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ऑनलाइन चैट, ब्लैकमेलिंग और यौन शोषण... नाबालिगों को फंसाने वाले 29 साल के भारतीय पर पेरिस में ट्रायल शुरू

सोशल मीडिया के जरिए नाबालिग लड़कियों को बहलाने, ब्लैकमेल करने और शोषण के लिए मजबूर करने वाले कथित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क में भारतीय शख्स पर पेरिस की अदालत में सुनवाई शुरू हुई है.

ऑनलाइन चैट, ब्लैकमेलिंग और यौन शोषण... नाबालिगों को फंसाने वाले 29 साल के भारतीय पर पेरिस में ट्रायल शुरू
सांकेतिक तस्वीर
NDTV

फ्रांस के पेरिस में एक भारतीय शख्स पर सोमवार को नाबालिग लड़कियों के खिलाफ यौन शोषण का रैकेट चलाने के आरोप में बंद कमरे के भीतर ट्रायल चल रहा है. उस पर नियो-नाजी चाइल्ड एक्सप्लॉइटेशन रिंग चलाने का आरोप है.  सोशल मीडिया पर दोस्ती, फिर निजी तस्वीरें हासिल करना और उसके बाद उन्हीं तस्वीरों के जरिए नाबालिग लड़कियों को ब्लैकमेल करना, ये इस ग्रुप का तरीका है. जांचकर्ताओं के मुताबिक, एक ऑनलाइन ग्रुप कथित तौर पर इसी तरीके से लड़कियों बहला फुसला कर उनके साथ यौन शोषण करता था. 

आरोप है कि इसके बाद पीड़ितों को यौन हरकतें करने, खुद को नुकसान पहुंचाने और आत्महत्या की कोशिश तक के लिए मजबूर किया जाता था.

भारतीय शख्स चलाता था पूरा नेटवर्क

इस कथित नेटवर्क के मामले में 29 साल के भारतीय नागरिक रोहन राणे पर फ्रांस की राजधानी पेरिस में मुकदमा शुरू हो गया है. जांचकर्ताओं के मुताबिक, राणे इस ग्रुप का कथित नेता था. उस पर नाबालिगों के साथ यातना या बर्बरता, संगठित तरीके से जबरन वसूली और बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री फैलाने जैसे गंभीर आरोप हैं. दोषी पाए जाने पर उसे उम्रकैद तक की सजा हो सकती है.

कौन है रोहन राणे?

रोहन राणे भारतीय नागरिक है. वह पढ़ाई के लिए फ्रांस आया था और दक्षिण-पूर्वी शहर एंटिब्स के एक बिजनेस स्कूल में पढ़ाई की. बाद में उसने फिटनेस कोच के तौर पर काम किया.

राणे को 2021 में गिरफ्तार किया गया था. सोमवार को वह पेरिस की अदालत में सफेद टी-शर्ट पहने नजर आया. उसके खिलाफ चल रहा मुकदमा फिलहाल बंद कमरे में हो रहा है.

जांचकर्ताओं का आरोप है कि राणे इंटरनेट पर सक्रिय एक ऐसे ग्रुप का हिस्सा था, जो नस्लवादी और यहूदी-विरोधी विचारों के साथ-साथ नाबालिगों के यौन शोषण को बढ़ावा देता था.

Discord पर बनाया गया था पूरा नेटवर्क

अमेरिका, ब्रिटेन, नीदरलैंड्स और एस्टोनिया समेत कई देशों की नाबालिग लड़कियां इस कथित नेटवर्क की शिकार हुईं. जांच के मुताबिक, ग्रुप में जर्मनी, न्यूजीलैंड और अमेरिका के पुरुष शामिल थे, जो आपस में मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Discord पर बातचीत करते थे.

अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से जारी एक कोर्ट डॉक्यूमेंट के मुताबिक, इस ऑनलाइन ग्रुप को CVLT नाम से जाना जाता था. दस्तावेज में दावा किया गया कि ग्रुप के मूल सिद्धांतों में नियो-नाजी विचारधारा, निहिलिज्म और पीडोफिलिया शामिल थे.

जांचकर्ताओं के अनुसार, ग्रुप के सदस्य इंस्टाग्राम और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए उन नाबालिग लड़कियों को निशाना बनाता था कि जो इमोशनल तौर पर बहुत संवेदनशील थीं या उन्हें आसाना से बहलाया जाता सकता था.

