- नेपाल सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को हर पंद्रह दिन में वेतन देने का फैसला लिया
- नेपाल में यूनिवर्सिटीज और स्वास्थ्य संस्थानों से राजनीतिक दलों पर आधारित छात्र तथा कर्मचारी यूनियन भी भंग
- नेपाल में सात पूर्व प्रधानमंत्रियों समेत सौ अधिकारियों और मंत्रियों की संपत्ति पर जांच बैठाई गई है
Nepal New Balen Shah Government: भारत के पड़ोसी देश नेपाल में जब से बालेन शाह के नेतृत्व में नई सरकार आई है, तब से वहां एक से बढ़कर एक बड़े फैसले लिए जा रहे हैं. वहां पूर्व प्रधानमंत्री गिरफ्तार हो रहे हैं, 7 पूर्व PM समेत मंत्री और अधिकारी समेत 100 लोगों की संपत्ति पर जांच बैठा गई है. इस बीच वहां दो और बड़े फैसले लिए गए हैं- अब बालेन सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को हर 15 दिन में वेतन देने का फैसला किया है. साथ ही वहां के यूनिवर्सिटी में अब बस पढ़ाई होगी, इन्हें राजनीतिक दलों पर आधारित छात्र और कर्मचारी यूनियन को भंग करने का निर्देश दे दिया गया है.
15 दिन पर सैलरी
नेपाल सरकार ने अपनी अर्थव्यवस्था में जान फूंकने और बाजार में नकदी के प्रवाह को बढ़ाने के लिए सरकारी कर्मचारियों को हर 15 दिन में वेतन देने का फैसला किया है. इससे पहले हर महीने सैलरी देने की जो पुरानी परंपरा थी, उसे बदल दिया गया है. 17 अप्रैल को वित्त मंत्री स्तर पर यह फैसला लिया गया. इस फैसले को लागू करने के लिए संबंधित सरकारी दफ्तरों को पहले ही सर्कुलर जारी कर दिया गया है.
दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में ऐसा नहीं होता है, जहां आम तौर पर सरकारी कर्मचारियों को हर महीने सैलरी दी जाती है. दक्षिण एशिया में भी भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, श्रीलंका और मालदीव जैसे देश सरकारी कर्मचारियों को हर महीने सैलरी देते हैं.
यूनिवर्सिटीज से सियासी यूनियनों की छुट्टी
नेपाल के पीएम बालेंद्र शाह ने सोमवार को यूनिवर्सिटीज और स्वास्थ्य संस्थानों को राजनीतिक दलों पर आधारित छात्र तथा कर्मचारी संघों को भंग करने का निर्देश दिया.बालेन शाह ने सिंह दरबार सचिवालय स्थित अपने ऑफिस में यूनिवर्सिटीज के कुलपतियों (VC) और स्वास्थ्य संस्थानों के प्रमुखों के साथ तीन घंटे की लंबी चर्चा के दौरान ये निर्देश जारी किए.
प्रधानमंत्री सचिवालय के अनुसार, अपने जवाब में कुलपतियों ने उल्लेख किया था कि ऐसे संगठनों को भंग करने के लिए पहल की जा रही है, क्योंकि 'जेन जेड' आंदोलन के बाद छात्र राजनीति अप्रासंगिक हो गई है. पीएम शाह ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान में राजनीति को जगह नहीं दी जानी चाहिए और कोई भी कानून इस निर्णय को लागू करने में बाधा नहीं बन सकता.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं