- यूरोपियन यूनियन और तालिबान के बीच एक अहम बैठक होने जा रही है
- बातचीत उन अफगान शरणार्थियों को वापस अफगानिस्तान भेजने पर होगी, जिनको शरण देने की अर्जी खारिज हो चुकी है
- तालिबान अधिकारियों को बैठक में बुलाने के लिए एक दिन का वीजा दिया गया है
अफगानिस्तान पर राज करने वाले जिस तालिबान को यूरोपीय देश मान्यता नहीं देते, उन्हें मीटिंग के लिए इन देशों ने बुलाया है. यूरोपियन यूनियन और तालिबान के बीच एक अहम बैठक होने जा रही है. इसके लिए तालिबान के अधिकारी मंगलवार को बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स पहुंचने वाले हैं. यह बातचीत उन अफगान शरणार्थियों को वापस अफगानिस्तान भेजने के मुद्दे पर होगी, जिनको शरण देने की अर्जी खारिज हो चुकी है. लेकिन इस कदम ने मानवाधिकार संगठनों को नाराज कर दिया है, क्योंकि EU अब तक तालिबान सरकार को आधिकारिक मान्यता नहीं देता. कमाल की बात है कि तालिबान को बैठक में बुलाने के लिए एक दिन का वीजा दिया गया है.
AFP की रिपोर्ट के अनुसार बेल्जियम के विदेश मंत्री की एक प्रवक्ता ने बताया कि यूरोपीय संस्थानों की मेजबानी करने वाले देश के रूप में बेल्जियम ने पांच वीजा रिक्वेस्ट को सोमवार दोपहर सुरक्षा जांच के बाद मंजूरी दे दी. यानी तालिबान के 5 अधिकारी इस बैठक के लिए आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि ये वीजा केवल बेल्जियम के लिए मान्य हैं. साथ ही ये सिर्फ एक दिन के लिए वैध हैं.
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क्यों उठ रहे सवाल?
ब्रुसेल्स और EU देशों का कहना है कि तालिबान अधिकारियों की मेजबानी करने का मतलब यह नहीं है कि वे काबुल की सरकार को मान्यता दे रहे हैं. लेकिन आलोचकों और बड़े मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि ऐसा करना EU के मूल्यों के खिलाफ होगा. ह्यूमन राइट्स वॉच की फरेश्ता अब्बासी ने कहा, "यूरोपियन यूनियन के देश एक तरफ तालिबान के मानवाधिकार उल्लंघनों की आलोचना करते हैं और जवाबदेही की बात करते हैं, जबकि दूसरी तरफ अफगानों को जबरन वापस भेजने के लिए तालिबान के साथ सहयोग कर रहे हैं. इससे उनकी विश्वसनीयता कमजोर हो रही है."
बता दें कि 2021 में जब तालिबान फिर से सत्ता में आया तब यूरोपीय देशों ने काबुल में अपने दूतावास बंद कर दिए थे. तालिबान शासन में महिलाओं को घर से बाहर निकलते समय लगभग पूरी तरह ढककर रहना पड़ता है. उन्हें पार्क, जिम और कई सार्वजनिक स्थानों पर जाने की अनुमति नहीं है. लड़कियों की पढ़ाई भी 12 साल की उम्र के बाद रुक जाती है.
हालांकि इस महीने EU के इमिग्रेशन प्रमुख मैग्नस ब्रूनर ने तालिबान से बातचीत का बचाव किया है. उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान से अवैध प्रवासियों को वापस भेजने के मुद्दे पर ब्रुसेल्स के पास तालिबान सरकार से बात करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है. EU के आंकड़ों के अनुसार, 2013 से 2024 के बीच अफगानों ने लगभग 10 लाख शरण आवेदन दिए थे. इनमें से करीब आधे आवेदनों को मंजूरी मिली.
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