- अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने बोर्ड ऑफ पीस की घोषणा कर दी है, जो संघर्ष रोकने और शांति की दिशा में काम करेगा
- अजय बंगा ने एनडीटीवी से कहा कि बोर्ड ऑफ पीस गाजा और फिलिस्तीन की हालत सुधारने में मददगार होगा
- उन्होंने कहा कि ये यूएन का विकल्प नहीं है, बल्कि विभिन्न देशों के सहयोग से शांति स्थापित करने का प्रयास है
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बहुचर्चित 'बोर्ड ऑफ पीस' का ऐलान कर दिया है. ये कैसे काम करेगा, इसे लेकर फिलहाल ज्यादा स्पष्टता नहीं है. इस मुद्दे पर एनडीटीवी ने विश्व बैंक के प्रेसिडेंट अजय बंगा से खास बातचीत की. भारतीय मूल के अमेरिकी अजय बंगा इस बोर्ड ऑफ पीस के संस्थापक एग्जिक्यूटिव बोर्ड के सदस्यों में शामिल हैं.
गाजा की तकदीर बदलने का सुनहरा मौका
दावोस में वर्ल्ड इकनोमिक फोरम के सालाना सम्मेलन में शामिल होने आए अजय बंगा ने एनडीटीवी के सीईओ और एडिटर इन चीफ राहुल कंवल से बातचीत में कहा कि बोर्ड ऑफ पीस गाजा और फिलिस्तीन की हालत सुधारने के लिए वन्स इन ए लाइफटाइम अपॉर्चुनिटी है. गाजा हमेशा के इजरायल और फिलिस्तीन के बीच विवाद का विषय रहा है. वो इलाके वर्षों से डिस्टर्ब है. वहां के लाखों लोग इसकी मार झेल रहे हैं. अब हमारे पास वहां की स्थिति सुधारने का ऐतिहासिक मौका है.
पूरे इलाके का कायाकल्प हो सकता है
अजय बंगा ने कहा कि राजनीति से अलग हटकर सोचें तो अगर हमास को हथियार छोड़ने पर मजबूर कर दिया जाए तो उस इलाके की तकदीर बदल सकती है. वहां नए निर्माण हो सकते हैं, नए अवसर पैदा हो सकते हैं. वहां फिलिस्तीनियों को नई जिंदगी मिल सकती है. पूरे रीजन का कायाकल्प हो जाएगा.
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यूएन का विकल्प नहीं है पीस बोर्ड
अजय बंगा ने आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि बोर्ड ऑफ पीस संयुक्त राष्ट्र का विकल्प नहीं है. राष्ट्रपति ट्रंप ने भी कई बार कहा कि वो यूएन के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं. लेकिन उन्होंने ये भी कहा है कि यूएन में असीम संभावनाएं हैं और उसे अपेक्षाओं पर खरा उतरना होगा. बंगा ने कहा कि बोर्ड ऑफ पीस में हम सिर्फ अमेरिका के लिए काम नहीं कर रहे हैं, बल्कि इस मामले में हम यूरोप, मिडिल ईस्ट, सऊदी अरब, कतर, तुर्की के लोगों के साथ मिलकर ये तरीका ढूंढ रहे हैं कि किस तरह लोगों की मदद की जा सकती है.
2 साल पहले गाजा पर बनाई थी कमिटी
उन्होंने बताया कि दो साल पहले मैंने कई देशों के एक्सपर्ट्स को मिलाकर गाजा पर एक कमिटी बनाई थी और उसे इस संभावना पर काम करने को कहा था कि अगर गाजा में शांति कायम होती है तो विश्व बैंक को क्या करना होगा. उसने पुनर्निर्माण और इलाके को पटरी पर लाने के लिए कई सुझाव दिए थे. अगर उन सुझावों को अमल में लाया जाए तो हालात काफी बदल सकते हैं.
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स्मॉल एआई में बाजी मार सकता है भारत
विश्व बैंक के प्रमुख ने एआई के खतरों पर भी बात की. उन्होंने कहा कि भारत को प्रोडक्टिविटी बढ़ाने और छंटनी से बचने के लिए छोटे स्तर पर एआई को अपनाना चाहिए. उन्होंने आगाह किया कि ग्लोबल एआई सिस्टम पर पश्चिमी देशों का प्रभुत्व है और वो उभरती अर्थव्यवस्थाएं को साइडलाइन कर सकते हैं. उनका कहना था कि भारत में इन्फ्रास्ट्रक्चर संबंधी कई चुनौतियां हैं, खासकर पावर सेक्टर में, लेकिन वह ऐसे कुछ गैर पश्चिमी देशों में शुमार है, जिसके अंदर अपना खुद का एआई इकोसिस्टम तैयार करने की क्षमता है. उसे इसका फायदा उठाना चाहिए.
छंटनी से बचने में भी ये मददगार
अजय बंगा ने कहा कि एआई की वजह से व्हाइट कॉलर नौकरियों पर असर की आशंका जताई जा रही है, लेकिन अभी तक बड़े पैमाने पर छंटनी नहीं हुई है. इसके उलट भारत जैसे देश छोटे एआई के मामले में बाजी मार सकते हैं. ये उनकी उत्पादकता बढ़ा सकता है और नौकरी जाने का खतरा भी नहीं रहेगा.
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