- बांग्लादेश के पांच औद्योगिक क्षेत्रों की 2134 गारमेंट फैक्ट्रियों में मजदूरों के हंगामे से कामकाज बाधित हुआ
- गाजीपुर और मयमनसिंह में 276 फैक्ट्रियों से 645360 मजदूर काम छोड़कर बाहर आ गए
- मजदूरों की मांग है कि न्यूनतम मासिक वेतन 30000 टका किया जाए और नौकरी से निकाले गए कर्मचारियों को वापस रखा जाए
बांग्लादेश में आज खूब बवाल हुआ. बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (BGMEA) की एक रिपोर्ट के अनुसार, आज ढाका, गाजीपुर, मयमनसिंह और सावर-अशुलिया में 529 गारमेंट फैक्ट्रियों में मजदूरों के हंगामे के कारण कामकाज बाधित हो गया, और 987,190 मजदूर अपने काम की जगहों से चले गए. गाजीपुर और मयमनसिंह सबसे ज्यादा प्रभावित हुए, जहां 276 फैक्ट्रियों से मजदूर बाहर निकल आए, जिससे 645,360 मजदूरों से जुड़े कामकाज बाधित हो गए. 1 नवंबर की BGMEA रिपोर्ट के अनुसार, इन दो क्षेत्रों में कुल 836 गारमेंट फैक्ट्रियां हैं.
सावर, अशुलिया और जिरानी में भी 185 फैक्ट्रियां प्रभावित हुईं, और 290,205 श्रमिकों ने काम छोड़ दिया. इन क्षेत्रों में कुल 441 गारमेंट फैक्ट्रियां हैं. ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस के अधिकार क्षेत्र में, मीरपुर की 68 फैक्ट्रियां प्रभावित हुईं, जहां से 51,625 कर्मचारी अपना काम छोड़कर चले गए. इस इलाके में कुल 320 गारमेंट फैक्ट्रियां हैं.हालांकि, नारायणगंज की 197 फैक्ट्रियों या चट्टोग्राम की 340 फैक्ट्रियों में इस तरह की कोई बाधा नहीं देखी गई. BGMEA की रिपोर्ट में पांच औद्योगिक क्षेत्रों की 2,134 गारमेंट फैक्ट्रियां शामिल हैं.
ये आंकड़े ऐसे समय में सामने आए हैं जब गारमेंट कर्मचारी बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं. उनकी मांग है कि न्यूनतम मासिक वेतन 30,000 टका किया जाए, ब्लैकलिस्ट करने की प्रथा बंद हो और नौकरी से निकाले गए कर्मचारियों को वापस काम पर रखा जाए. रेडीमेड गारमेंट श्रमिकों की 30,000 टका मासिक न्यूनतम वेतन की मांग को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों, सड़क जाम और पुलिस के साथ झड़पों के बाद, सरकार ने औद्योगिक क्षेत्रों में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अपने प्रयासों को तेज कर दिया है.
सरकार क्या कर रही
गारमेंट श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन तय करने हेतु एक नया वेतन बोर्ड गठित करने के साथ-साथ, प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने पूरी स्थिति की समीक्षा के लिए संबंधित मंत्रियों और सलाहकारों के साथ एक बैठक की. कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने तोड़फोड़, आगजनी और विध्वंसक गतिविधियों में शामिल होने के आरोपों में कई लोगों को गिरफ्तार भी किया है. रविवार शाम को सचिवालय के कैबिनेट डिवीजन कॉन्फ्रेंस रूम में तारिक रहमान की अध्यक्षता में बैठक हुई.
इस बैठक में गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद, श्रम एवं रोजगार मंत्री आरिफुल हक चौधरी, एलजीआरडी (LGRD) और सहकारी मामलों के राज्य मंत्री मीर शाहे आलम, प्रधानमंत्री के सलाहकार और पीएमओ (PMO) के प्रवक्ता मेहदी अमीन, तथा जातीयताबादी श्रमिक दल के मुख्य समन्वयक और परिवहन नेता शमसुर रहमान शिमुल बिस्वास शामिल हुए. श्रम मंत्री आरिफुल हक चौधरी ने विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों से अपील की कि वे सरकार के इस फैसले के बाद सड़कों से हट जाएं और अपने काम पर लौट आएं. मगर अब भी कई जगहों पर प्रदर्शन जारी है.
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