आर्थिक तंगी और मंदी की मार झेलने वाली पुरानी पीढ़ी (मिलेनियल्स) के मुकाबले आज के युवा यानी 'जेन जी' (Gen Z) कमाई के मामले में काफी खुशकिस्मत साबित हो रहे हैं. एक नए रिसर्च के मुताबिक, जेन जी के युवाओं के करियर का शुरुआती दौर मिलेनियल्स की तुलना में आर्थिक रूप से कहीं ज्यादा मजबूत और फायदेमंद है. जहां एक समय पर मिलेनियल्स के वेतन में भारी ठहराव आ गया था, वहीं जेन जी के सैलरी में एक बार फिर उछाल देखने को मिल रहा है.
लंदन के थिंकटैंक 'रेजोल्यूशन फाउंडेशन' की ताजा रिपोर्ट में यह दिलचस्प खुलासा हुआ है. आमतौर पर 1997 से 2012 के बीच पैदा हुए लोगों को जेन जी कहा जाता है. रिपोर्ट बताती है कि इस पीढ़ी के युवाओं को अपने करियर के शुरुआती सालों में पुरानी पीढ़ी से बेहतर सैलरी मिल रही है. इसके उलट, 1980 के दशक की शुरुआत से लेकर 1990 के दशक के मध्य के बीच पैदा हुए मिलेनियल्स इतिहास की ऐसी पहली पीढ़ी रहे हैं, जिनकी जेब में पिछली पीढ़ियों के मुकाबले ज्यादा खर्च करने लायक पैसा नहीं बच पाया है.

प्रतीकात्मक तस्वीर
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मंदी की मार V/s सैलरी में उछाल
थिंकटैंक के शोधकर्ताओं का कहना है कि मिलेनियल्स के पिछड़ने की सबसे बड़ी वजह यह थी कि जब उनका करियर शुरू हुआ, ठीक उसी समय यानी साल 2008 में दुनिया ने भीषण वित्तीय संकट झेला. इसके बाद से ही वास्तविक मजदूरी और सैलरी की ग्रोथ लंबे समय के लिए थम सी गई थी. लेकिन अब वक्त बदल चुका है.
रेजोल्यूशन फाउंडेशन के नए आंकड़े बताते हैं कि 1990 के दशक के अंत में पैदा हुए युवाओं की 24 साल की उम्र में वास्तविक साप्ताहिक कमाई, 1980 के दशक के अंत में पैदा हुए लोगों की तुलना में 12% अधिक दर्ज की गई है.
द गार्जियन ने रेजोल्यूशन फाउंडेशन के वरिष्ठ अर्थशास्त्री चार्ली मैककर्डी के हवाले से बताया है कि पिछले एक दशक में मिलेनियल्स के जीवन स्तर में आया ठहराव हर किसी ने देखा है. कई लोगों को लगा था कि पीढ़ियों की तरक्की का यह पहिया जेन जी के लिए भी थम जाएगा, लेकिन अच्छी खबर यह है कि कामकाजी दुनिया में कदम रख चुके जेन जी के बड़े सदस्यों की सैलरी में एक मिनी-रीबाउंड देखा गया है.
जमीनी स्तर पर हुआ बड़ा फायदा
इस रिपोर्ट में एक और बेहद अहम बात सामने आई है. कमाई में यह बढ़ोतरी सिर्फ ऊंचे पदों पर बैठे लोगों की नहीं हुई है, बल्कि सबसे कम कमाने वाले युवाओं को न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा फायदा मिला है. खासकर साल 2016 के बाद से न्यूनतम मजदूरी में जो तेजी आई, उसकी बदौलत साल 2012 से 2025 के बीच इन युवाओं की वास्तविक कमाई में 36% का बंपर उछाल आया है.

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अगर सैलरी के मिडिल लेवल यानी मध्यम स्तर की बात करें, तो 22 से 29 साल के कर्मचारियों की प्रति घंटा कमाई में इस अवधि के दौरान 15% की बढ़ोतरी देखी गई. इसकी तुलना में 30 से 39 साल के लोगों की सैलरी सिर्फ 4% और कुल मिलाकर सभी कर्मचारियों की औसत सैलरी केवल 11% ही बढ़ी. साफ है कि इस मामले में भी 20 से 29 साल के युवाओं का पलड़ा भारी रहा है.
क्या दोबारा मंडरा रहा है संकट का खतरा?
हालांकि, इस अच्छी खबर के साथ रिपोर्ट में एक गंभीर चेतावनी भी दी गई है. विशेषज्ञों का कहना है कि जेन जी की आर्थिक खुशहाली जल्द ही खतरे में पड़ सकती है. मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कीमतें बढ़ रही हैं और आर्थिक विकास की रफ्तार कमजोर हो रही है. इस दबाव की वजह से आने वाले समय में युवाओं की वास्तविक सैलरी में गिरावट आने की आशंका बढ़ गई है.
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