- RSS के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने SIR को सही और जरूरी बताया
- होसबाले ने कहा कि वोटर लिस्ट से मृतक और गैर नागरिकों के नाम हटाने का उद्देश्य इसे त्रुटिहीन बनाना है
- उन्होंने राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि किसी मुद्दे पर केवल विरोध करने के बजाय उसकी सच्चाई पर ध्यान दें
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्ट में किए SIR को सही ठहराया. उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया का मकसद इन वोटर लिस्ट को त्रुटिहीन बनाना है. उन्होंने एसआईआर के सियासी विरोध पर हैरानी जताई और कहा कि राजनीतिक दलों को किसी मुद्दे पर केवल विरोध के लिए विरोध करने के बजाय उसकी सच्चाई पर ध्यान देना चाहिए.
होसबाले ने यह बात ऐसे वक्त कही, जब कथित चुनावी अनियमितताओं और लोकतांत्रिक संस्थाओं के कामकाज को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक टकराव जारी है. वह इंदौर में संघ के प्रमुख संगठनात्मक निकाय अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की वार्षिक बैठक खत्म होने के बाद मीडिया को संबोधित कर रहे थे.
विपक्ष के विरोध पर क्या बोले?
होसबाले ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक दल अपने-अपने एजेंडा के मुताबिक काम कर सकते हैं, लेकिन उन्हें किसी मुद्दे पर केवल विरोध के नाम पर विरोध करने के बजाय देखना चाहिए कि उस मुद्दे में कुछ सच्चाई है भी या नहीं. उन्होंने कहा कि एसआईआर का मकसद वोटर लिस्ट का परिष्कार करना होता है.
होसबाले ने कहा कि देश में जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, उनमें से कई लोगों की पहले ही मौत हो चुकी है, जबकि कई मतदाताओं के नाम दो जगहों पर दर्ज हैं. उन्होंने कहा कि जो लोग भारत के नागरिक नहीं हैं, उनके नाम वोटर लिस्ट में दर्ज होना आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा की दृष्टि से गलत है.
'इस मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए'
संघ के सीनियर नेता ने कहा कि एसआईआर के तहत वोटर लिस्ट को त्रुटिहीन बनाने की प्रक्रिया देश में नियमित तौर पर होती आई है और यह बात उनकी समझ से परे है कि इस पर राजनीति क्यों होनी चाहिए.
होसबाले ने एक सवाल पर यह भी कहा कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में रिजीम चेंज चुनावों के जरिये होता है, लेकिन सत्ता परिवर्तन के मकसद की आड़ में अशांति और हिंसा फैलाना या भेदभाव पैदा करना समाज के हित में नहीं है.
उन्होंने पिछले दिनों दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए ‘जेन-जी' आंदोलन से जुड़े सवाल पर कहा कि देश के अंदर और बाहर की कुछ ‘अराजक शक्तियां' युवाओं को साजिश के तहत भड़काने का प्रयत्न कर रही हैं. होसबाले ने कहा,‘लेकिन युवाओं के मन में जो आकांक्षाएं और बातें हैं, उनके बारे में किसी भी समाज और शासन को ध्यान देना चाहिए. संघ युवाओं के साथ संवाद किए जाने का आग्रह करता है.'
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