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भारत के पास पर्याप्त है तेल रिजर्व, अगर युद्ध लंबा चला तो भी आराम से कट जाएंगे इतने दिन

India Oil Reserves: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत के पास अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त तेल भंडार है, जो किसी भी स्थिति में देश को 74 दिनों तक सप्लाई देता रहेगा.

भारत के पास पर्याप्त है तेल रिजर्व, अगर युद्ध लंबा चला तो भी आराम से कट जाएंगे इतने दिन

India Oil Reserves: पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और ईरान-इजरायल के बीच छिड़ी जंग ने पूरी दुनिया की सांसें अटका दी हैं. जहां एक तरफ रविवार को ओमान के पास से गुजर रहे एक तेल टैंकर पर मिसाइल हमले हुए, दूसरी तरफ ईरान के सरकारी मीडिया ने बताया की कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है. अब ऐसे तनाव के बीच भारत के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या हमारे पास पर्याप्त तेल का भंडार है? या फिर देश में पेट्रोल-डीजल की किल्लत हो जाएगी? आइए इस खबर में भारत की तेल भंडार की मौजूदा स्थिति पर एक नजर डालते हैं.

India Oil Reserves

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घबराने की जरूरत नहीं

अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार भारत को निकट भविष्य में तेल आपूर्ति में किसी प्रकार की रुकावट का सामना करने की संभावना नहीं है. फरवरी की शुरुआत में तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राज्यसभा को बताया था कि भारत का पेट्रोलियम भंडार किसी भी वैश्विक उथल-पुथल से पैदा हुई मांग को पूरा करने के लिए 74 दिनों तक चल सकता है. यानी भारत इस तरह की किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है.

हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि हमारी तेल की जो बचत है, वो सिर्फ भूमिगत गुफाओं में ही नहीं, बल्कि हमारी रिफाइनरियों में भी रखी जाती है. उन्होंने बताया हमारी भूमिगत तेल भंडारण गुफाएं आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में हैं. ओडिशा में भी जल्द ही काम शुरू होने की उम्मीद है. इन गुफाओं में रखा तेल के साथ रिफाइनरियों में रखा तेल, बंदरगाहों पर मौजूद हमारे जहाजों में रखा तेल और प्रोडक्ट का कुल मिलाकर 74 दिनों का तेल भंडार बनता है.

देश के आपातकालीन तेल भंडार लगभग 9.5 दिनों तक चल सकते हैं. इसके अलावा, तेल कंपनियों के पास जो कच्चा तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का स्टॉक है, वह लगभग 67 दिनों तक चल सकता है. एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में तेल विशेषज्ञ और पूर्व योजना आयोग के सदस्य किरित पारिख ने कहा कि अगर अमेरिका, इज़रायल और ईरान के बीच युद्ध लंबे समय तक चलता है तो तेल की कीमतें बढ़ेंगी. ऐसी स्थिति में भारत को रूस से ज्यादा तेल खरीदना चाहिए, जिससे कीमतों का दबाव कम किया जा सके.

उन्होंने आगे कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में 1 डॉलर प्रति बैरल का इजाफा होता है तो इससे भारत के तेल आयात की लागत में 1.4 अरब डॉलर बढ़ सकती है. साथ में गैस की कीमतें भी बढ़ेंगी क्योंकि भारत अपनी गैस जरूरतों का लगभग 50% हिस्सा विदेशों से खरीदता है.

होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट क्यों है बड़ा?

दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल और बड़ी मात्रा में लिक्विफाइड नेचुरल गैस स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते ही गुजरती है. भारत अपनी जरूरत का लगभग 45% कच्चा तेल इसी समुद्री रास्ते से मंगवाता है.

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