- नेपाल में बालेन शाह सरकार के खिलाफ भूमिहीन झुग्गीवासियों के पुनर्वास न होने पर व्यापक विरोध प्रदर्शन हुआ
- काठमांडू में पासपोर्ट विभाग के पास गणेश नेपाली ने आत्मदाह कर सरकार की नीतियों के खिलाफ आक्रोश जताया
- पुलिस ने विरोध प्रदर्शन में शामिल समाजसेवी, पत्रकार और छात्रों को गिरफ्तार किया तथा लाठीचार्ज भी किया
नेपाल में एक बार फिर बालेन शाह सरकार के खिलाफ जेन-जी का विरोध प्रदर्शन भड़क उठा है. सरकारी नीतियों और व्यवस्था से हताश होकर दो लोगों ने आत्मदाह कर लिया. कुछ समाजसेवी, छात्रों और पत्रकारों को भी गिरफ्तार कर लिया गया है. सरकार द्वारा भूमिहीन झुग्गीवासियों के लिए वैकल्पिक पुनर्वास की व्यवस्था किए बिना उन्हें हटाए जाने के फैसले से लोग भड़क गए. सैकड़ों लोगों ने इसके खिलाफ प्रदर्शन किया.
इस नए आक्रोश की सबसे तात्कालिक वजह जुलाई 2026 की शुरुआत में सामने आई, जब 25 वर्षीय गणेश नेपाली (मूल रूप से मुगु निवासी) ने काठमांडू में पासपोर्ट विभाग भवन के पास आत्मदाह कर लिया. इस बार विरोध प्रदर्शन नेपाल के काठमांडू नगर निगम पुलिस के खिलाफ शुरू हुआ.
बागमती नदी के किनारे बसी बस्तियों पर सरकारी कार्रवाई के बाद भूमिहीन लोगों को, जिन्हें "सुकुंबासी" कहा जाता है, आरोप है कि नेपाल सरकार उन्हें अमानवीय परिस्थितियों में रख रही है.

इस बीच, काठमांडू के कीर्तिपुर स्थित सरकार के एक अस्थायी आवास केंद्र में शुक्रवार रात आई बाढ़ से पानी भर गया. इसके बाद सुरक्षाबलों की मदद से वहां रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया. वहां करीब 150 भूमिहीन झुग्गीवासी रह रहे थे.
घटना की जानकारी लेने के लिए ‘जेन जेड' से जुड़े युवा कार्यकर्ता शनिवार को वहां पहुंचे, लेकिन पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया. इस दौरान एक कार्यकर्ता के चेहरे पर चोट लगी, जिसे स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया।.
नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष गगन कुमार थापा ने कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की आलोचना करते हुए पुलिस कार्रवाई पर आपत्ति जताई और गिरफ्तार लोगों को तत्काल रिहा करने की मांग की.

उधर, कोशी प्रांत में मोरांग जिला पुलिस कार्यालय के मुख्य द्वार पर ‘जेन जेड' कार्यकर्ताओं के साथ कथित दुर्व्यवहार के विरोध में धरना दे रहे 26 लोगों को भी पुलिस ने रविवार को गिरफ्तार कर लिया.
सरकार ने दो जुलाई को भूमिहीन झुग्गीवासियों को छह जुलाई तक इन अस्थायी आवास केंद्रों को खाली करने का निर्देश दिया था. हालांकि, गुरुवार तक 60 से अधिक परिवार वहां रह रहे थे.
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