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मैं आत्महत्या कर लूंगा; पूर्व PM मनमोहन सिंह ने चुनाव आयुक्त को घर बुलाकर ऐसा क्यों कहा था

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से जुड़ा यह किस्सा पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस. वाई कुरैशी ने अपनी किताब में लिखा है. कुरैशी ने उस घटना के बारे में भी बताया जिसके बाद व्यथित होकर मनमोहन सिंह ने कहा था- मैं आत्महत्या कर लूंगा.

मैं आत्महत्या कर लूंगा; पूर्व PM मनमोहन सिंह ने चुनाव आयुक्त को घर बुलाकर ऐसा क्यों कहा था
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह.
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  • पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लेकर एक रोचक किस्सा सामने आया है.
  • यह घटना 2012 की है, जब पीएम ने तब के चुनाव आयुक्त को अपने घर बुलाकर कहा था कि मैं आत्महत्या कर लूंगा.
  • मनमोहन सिंह से जुड़े इस किस्से के बारे में तब के चुनाव आयुक्त रहे एस. वाई. कुरैशी ने किताब में लिखा है.
नई दिल्ली:

2004 से 2014 तक 10 साल भारत के प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह को लेकर एक रोचक किस्सा अब सामने आया है. यह किस्सा 2012 का है. तब के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने तत्कालीन चुनाव आयुक्त एस. वाई कुरैशी से कहा था- मैं आत्महत्या कर लूंगा. कम बोलने के लिए चर्चित मनमोहन सिंह ने चुनाव आयुक्त एस. वाई कुरैशी को अपने घर बुलाकर आत्महत्या वाली बात कही थी. इस बात का खुलासा अब मुख्य चुनाव आयुक्त एस. वाई कुरैशी की किताब India and I: A Hundred Memories, Not a Memoir में किया गया है. अपनी किताब में एस. वाई कुरैशी ने मनमोहन सिंह से जुड़े इस किस्से के बारे में विस्तार से लिखा है. कुरैशी की यह किताब कुछ दिनों में मार्केट में आने वाली है.

पूर्व चुनाव आयुक्त ने बताया मनमोहन सिंह से जुड़ा वो किस्सा

कुरैशी के अनुसार, जनवरी 2012 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के दौरान तत्कालीन कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने एक चुनावी सभा में कहा था कि यदि उनकी पार्टी सत्ता में आई तो नौकरियों में मुसलमानों के लिए आरक्षण 4.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत कर दिया जाएगा.

इसके बाद भाजपा ने चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी. भाजपा का कहना था कि चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद किसी नई योजना या घोषणा की अनुमति नहीं है. कुरैशी लिखते हैं कि इस मामले में आयोग ने चार दिन तक सुनवाई की. कांग्रेस की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी और भाजपा की ओर से अरुण जेटली ने दलीलें पेश कीं. अंत में चुनाव आयोग ने सलमान खुर्शीद को फटकार लगाई.

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी कई किताबें लिख चुके हैं. अब उनकी नई किताब में मनमोहन सिंह को लेकर रोचक किस्सा सामने आया है.

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी कई किताबें लिख चुके हैं. अब उनकी नई किताब में मनमोहन सिंह को लेकर रोचक किस्सा सामने आया है.
Photo Credit: सोशल मीडिया

चुनाव आयोग ने सलमान खुर्शीद को लगाई थी फटकार 

इसके बाद खुर्शीद नाराज दिखे और कांग्रेस के कुछ नेताओं ने यह संकेत देना शुरू कर दिया कि चुनाव आयोग अहंकारी या मनमाना व्यवहार कर रहा है. कुरैशी लिखते हैं, 'आलोचना मुझे कभी परेशान नहीं करती, लेकिन जब संस्थाओं की विश्वसनीयता को कमजोर करने का प्रयास किया जाता है, तो वह चिंताजनक होता है. ऐसी गैर-जिम्मेदाराना बातें स्वीकार्य नहीं थीं.'

पीएम को कुरैशी को अपने घर बुलाया था

इसी दौरान कुरैशी ने अपने वार्षिक ईद मिलन समारोह में तत्कालीन प्रधानमंत्री के प्रेस सचिव हरीश खरे से अपनी नाराजगी का जिक्र किया. खरे ने पूछा कि क्या यह बात प्रधानमंत्री तक पहुंचाई जाए. कुरैशी ने सहमति जताई. अगले ही दिन प्रधानमंत्री कार्यालय से उन्हें फोन आया. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह स्वयं लाइन पर आए और कहा, 'कुरैशी जी, क्या मैं आपसे तुरंत मिल सकता हूं?'

मनमोहन ने कहा था- मैं आत्महत्या कर लूंगा

उन्होंने बताया कि पीएम से हुई इस बातचीत के बाद शाम 7 बजे मुलाकात तय हुई. कुरैशी प्रधानमंत्री आवास पहुंचे, जहां मनमोहन सिंह उनका इंतजार कर रहे थे. कुरैशी के कमरे में दाखिल होते ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बेहद व्यथित होकर कहा, 'हरीश ने मुझे बताया कि आपने क्या कहा. अगर आप ऐसा सोचते हैं, तो मैं आत्महत्या कर लूंगा.'

कुरैशी बोले- मनमोहन हमेशा चुनाव आयोग को भारत का गौरव बताते थे

कुरैशी लिखते हैं कि वे यह सुनकर अवाक रह गए क्योंकि उनकी शिकायत कुछ मंत्रियों के व्यवहार को लेकर थी, स्वयं प्रधानमंत्री को लेकर नहीं. उन्होंने बताया कि मनमोहन सिंह चुनाव आयोग को हमेशा भारत का गौरव बताते थे. उन्हें यह विचार भी असहनीय लगा कि कोई उनकी नीयत पर संदेह करे.

कुछ देर बाद स्थिति सामान्य हुई. तब मनमोहन सिंह ने कहा, 'मुझे इस बारे में बिल्कुल जानकारी नहीं थी. अगर मुझे पता होता, तो मैं उन लोगों को फटकार लगाता. भविष्य में यदि आपको कुछ कहना हो, तो सीधे मुझे फोन करिए.'

इसके बाद उन्होंने वह बात कही जिसे कुरैशी कभी नहीं भूल पाए. मनमोहन सिंह ने कहा- चुनाव आयोग सिर्फ भारत का गौरव नहीं है, यह हमारे लोकतंत्र की आत्मा है. अगर हम इसे खो देते हैं तो हम सब कुछ खो देंगे. कुरैशी लिखते हैं कि इस घटना ने उन्हें राजनीति से नहीं, बल्कि ऐसे नेता से प्रभावित किया जिसने सत्ता में रहते हुए भी संवैधानिक संस्थाओं के प्रति गहरी संवेदनशीलता दिखाई.

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