- एलन मस्क ने दावा किया कि कुछ ताकतवर लोग भारत में स्टारलिंक सेवा को रोक रहे हैं, जिससे उनका एकाधिकार बना रहे
- एलन मस्क ने एक दूसरे पोस्ट में NDTV के दो साल पुराने आर्टिकल का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया है
- NDTV ने फोरेंसिक जांच के आधार पर बताया कि मणिपुर में मिले स्टारलिंक डिवाइस काम नहीं कर रहे थे
एलन मस्क अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सुपर एक्टिव रहते हैं. 7 और 8 अक्टूबर की दरम्यानी रात उन्होंने एक के बाद एक कई पोस्ट किए और एक बड़ा आरोप लगाया. दुनिया के सबसे अमीर शख्स का आरोप था कि देश में अपना 'एकाधिकार' बनाए रखने के लिए 'कुछ खास उद्योगपति' भारत में स्टारलिंक की सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विस को रोक रहे हैं. भारत सरकार की ओर से इसका जवाब भी दिया गया है और साफ कहा गया है कि भारत में सभी टेलीकम्युनिकेशन सर्विस के लिए एक निष्पक्ष और बिना भेदभाव वाला ऑथराइजेशन फ्रेमवर्क है. यानी किसी को मंजूरी देते समय भेदभाव नहीं किया जाता है. इन्हीं पोस्ट्स के बीच एलन मस्क ने 2024 का NDTV का एक आर्टिकल भी शेयर किया है, जिसमें यह बताया गया है कि मणिपुर में मिला स्टारलिंक डिवाइस काम नहीं कर रहा था और वह कम्पैटिबल भी नहीं था.
एलन मस्क ने क्या पोस्ट किया?
दरअसल SpaceX के मालिक ने NDTV के फैक्ट चेक वाले आर्टिकल के जरिए उन दावों को खारिज कर किया जिसमें कहा गया था कि भारत में विद्रोही समूहों ने स्टारलिंक की सर्विस का इस्तेमाल किया. स्टारलिंक एलन मस्क की अमेरिकी अंतरिक्ष कंपनी SpaceX की सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट सर्विस देने की परियोजना है. एलन मस्क ने NDTV के आर्टिकल का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए X पर लिखा, "भारत के ऊपर Starlink की बीम बंद हैं, इसलिए यह दावा पूरी तरह गलत है कि किसी ने भी किसी भी वजह से इनका इस्तेमाल किया."

एलन मस्क का X पोस्ट जिसमें NDTV के आर्टिकल का इस्तमाल किया गया था (फोटो- स्क्रीनशॉट)
NDTV के आर्टिकल में क्या लिखा था?
NDTV के आर्टिकल की हेडलाइन थी- Starlink Device Found In Manipur Not Working, Incompatible: Forensics यानी फोरेंसिक जांच में पता चला कि मणिपुर में मिला स्टारलिंक डिवाइस काम नहीं कर रहा, यह कम्पैटिबल नहीं है. 18 दिसंबर 2024 को छपी इस फैक्ट चेक वाली खबर में NDTV ने बताया था कि केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के सूत्रों ने अपनी जांच के आधार पर बताया है कि मणिपुर में सुरक्षा बलों ने विद्रोहियों से जो स्टारलिंक डिश और राउटर बरामद किए हैं, वे म्यांमार से सटे इस राज्य में काम नहीं करते और यहां के लिए कम्पैटिबल नहीं हैं. दरअसल उस समय म्यांमार से सटे मणिपुर के इलाके में स्टारलिंक के डिवाइस मिले थे और तमाम तरह की अटकलें लगी थीं.
तब नाम न बताने की शर्त पर एक सीनियर अधिकारी ने NDTV को बताया, "डिवाइस पर स्टारलिंक के स्पष्ट निशान थे, लेकिन जब हमने उनकी जांच करवाई, तो पता चला कि वे इस इलाके में इस्तेमाल के लायक नहीं हैं."
बता दें कि स्टारलिंक भारत में उपलब्ध नहीं है. इस अमेरिकी कंपनी ने रेगुलेटरी मंजूरी के लिए आवेदन किया है. अब नए पोस्ट में एलन मस्क ने दावा किया है कि कुछ ताकतवर लोग अपना एकाधिकार बनाए रखने के लिए भारत में स्टारलिंक की सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विस को रोक रहे हैं. इसके जवाब में भारत सरकार की तरफ से कहा गया है कि किसी को मंजूरी देते समय भेदभाव नहीं किया जाता है. भारत सरकार के संचार मंत्रालय ने कहा कि लाइसेंस की शर्तों के तहत, हर लाइसेंस होल्डर को सुरक्षा शर्तों का पालन करना जरूरी है.
भारत सरकार के पूरे जवाब को विस्तार में पढ़ने और समझने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें.
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