- एपस्टीन की मौत 2019 में न्यूयॉर्क जेल में हुई, वह नाबालिग लड़कियों की तस्करी के आरोपों में अंडर ट्रायल था
- एपस्टीन ने न्यू मैक्सिको के रैंच में महिलाओं को प्रेग्नेंट कराकर एक ‘सुपर रेस’ बनाने की योजना बनाई थी
- एपस्टीन की सोच ट्रांसह्यूमनिज्म से जुड़ी थी, जिसमें तकनीक और जेनेटिक बदलाव इंसान में किए जाते हैं
जेफ्री एपस्टीन की मौत 2019 में न्यूयॉर्क की जेल में हुई थी. वह नाबालिग लड़कियों की तस्करी के आरोपों में ट्रायल का इंतजार कर रहा था. लेकिन मौत से पहले उस पर एक बेहद डराने वाली योजना बनाने के आरोप लगे. कहा जाता है कि एपस्टीन अपनी दौलत, जमीन और बड़े लोगों से अपने रिश्तों का इस्तेमाल करके अपना डीएनए फैलाना चाहता था, ताकि इंसानों की एक ‘सुपर रेस' बनाई जा सके.
कई सालों तक एपस्टीन ने वैज्ञानिकों और कुछ खास लोगों से कहा कि वह न्यू मैक्सिको के अपने बड़े रैंच (फार्महाउस) में महिलाओं को प्रेग्नेंट कराना चाहता है. इस योजना को कुछ लोगों ने आपस में ‘बेबी रैंच' कहा. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एपस्टीन चाहता था कि वहां महिलाएं उसके स्पर्म से गर्भवती हों और उसके बच्चे पैदा करें. इस बात का कोई सबूत नहीं है कि यह योजना कभी पूरी हुई. यह भी साफ नहीं है कि यह गैरकानूनी होती या नहीं.
एपस्टीन ट्रांसह्यूमनिज्म जैसी खतरनाक सोच पर करना चाहता था काम
एपस्टीन की यह सोच ट्रांसह्यूमनिज्म से जुड़ी बताई जाती है. यह एक ऐसा विचार है जिसमें टेक्नोलॉजी, जेनेटिक बदलाव और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए इंसानों की ताकत बढ़ाने की बात होती है. आलोचकों का कहना है कि इस तरह की सोच यूजीनिक्स जैसी है, जिसमें चुनिंदा लोगों के जरिए इंसानी नस्ल को ‘बेहतर' बनाने की बात की जाती थी. इसी सोच का इस्तेमाल बाद में नाजियों ने भी किया था.
एपस्टीन ने 14 साल तक की लड़कियों की तस्करी के आरोपों को गलत बताया था. जांच और मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया कि उसने अपनी कमाई, क्लाइंट्स और बिजनेस-साइंस में अपनी भूमिका को कई बार बढ़ा-चढ़ाकर बताया. इसके बावजूद, पैसा और लगातार कोशिशों के दम पर वह राजनीति, फाइनेंस और पढ़े-लिखे लोगों की दुनिया में अपनी जगह बनाने में कामयाब रहा.
साइंस की बड़ी हस्तियों से थी नजदीकियां
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, एपस्टीन ने यही तरीका साइंस की दुनिया में भी अपनाया. उसने कई बड़े वैज्ञानिकों से दोस्ती की. इनमें नोबेल प्राइज जीत चुके वैज्ञानिक और मशहूर प्रोफेसर शामिल थे. एपस्टीन ने रिसर्च के लिए पैसा दिया, कॉन्फ्रेंस कराईं और महंगे खाने-पीने के साथ बैठकों का खर्च उठाया. कुछ वैज्ञानिकों ने बाद में माना कि फंडिंग की उम्मीद ने उन्हें एपस्टीन के आपराधिक इतिहास को नजरअंदाज करने पर मजबूर कर दिया.
उसने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में एक प्रोग्राम के लिए लाखों डॉलर का दान दिया. उसकी स्पॉन्सर की गई कॉन्फ्रेंस यूएस वर्जिन आइलैंड्स में हुईं, जहां मेहमानों को उसके प्राइवेट आइलैंड पर ले जाया गया. एक मौके पर कुछ वैज्ञानिक एपस्टीन के किराए के सबमरीन में भी बैठे.
‘बेबी रैंच' का क्या था आइडिया
2000 के शुरुआती सालों में एपस्टीन ने वैज्ञानिकों और बिजनेस से जुड़े लोगों से कहा कि वह सांता फे के पास अपने बड़े रैंच को इस योजना का केंद्र बनाना चाहता है. कई लोगों ने अलग-अलग मौकों पर यह बात सुनी और इसे परेशान करने वाला और हकीकत से दूर बताया.
एक महिला, जिसने खुद को नासा की वैज्ञानिक बताया, ने कहा कि एपस्टीन एक समय में करीब 20 महिलाओं को वहां प्रेग्नेंट करना चाहता था. बताया जाता है कि उसे एक पुराने स्पर्म बैंक से प्रेरणा मिली थी, जहां नोबेल विजेताओं से स्पर्म लेने की कोशिश की गई थी. हालांकि उस स्पर्म बैंक से सिर्फ एक ही नोबेल विजेता ने योगदान दिया था.
एपस्टीन अपने शरीर को सुरक्षित रखने की बात भी करता था. एक जानकार के मुताबिक, वह मरने के बाद शरीर को फ्रीज करने जैसी तकनीक में भी दिलचस्पी रखता था. उसने यहां तक कहा था कि वह अपने सिर और प्राइवेट पार्ट को सुरक्षित रखना चाहता है.
क्या एपस्टीन के बच्चे थे?
यह साफ नहीं है कि एपस्टीन के बच्चे थे या नहीं. अमेरिकी न्याय विभाग की फाइलों में ऐसे संकेत मिले हैं कि शायद उसके बच्चे हो सकते हैं. एक महिला की डायरी में लिखा है कि उसने 2002 के आसपास एक बच्ची को जन्म दिया था, जब वह 16 या 17 साल की थी. उसका आरोप है कि जन्म के कुछ ही मिनटों बाद बच्ची को उससे अलग कर दिया गया. इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है. एपस्टीन की वसीयत में किसी बच्चे का जिक्र नहीं है. उसकी आखिरी गर्लफ्रेंड को उसकी प्रॉपर्टी और बड़ी रकम देने की बात सामने आई थी. एक पुराने वीडियो में उसके घर की टेबल पर डीएनए टेस्ट किट भी दिखी है. वहीं 2011 के एक ईमेल में एक जानी-मानी शख्सियत ने उसे बच्चे के जन्म पर बधाई दी थी, हालांकि बाद में इस पर कोई और जानकारी सामने नहीं आई.
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