौरान तीखी भाषा का इस्तेमाल किया। उग्रवादियों से बातचीत करने वाले मध्यस्थ के मारे जाने के बाद तालिबान के साथ सुलह सहमति के प्रयास करीब एक माह से बाधित पड़े हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री ने तालिबान को एक शांतिपूर्ण भविष्य अपनाने के लिए कहा और ऐसा न करने पर इसका नतीजा भुगतने की चेतावनी दी। लेकिन उन्होंने इस्लामाबाद से अनुरोध किया कि अफगानिस्तान में 10 साल से चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए उग्रवादियों से बातचीत में वह सकारात्मक भूमिका निभाए। बहरहाल, इस्लामाबाद में कई नीति निर्माताओं को लगता है कि मैदान में लड़ाई के लिए दबाव और सुलह सहमति के प्रयासों की अमेरिका की दोहरी नीति विरोधाभासी है। इन नीति निर्माताओं का तर्क है कि पाकिस्तान अब और अधिक कुर्बानी नहीं दे सकता। हिलेरी बाद में पाकिस्तान जाएंगी जहां उनके साथ सीआईए प्रमुख जनरल डेविड पेट्रॉस और ज्वाइंट चीफ्स आफ स्टाफ प्रमुख जनरल मार्टिन डेंपसी भी शामिल होंगे। अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा अब सवाल यह है कि पाकिस्तान उग्रवादियों की पनाहगाहों को लेकर कितना सहयोग करेगा। हमारा इरादा पाकिस्तान को कडे शब्दों में समझाना है कि वह सुरक्षित पनाहगाहों को हटाने और अफगानिस्तान के लिए सीमा पार से जारी खतरे को लेकर हमारे साथ क्या चाहते हैं।