- इजरायली एयर डिफेंस ने विमान को हाईजैक सिग्नल मिलने पर फाइटर जेट्स तैनात कर इमरजेंसी प्रतिक्रिया शुरू की
- विमान सऊदी अरब की सीमा के पास था और इजरायल के एयरस्पेस में सीधे संपर्क के बिना स्थिति जटिल बनी रही
- इजरायल ने एयरस्पेस खाली कर कई एयरपोर्ट्स को अलर्ट पर रखा ताकि विमान को सुरक्षित लैंड कराया जा सके
दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई फ्लाइट में कैप्टन स्मित मच्छार को जान से मारने की कोशिश में को-पायलट हमम-अल-हम्ममी गिरफ्तार हो चुका है. संयुक्त अरब अमीरात में उससे पूछताछ जारी है. उसने कई खुलासे भी किए हैं, मगर एक बात जो अब तक सामने नहीं आई, वो थी कि उस दिन ये सूचना इजरायल को कैसे पहुंची? फिर इजरायल ने क्या किया? इजरायल में कितना तनाव था?
NDTV के फॉरेन अफेयर्स और नेशनल सिक्योरिटी एडिटर आदित्य राज कौल के साथ एक खास इंटरव्यू में, इजरायली एयर डिफेंस के एक अधिकारी मेजर (रिजर्व) डी. ने कहा, "हमने प्लेन को तब देखा जब वह अपनी ऊंचाई पर आ गया था. इसके बाद टीम ने फ्लाइट की पहचान की और पता लगाया कि उसे तेल अवीव में लैंड करना था. कुछ मिनटों बाद हमें पता चला कि प्लेन हाईजैक का सिग्नल भेज रहा है. इसलिए उस समय हमने किसी भी स्थिति के लिए तैयार रहने के लिए फाइटर जेट्स को भेजने का फैसला किया." यह घटना एयर डिफेंस कर्मियों के सामने आने वाली उस चुनौती को दिखाती है जब इमरजेंसी सिग्नल से किसी गैर-कानूनी दखल का संकेत तो मिलता है, लेकिन उसके पीछे के हालात साफ नहीं होते.
अलग-अलग जानकारी, कई तरह की स्थितियां
मेजर डी. ने बताया कि जब उनकी टीम ने विमान को पहली बार देखा, तो वह सऊदी अरब के ऊपर जॉर्डन की सीमा के पास दक्षिण-पश्चिम दिशा में जा रहा था. तब तक विमान काफी नीचे आ चुका था; इजरायली टीम ने इसे अपनी आंखों (रियल टाइम) में नहीं देखा था, क्योंकि विमान अभी भी काफी दूर था. जैसे-जैसे जानकारी मिलती गई, टीम के लिए यह तय करना मुश्किल हो रहा था कि विमान का अपहरण हुआ है या पायलटों के बीच कोई झगड़ा चल रहा है.

आगे उन्होंने कहा, "इस घटना के दौरान हमें बहुत अनिश्चितता का सामना करना पड़ा. हमें यह साफ नहीं पता चल पा रहा था कि विमान का स्थानीय एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क हो रहा है या नहीं." उन्होंने आगे कहा कि कुछ जानकारी गलत निकली, जिससे स्थिति का आकलन करना और मुश्किल हो गया. विमान के इजरायल से दूर मुड़ने के फैसले ने अनिश्चितता को और बढ़ा दिया. टीम ने किसी एक बात पर भरोसा करने के बजाय अलग-अलग संभावनाओं के लिए तैयारी की. मेजर डी. ने कहा, "हमने स्थिति को स्पष्ट करने की कोशिश की. मैंने और मेरी टीम ने युद्ध के अभ्यास (वॉर गेम्स) की तरह ही कई तरह की स्थितियों के लिए तैयारी की."
एयरस्पेस खाली, एयरपोर्ट्स अलर्ट पर
अधिकारी ने बताया कि टीम ने इजरायल के एयरस्पेस को खाली रखने के लिए काम किया ताकि जरूरत पड़ने पर फाइटर जेट्स को तुरंत भेजा जा सके. अधिकारियों ने इस संभावना के लिए भी तैयारी की कि विमान इजरायल की ओर आ सकता है या वहां उतरने की कोशिश कर सकता है. उन्होंने NDTV को बताया, "हमने इजरायल के कई एयरपोर्ट्स से बात की ताकि यह पक्का किया जा सके कि वे विमान को उतारने के लिए तैयार रहें." हालांकि, उन्होंने उन सभी ऑपरेशनल स्थितियों पर बात करने से इनकार कर दिया, जिन पर विचार किया गया था.