पहले उनसे निजी तस्वीरें हासिल की जाती थीं. इसके बाद कथित तौर पर उन्हें धमकी दी जाती थी कि अगर उन्होंने उनकी बात नहीं मानी तो तस्वीरें सार्वजनिक कर दी जाएंगी.

कुछ मामलों में पीड़ितों को यह धमकी भी दी गई कि उनके घर पर फर्जी इमरजेंसी कॉल कर सुरक्षा बलों को भेज दिया जाएगा. इस तरह डर पैदा करके बच्चियों को काबू में रखने का आरोप है.

लड़कियों को 'गुलाम' कहते थे

जांच के मुताबिक, ग्रुप के सदस्य खुद को 'वॉरलॉर्ड्स' कहते थे और अपनी पीड़ितों को 'स्लेव्स' यानी गुलाम और 'हाउसवाइव्स' जैसे नाम देते थे. आरोप है कि पीड़ितों में कई यहूदी और अश्वेत लड़कियां थीं. उन्हें यौन गतिविधियों और खुद को नुकसान पहुंचाने वाली हरकतों के लिए मजबूर किया जाता था.

जांचकर्ताओं का कहना है कि कुछ मामलों में लड़कियों को अपने शरीर पर आरोपियों के नाम या नाजी स्वास्तिक का निशान बनाने के लिए भी मजबूर किया गया. ग्रुप पर पीड़ितों को आत्महत्या की कोशिश के लिए उकसाने के भी आरोप हैं. जांच में ऐसे मामलों का जिक्र है, जहां लड़कियों को ब्लीच पीने या बेल्ट से अपना गला घोंटने के लिए उकसाया गया.

2020 में सामने आया था पूरा मामला

इस मामले की जांच नवंबर 2020 में शुरू हुई. अमेरिका के नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लोइटेड चिल्ड्रेन ने ऐसे ऑनलाइन कंटेट के बारे रिपोर्ट किया था. 

यहीं से जांच आगे बढ़ी और कथित ऑनलाइन नेटवर्क की गतिविधियां सामने आने लगीं. मामले में अमेरिका की पांच लड़कियां सामने आईं, जिनकी उम्र 18 से 21 साल के बीच है. ये बतौर सिविल पार्टी शामिल हुई हैं. उन्हें इस सप्ताह वीडियो लिंक के जरिए अदालत में गवाही देने की उम्मीद है.

एक आरोपी को अमेरिका में सजा भी हो चुकी है

इस नेटवर्क से जुड़े एक 26 साल के अमेरिकी नागरिक को उसके देश में पहले ही सजा सुनाई जा चुकी है. उसे 2021 में एक 12 साल की बच्ची के अपहरण और बलात्कार के मामले में दोषी ठहराया गया था.

फ्रांस में चल रहे मुकदमे में अब अदालत यह देखेगी कि भारतीय शख्स राणे की कथित भूमिका क्या थी और उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष के पास क्या सबूत हैं.

ट्रायल बंद कमरे में क्यों हो रहा है?

पेरिस की आपराधिक अदालत ने सोमवार को मुकदमे की कार्यवाही बंद कमरे में करने का आदेश दिया. यह फैसला अमेरिकी अधिकारियों के अनुरोध के बाद लिया गया. अदालत ने कहा कि इस समूह पर पहले ही पीड़ितों और गवाहों को डराने-धमकाने के आरोप लग चुके हैं. अमेरिकी अभियोजकों को भी धमकी दिए जाने की बात सामने आई है.

इसके अलावा, मुकदमे के दौरान पीड़ितों के शोषण और कथित यातना से जुड़े वीडियो पेश किए जाने की उम्मीद है. अदालत के मुताबिक, इनमें कई पीड़ितों की उम्र 15 साल से भी कम थी.

पांच अमेरिकी पीड़ितों की ओर से पेश वकील हिप्पोलाइट मार्केट्टी ने बंद कमरे में सुनवाई का विरोध किया था. उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल चाहते हैं कि सोशल मीडिया पर किशोर लड़कियों के सामने मौजूद खतरों के बारे में ज्यादा से ज्यादा जागरूकता पैदा हो. मामले की सुनवाई शुक्रवार तक चलने की उम्मीद है. राणे पर लगे आरोप अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं.

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