- महाराष्ट्र में मालेगांव के मेयर कार्यालय में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाने को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है
- कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने टीपू सुल्तान की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज से की है
- कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने BJP पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया है
महाराष्ट्र में टीपू सुल्तान को लेकर राजनीतिक तापमान गर्म है. बीजेपी और कांग्रेस के साथ ही एआईएमआईएम प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस मुद्दे पर टिप्पणी की है. ओवैसी ने कहा कि “टीपू सुल्तान अंग्रेजों से लड़ते हुए शहीद हुए. उन्होंने अंग्रेजों को लव लेटर नहीं लिखे, जैसा वीर सावरकर ने किया था.” उधर, महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज की तुलना टीपू सुल्तान से करने पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस बेहद नाराज़ दिखे. उन्होंने कहा, “वोटों के लालच में कितने भी जूते चाटे, महाराष्ट्र यह तुलना कभी सहन नहीं करेगा.”
इस बीच, कांग्रेस नेता और प्रवक्ता सचिन सावंत ने सोशल मीडिया पर एक लंबा पोस्ट साझा कर भाजपा पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि भाजपा पहले टीपू सुल्तान का सम्मान करती थी, लेकिन अब ध्रुवीकरण की राजनीति के लिए उनके खिलाफ माहौल बना रही है.
सावंत ने दिए कई उदाहरण
इसके बाद उन्होंने 2013 का उदाहरण दिया, जब मुंबई के एम/पूर्व वार्ड में एक सड़क का नाम “शहीद टीपू सुल्तान मार्ग” रखने का प्रस्ताव भाजपा के नगरसेवक ने पेश किया था, जिसमें आज की महापौर ऋतु तावड़े सहित कई भाजपा नेताओं के हस्ताक्षर मौजूद हैं.
सावंत के अनुसार 2001 में अंधेरी (पश्चिम) में “शेर‑ए‑मैसूर टीपू सुल्तान” रोड का नामकरण भी भाजपा के पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी और भाजपा नगरसेवकों की मौजूदगी में सर्वसम्मति से पास किया गया था. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येडियुरप्पा स्वयं टीपू सुल्तान की कब्र पर गए थे और आगंतुक पुस्तिका में प्रशंसा लिखकर गए थे.
साथ ही 2017 में कर्नाटक विधानसभा में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी टीपू सुल्तान को लेकर सकारात्मक बातें कही थीं.
सचिन सावंत का आरोप है कि भाजपा ने पहले टीपू सुल्तान का सम्मान किया, लेकिन अब राजनीति में ध्रुवीकरण के लिए उनका विरोध करना शुरू कर दिया है. उन्होंने लिखा “पहले प्रेम था, अब ध्रुवीकरण के एजेंडे के लिए टीपू सुल्तान बुरे हो गए… इसे क्या कहा जाए?” उन्होंने यह भी जोड़ा “टीपू सुल्तान भगवान श्रीराम का नाम लिखी अंगूठी पहनते थे.”
संजय निरुपम बोले मालेगांव कट्टरपंथी के लिए कुख्यात
शिवसेना के प्रवक्ता संजय निरुपम ने कहा कि देश के महापुरुषों की तस्वीर लगाने के बदले टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाना निंदनीय है. देश के लाखों स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान है. उन्होंने कहा कि मालेगांव पहले से ही कट्टरपंथी तत्वों के लिए कुख्यात रहा है और देश में जब भी बड़ा बम विस्फोट होता है तो उसका कोई न कोई संबंध मालेगांव से जुड़ता रहा है. निरुपम ने कहा कि मालेगांव म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में डिप्टी मेयर के कार्यालय में केवल टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाए जाने की घटना आपत्तिजनक है. उनके अनुसार, टीपू सुल्तान राष्ट्रपुरुष नहीं थे, बल्कि एक रियासत के प्रमुख थे, जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ मैसूर में सत्ता बचाने के लिए युद्ध लड़ा, न कि देश की आजादी के लिए.
शाइना एनसी और आनंद परांजपे भी बरसे
एनसीपी प्रवक्ता आनंद परांपजे ने कहा कि यह बहुत गलत है. सरकारी कार्यालय में सिर्फ राष्ट्रीय नेताओं की तस्वीरें लगनी चाहिए. टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाना ऐतिहासिक संदर्भ में विवादास्पद है और यह सरकारी स्थान की गरिमा के खिलाफ है. शाइना एनसी ने कहा कि सार्वजनिक पद पर बैठने वाले व्यक्ति को संविधान द्वारा दी गई जिम्मेदारी समझनी चाहिए. देश के सच्चे नायकों में छत्रपति शिवाजी महाराज, महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर शामिल हैं, जिनका सम्मान किया जाना चाहिए.
देवेंद्र फडणवीस का जवाब
मु्ख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सपकाल पर निशाना साधते हुए कहा कि यह तुलना निंदनीय है और कांग्रेस नेता को खुद पर शर्म आनी चाहिए. नागपुर पहुंचे सीएम ने कहा कि महाराष्ट्र इसे बर्दाश्त नहीं करेगा. सपकाल को छत्रपति शिवाजी महाराज की तुलना टीपू सुल्तान से करने के लिए माफी मांगनी चाहिए. कांग्रेस को इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए और उसके सहयोगी दलों को सपकाल की टिप्पणी पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए. बाद में सपकाल ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता अतुलनीय है, जबकि टीपू सुल्तान वीर और स्वराज प्रेमी थे.
संजय राउत ने क्या कहा?
टीपू सुल्तान विवाद पर संजय राउत ने कहा है कि सपकाल और कांग्रेस का मामला हम देख लेंगे. लेकिन यह विषय पहले किसने छेड़ा? छत्रपति शिवाजी महाराज और टीपू सुल्तान की तुलना कभी नहीं हो सकती, चाहे कोई कुछ भी कहे. भाजपा ने ही मुंबई के मानखुर्द में एक बगीचे को टीपू सुल्तान का नाम दिया है. टीपू सुल्तान को मानने वाले सभी लोग भाजपा में ही हैं.
क्यों हो रहा है विवाद?
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब मालेगांव में मेयर कार्यालय में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाए जाने को लेकर नया राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है. जैसे ही तस्वीर लगने की खबर फैली, कई दलों ने आपत्ति जताई. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से लेकर अन्य नेताओं ने इसे गंभीर मामला बताया.
विवाद उस समय और बढ़ गया जब महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि टीपू सुल्तान को भी छत्रपति शिवाजी महाराज की तरह बहादुर और आज़ादी का प्रतीक माना जाना चाहिए. उनके बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है.महाराष्ट्र में टीपू सुल्तान को लेकर चल रहा विवाद अभी ठंडा होता नहीं दिख रहा.
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