डरबन:
कई दिनों तक चर्चा करने के बाद संयुक्त राष्ट्र जलवायु वार्ता में रविवार को एक ऐतिहासिक समझौता हुआ, जिसके तहत यूरोपीय संघ कानूनी रूप से बाध्यकारी क्योटो प्रोटोकाल के तहत अपना मौजूदा उत्सर्जन कटौती संबंधी वादा पेश करेगा और सभी प्रमुख उत्सर्जक ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ कदम उठाने के लिए बाध्य होंगे। इस सम्मेलन में भारत और यूरोपीय संघ प्रस्ताविक खाका पर आमने-सामने दिखे। इस महत्वपूर्ण बैठक में निर्धारित समय से करीब 36 घंटे अधिक चर्चा हुई और कई प्रतिनिधियों ने मेजबान सरकार की रणनीति पर सवाल खड़े किए। इस सम्मेलन में 194 देश शामिल हुए। सम्मेलन में हुए समझौते के तहत देश नए करार के लिए बातचीत करने पर सहमत हुए। नए करार के तहत सभी देश एक ही कानूनी व्यवस्था में आएंगे। नया करार 2020 में अस्तित्व में आएगा। समझौते को संतुलित बताया जा रहा है। 'बीबीसी' की खबर के अनुसार जब मुख्य सम्मेलन कक्ष में दक्षिण अफ्रीकी अंतरराष्ट्रीय संबंध मंत्री माइते एनकोना मसाबाने ने प्रस्ताव पेश किया, तो उनकी वाहवाही हुई। नए कानूनी करार में सभी देश शामिल होंगे और इसके लिए चर्चा अगले साल शुरू होगी और 2015 तक चलेगी। यह 2020 में प्रभावी होगा।
पूरी स्टोरी पढ़ें
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं
जलवायु सम्मेलन, डरबन सम्मलेन, क्योटो प्रोटोकाल