- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की छह दिवसीय यात्रा पूरी की
- पीएम ने ऑस्ट्रेलियाई पीएम को भारत की प्रीमियम कॉफी और कोलोनियल कजिन्स संगीत एल्बम भेंट किया
- इंडोनेशिया के राष्ट्रपति को उत्तराखंड की पारंपरिक ऐपन कला और मनोहरी गोल्ड तोहफे में दिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की अपनी तीन देशों की छह दिवसीय यात्रा पूरी की. विदेश मंत्रालय (एमईए) ने पीएम के इस दौरे को महत्वपूर्ण उपलब्धियों वाला बताया. इस दौरान राष्ट्राध्यक्षों ने एक-दूसरे को तोहफे भी दिए. पीएम मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के पीएम एंथनी अल्बानीज़ को इंडियन प्रीमियम कॉफ़ी बॉक्स और 'कोलोनियल कजिन्स' एलबम गिफ्ट किया. वहीं इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो को उत्तराखंड की ऐपन कला और मनोहरी गोल्ड टी भेंट की.
इंडियन प्रीमियम कॉफ़ी बॉक्स भारत के मुख्य कॉफ़ी उगाने वाले इलाकों में पैदा होने वाली कॉफ़ी की विविधता और क्वालिटी को दिखाता है. इसमें चुनिंदा कॉफ़ी की किस्में हैं, जिनका स्वाद जियोग्राफी, एल्टीट्यूड और प्रोसेसिंग के तरीकों से तय होता है. यह वॉश्ड, नेचुरल और हनी प्रोसेस के ज़रिए प्रीमियम कॉफ़ी बनाने में भारत की महारत को भी दिखाता है.

ये बॉक्स सिर्फ़ बेहतरीन कॉफ़ी का कलेक्शन नहीं है, बल्कि भारत के बढ़ते कॉफ़ी सेक्टर को भी दिखाता है, जिसमें क्वालिटी, सस्टेनेबिलिटी और वैल्यू एडिशन पर ज़ोर दिया गया है. यह पर्यावरण के अनुकूल खेती के तरीकों को अपनाते हुए वर्ल्ड-क्लास कॉफ़ी देने वाले किसानों, प्रोसेसर्स और रोस्टर्स की कोशिशों का सम्मान करता है.
संगीत के लिहाज़ से अहम होने के अलावा, विनाइल फ़ॉर्मेट इस एल्बम को एक सांस्कृतिक धरोहर के तौर पर संजोकर रखता है. यह सुनने का एक शानदार अनुभव देता है और साथ ही भारतीय विरासत और ग्लोबल संगीत के अनोखे मेल का जश्न मनाता है.

प्रधानमंत्री ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो को उत्तराखंड की ऐपन कला (भगवान शिव की आकृति) तोहफे में दिया. ऐपन, उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र की एक पारंपरिक लोक कला है. इसे मुख्य रूप से महिलाएं त्योहारों के दौरान ज़मीन और दीवारों पर बनाती हैं. इसमें गेरू (लाल मिट्टी का रंग) का बेस और चावल के आटे के घोल (बिस्वार) से बारीक सफ़ेद पैटर्न बनाए जाते हैं. बहुत बारीकी से हाथ से बनाई जाने वाली यह कला सदियों पुरानी परंपराओं को दर्शाती है जो पीढ़ियों से चली आ रही हैं.
यह कलाकृति भगवान शिव को समर्पित है और इसमें पवित्र ज्यामितीय आकृतियां बनी हैं जो ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रतीक हैं. यह भारत में कला और आध्यात्मिकता के गहरे संबंध को उजागर करती है. यह भारत और इंडोनेशिया की साझा सांस्कृतिक विरासत का भी जश्न मनाती है, जिससे यह दोनों देशों के बीच गहरी दोस्ती और मज़बूत सांस्कृतिक संबंधों का एक सार्थक प्रतीक बन जाती है.

इसका उत्पादन बहुत कम मात्रा में (लगभग 25 ग्राम प्रतिदिन) होता है, इसलिए यह दुनिया की सबसे दुर्लभ कारीगरी वाली चाय में से एक है. एंटीऑक्सीडेंट और चाय पॉलीफेनोल से भरपूर यह चाय पीने में स्मूद और प्राकृतिक रूप से मीठी होती है. इसमें फूलों और हल्के माल्टी स्वाद की झलक मिलती है, जो विश्व-स्तरीय खास चाय बनाने में भारत की उत्कृष्टता को दर्शाती है.
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