- बोलिविया के राष्ट्रपति अल नीनो के कारण सूखे और बाढ़ की स्थिति से निपटने राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया है
- अर्जेंटीना में अल नीनो की वजह से आई बाढ़ ने कई इलाकों को प्रभावित कर दो लोगों की मौत हो गई
- पेरू में अल नीनो की गर्म हवा और सूखे के कारण लगी जंगलों की आग से कम से कम बारह लोगों की जान गई है
बोलिविया के राष्ट्रपति रोड्रिगो पाज़ ने 'अल नीनो' के प्रभावों से निपटने के लिए एक आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत देश में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की गई है. पाज़ ने कहा कि उन्होंने यह आदेश देश के कई हिस्सों में पड़ रहे सूखे से निपटने और आने वाले महीनों में संभावित बाढ़ की स्थिति के लिए तैयारी करने के उद्देश्य से जारी किया है.
शिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ने बताया कि इस कदम का मकसद वित्तीय और मानवीय संसाधनों को जुटाना, सरकारी एजेंसियों के बीच तालमेल को मजबूत करना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग प्राप्त करना है. इसका उद्देश्य प्रभावित परिवारों की मदद करना और जलवायु संबंधी आपदाओं के असर को कम करना है, ताकि लोगों के जीवन और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ने वाले प्रभाव को सीमित किया जा सके. अल नीनो का खौफ केवल बोलिविया तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के कई देश इसकी चपेट में हैं.
अर्जेंटीना में बाढ़
अर्जेंटीना के उत्तर-पूर्वी पर्यटन शहर 'पासो डे ला पैट्रिया' के निवासी जुआन पाब्लो गोमेज़ ने एएफपी (AFP) को बताया, "देखते ही देखते, मेरे घर में एक मीटर पानी भर गया." 'अल नीनो' के कारण आई इस बाढ़ से पिछले कुछ दिनों में दो लोगों की जान चली गई है। शहर के कुछ हिस्सों में तो घरों की केवल छतें ही पानी के ऊपर दिखाई दे रही हैं. पिछले हफ्ते, देश के उत्तर-पूर्वी हिस्से में भारी बारिश के कारण 2,000 से ज़्यादा लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा. इस बारिश की वजह से पराना, उरुग्वे और इगुआज़ू नदियों का जलस्तर बढ़ गया था. ये नदियां अर्जेंटीना, ब्राज़ील, पैराग्वे और उरुग्वे की सीमाओं से होकर गुजरती हैं.
पेरू में जानलेवा आग
पेरू में लगी जानलेवा आग के बारे में बताते हुए, लीमा की 'साइंटिफिक यूनिवर्सिटी ऑफ द साउथ' के प्रोफेसर और जीवविज्ञानी डैनियल वैले ने AFP को बताया, "अल नीनो के कारण पूरे पेरू में गर्म और सूखी हवाओं का एक बड़ा घेरा बन गया है." वैले ने कहा कि मौसम की इस घटना की वजह से तापमान बहुत बढ़ गया है और हालात काफी सूखे हो गए हैं, जिससे आग तेजी से फैल रही है. अधिकारियों ने पिछले हफ्ते बताया कि जून से अब तक जंगलों में लगी आग में कम से कम 12 लोगों की मौत हो चुकी है, और सैकड़ों लोग इस आपदा से प्रभावित हुए हैं.
फ्रेंच गुयाना में सूखा
फ्रेंच गुयाना में कई महीनों से बारिश की भारी कमी देखी जा रही है. इस फ्रांसीसी विदेशी क्षेत्र के जलमार्गों में जलस्तर काफी गिर जाने के कारण, नदियों में होने वाला आवागमन धीरे-धीरे पूरी तरह रुक गया है. अधिकारियों ने उन अलग-थलग पड़े इलाकों के लगभग 40,000 निवासियों तक जरूरी सामान पहुँचाने के लिए एक 'एयर ब्रिज' (हवाई संपर्क व्यवस्था) बनाई है, जहाँ सड़क मार्ग से नहीं पहुंचा जा सकता. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि लोगों तक उचित कीमतों पर जरूरी सामान पहुंचता रहे, सार्वजनिक शिक्षा सेवाएं जारी रहें, और तटीय इलाकों सहित हर जगह पीने के पानी की आपूर्ति करने वाली प्रणालियां ठीक से काम करती रहें.
भारत का हाल भी जानिए
भारत के वित्त मंत्रालय की अक्टूबर 2026 की मासिक आर्थिक समीक्षा के अनुसार, भारत में महंगाई के मोर्चे पर अभी भी कई जोखिम बने हुए हैं. इनमें कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, समुद्री माल ढुलाई मार्गों में रुकावटें और 'अल नीनो' के कारण कृषि क्षेत्र में संभावित व्यवधान शामिल हैं. हालांकि, सरकार को उम्मीद है कि आपूर्ति पक्ष में किए जाने वाले उपायों से खाद्य पदार्थों की कीमतों में नरमी आएगी।रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अल नीनो की बढ़ती तीव्रता आगामी रबी बुवाई के मौसम में मिट्टी की नमी के लिए खतरा पैदा कर सकती है, जबकि त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है.
ताइवान-चीन-जापान भी चपेटे में
अल नीनो के कारण बना चाम्पी तूफान हाल ही में ताइवान में काफी बर्बादी कर गया. इसके बाद ये चीन और जापान की ओर बढ़ा, मगर वहां ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा सका और पहले ही कमजोर हो गया.'चाम्पी' प्रशांत महासागर में चल रहे तूफानी मौसम का सबसे ताज़ा उदाहरण है. 'अल नीनो' मौसमी घटना ने इस तूफानी सीजन को और भी तेज कर दिया है, जिसकी वजह से भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में अभूतपूर्व गर्मी पैदा हो गई.
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