मेजर डी. ने बताया कि इजरायल के एयरस्पेस की ओर आने वाले अनधिकृत विमानों से निपटने में बातचीत (कम्युनिकेशन) सबसे अहम है. कुछ विमान गलती से अपने रास्ते से भटक सकते हैं, जैसे तूफानी बादलों से बचने के लिए, और उन्हें तय प्रक्रियाओं के अनुसार एस्कॉर्ट किया जा सकता है. लेकिन फ्लाईदुबई की घटना में, इजरायली कंट्रोलर्स का विमान से सीधा संपर्क नहीं हो पाया. क्रू सऊदी एयर ट्रैफिक कंट्रोल से बात कर रहा था, लेकिन मेजर डी. ने कहा कि उनकी टीम का सऊदी समकक्षों से कोई सीधा संपर्क नहीं था. इसका मतलब था कि इजरायली अधिकारियों को विमान के अंदर क्या हो रहा है, इसकी पूरी जानकारी के बिना ही संभावित स्थितियों के लिए तैयारी करनी पड़ी.
प्लेन के रास्ता बदलने के बाद भी अलर्ट क्यों जारी रहा
प्लेन के सऊदी अरब की ओर जाने के बाद भी, इजरायली वायु सेना तब तक स्टैंडबाय पर रही जब तक कि टीम यह पक्का नहीं हुआ कि प्लेन सुरक्षित रूप से उतर गया है और इमरजेंसी कंट्रोल में है. मेजर डी. ने कहा कि इस स्थिति से निपटने की प्रक्रिया को खत्म होने में समय लगा क्योंकि अधिकारी यह मान लेने के बजाय कि खतरा टल गया है, असल नतीजे की पुष्टि करना चाहते थे. फ्लाइट में कथित तौर पर हुई बहस के बाद प्लेन आखिरकार सऊदी अरब के तबुक में उतरा. बाद की रिपोर्टों में इस घटना को को-पायलट और भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार के बीच कॉकपिट में हुई हिंसक हमले के तौर पर बताया गया. खबरों के अनुसार, प्लेन में मौजूद दो ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने कंट्रोल संभाला और प्लेन को सुरक्षित उतारने में मदद की. यह फर्क समझना जरूरी है: हाईजैकिंग के सिग्नल ने इजरायल की इमरजेंसी प्रतिक्रिया को शुरू किया, लेकिन खुद वह सिग्नल पक्की हाईजैकिंग का सबूत नहीं था.
“आप प्रोटोकॉल का पालन करते हैं”
जब उनसे पूछा गया कि हाइजैकिंग का सिग्नल मिलने पर उनके मन में क्या चल रहा था, तो मेजर डी. ने कहा कि उनकी प्रतिक्रिया तय प्रक्रिया के अनुसार थी. उन्होंने कहा, “जब हाइजैकिंग का सिग्नल मिलता है, तो आप प्रोटोकॉल के हिसाब से काम करते हैं.” उन्होंने उस पल के दबाव का जिक्र किया, लेकिन यह भी कहा कि टीमवर्क और तय प्रक्रियाओं की वजह से कर्मचारी अपना ध्यान बनाए रख पाए. वहां काफी दबाव होता है, लेकिन प्रोटोकॉल का पालन करने और एक टीम के तौर पर साथ काम करने से ही आप संयमित रह पाते हैं.
मेजर डी. ने बताया कि घटना के बाद ही उन्होंने इसके निजी असर के बारे में सोचा. उनके भाई अपने परिवार के साथ विदेश यात्रा पर थे, और उन्हें ख्याल आया कि कहीं वे भी उसी विमान में तो नहीं थे. यह किस्सा एयर डिफेंस ऑपरेशन के मानवीय पहलू की एक अनोखी झलक दिखाता है: फैसले तेजी से लेने पड़ते हैं, तब भी जब जिम्मेदार लोगों के पास अधूरी या विरोधाभासी जानकारी हो.

7 अक्टूबर के बाद की तैयारी
इस इंटरव्यू में इस बात पर भी चर्चा हुई कि 7 अक्टूबर, 2023 के हमलों के बाद से इजरायल की हवाई सुरक्षा व्यवस्था कैसे बदली है. मेजर डी. ने बताया कि इजरायली वायु सेना ने अपने कामकाज का आकलन किया है और इस दौरान अपनी तैयारियों को बेहतर बनाया है. उन्होंने मिसाइल और ड्रोन जैसे हवाई खतरों का पता लगाने और उनसे निपटने को वायु सेना की जिम्मेदारियों का हिस्सा बताया.
मेजर डी. ने यह भी कहा कि इस घटना की समीक्षा की जाएगी ताकि भविष्य में बेहतर तरीके से प्रतिक्रिया दी जा सके. उन्होंने कहा, "किसी भी स्थिति में, हम और बेहतर कर सकते हैं." फ्लाईदुबई की घटना दिखाती है कि जब किसी नागरिक विमान की हरकत से सुरक्षा संबंधी चिंताएं पैदा होती हैं, तो तेजी से खतरे का आकलन करना, तालमेल बिठाना और आपातकालीन योजना बनाना कितना जरूरी होता है. मेजर डी. ने ऑपरेशन से जुड़ी हर जानकारी तो नहीं दी, लेकिन उन्होंने बताया कि कैसे इजरायली हवाई सुरक्षा कर्मियों ने एक अनिश्चित स्थिति में प्रतिक्रिया दी, जबकि एक बहुत गंभीर आपातकालीन स्थिति की आशंका भी बनी हुई थी. उन्होंने कहा कि हवाई सुरक्षा टीम के लिए प्राथमिकता इस बात की तैयारी करना है कि आगे क्या हो सकता है—न कि हर सवाल का जवाब मिलने का इंतजार करना.
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