- दुबई का एक राजकुमार बनकर ऑनलाइन एक महिला मारिया को रोमांस स्कैम का शिकार बनाया गया था
- स्कैमर ने मारिया से झूठे मैरिज सर्टिफिकेट और रॉयल मेंबरशिप कार्ड के लिए भारी रकम मांगी थी
- राजकुमार के नाम से चलने वाले स्कैम में सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स का दुरुपयोग हो रहा है
मारिया को लगा कि वह दुबई के एक राजकुमार के साथ रोमांस कर रही है. वह उसकी दिलकश मुस्कान और लाइव वीडियो कॉल के दौरान जताए गए प्यार से प्रभावित थी. लेकिन उसे क्या पता था कि उसका चाहने वाला असल में एक AI डीपफेक है. मारिया ऑनलाइन रोमांस स्कैम का शिकार बन गई. मारिया की मुलाकात स्कैमर से एक डेटिंग साइट पर हुई थी. स्कैमर खुद को प्रिंस हमदान बिन मोहम्मद (जिन्हें उनके पेन नेम 'फज्जा' से भी जाना जाता है) बता रहा था. बाद में बातचीत एक मैसेजिंग ऐप पर चली गई और वहां उसने मारिया को खूब रोमांटिक मैसेज भेजे.
कैसे फंस गई मारिया
फिलीपीनी घरेलू कामगार इस लड़की ने एएफपी को अपना असली नाम और उम्र गुप्त रखने का अनुरोध रखते हुए बताया, "वह मुझे सोते समय भी मैसेज करता रहता था. ऐसा लगा जैसे किसी प्रेम मंत्र ने हमारे मन को जोड़ दिया हो." मारिया ने बताया कि शुरू में वो प्यार में इतनी डूबी हुई थी कि उसे धोखाधड़ी का शक ही नहीं हुआ. वो अपनी एक साल की बचत गंवा बैठी. स्कैमर ने उसे झांसा देकर 1,00,000 पेसो ($1,625) का भुगतान करवाया. स्कैमर ने मारिया से कहा कि ये पैसे मैरिज सर्टिफिकेट और "रॉयल मेंबरशिप कार्ड" के लिए हैं, जिनसे उसे दुबई में नौकरी पाने में मदद मिलेगी. मारिया को शक तब हुआ जब स्कैमर ने एक होटल में मिलने का प्रस्ताव रखा और बुकिंग के लिए 60,000 पेसो ($974) और मांगे. जब उसने उसके फेसबुक पेज की जांच की (जिसे बाद में हटा दिया गया था), तो उसने देखा कि वह अकाउंट नाइजीरिया का था.

फ्लाइंग किस वाले इमोजी
यह धोखाधड़ी उस बड़े सिस्टम का हिस्सा है जिसे "फेक दुबई प्रिंस" स्कैम के तौर पर जाना जाता है, जो लोगों के दिलों और जेबों, दोनों को निशाना बनाते हैं. स्कैमर्स अमीराती राजकुमार की ऑनलाइन मौजूदगी का फायदा उठाते हैं—जैसे कि उनके 17 मिलियन से ज्यादा इंस्टाग्राम फॉलोअर्स—और कभी-कभी तो लोगों को धोखा देने के लिए राजकुमार की असली कविताएं तक कॉपी कर लेते हैं. यूजर्स को "प्रिंस" के साथ WhatsApp या Telegram चैट के लिए इनवाइट किया जा रहा है.
हालांकि कुछ यूजर्स ने कमेंट्स में चेतावनी दी कि ये पोस्ट स्कैम हैं, लेकिन कई अन्य लोगों ने हार्ट और फ्लाइंग-किस वाले इमोजी के साथ जवाब दिया. जैसे-जैसे यह धोखाधड़ी फैल रही है, यूजर्स को सावधान करने के लिए अवेयरनेस ग्रुप्स भी बन गए हैं, जिनमें Instagram पर "Do not fall for fake prince" (नकली प्रिंस के झांसे में न आएं) नाम का ग्रुप भी शामिल है.
राजकुमार तक पहुंच चुकी है बात
'Stop Fazza Scam' नाम की एक change.org याचिका में शेख हमदान के स्टाफ से कहा गया है कि वे उन स्कैमर्स के बारे में जागरूकता फैलाएं जो दुबई के फोन नंबरों का इस्तेमाल करके शाही परिवार के सदस्य होने का नाटक करते हैं और "डोनेशन या मैरिज सर्टिफिकेट के नाम पर बड़ी रकम मांगते हैं - जो सभी फर्जी होते हैं." याचिका में कहा गया है, "पीड़ितों के देशों के अलावा दूसरे देशों के बैंकों में बड़ी रकम की मांग की जाती है, कभी-कभी तो क्रिप्टो करेंसी में भी, जिससे इनका पता लगाना मुश्किल हो जाता है." यह मामला दिखाता है कि कैसे धोखेबाज दुबई के असली क्राउन प्रिंस बनकर लोगों को ऑनलाइन रिश्ते बनाने के जाल में फंसाते हैं और फिर उनसे पैसे ठग लेते हैं. रिसर्चर्स ने इनमें से कुछ स्कैम का कनेक्शन नाइजीरिया के क्राइम सिंडिकेट से जोड़ा है.

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दुबई के अधिकारियों ने क्या कहा
दुबई के अधिकारियों ने AFP के कमेंट के अनुरोध का कोई जवाब नहीं दिया. राजकुमार अकेले ऐसे मशहूर व्यक्ति नहीं हैं जिनकी पहचान का इस्तेमाल स्कैमर्स ने किया है. पिछले साल, फ्रांसीसी अधिकारियों ने ब्रैड पिट बनकर धोखाधड़ी करने वालों का पता लगाने के लिए जांच शुरू की थी; इन लोगों ने एक महिला से 830,000 यूरो ($945,000) ठगे थे.
ग्लोबल एंटी-स्कैम एलायंस का अनुमान है कि पिछले साल दुनिया भर के लोगों को स्कैम (धोखाधड़ी) की वजह से 442 अरब डॉलर का नुकसान हुआ, जिसमें रोमांस फ्रॉड भी शामिल है. यह साफ नहीं था कि मारिया के साथ रियल-टाइम वीडियो चैट बनाने के लिए किन AI टूल का इस्तेमाल किया गया था. इंटरनेट पर AI-पावर्ड फेस-स्वैपिंग टेक्नोलॉजी और मोशन-कंट्रोल टूल की नई पीढ़ी मौजूद है, जो बहुत असली लगने वाले वीडियो बना सकती है. इनकी मदद से यूजर किसी व्यक्ति की हरकतों और चेहरे के हाव-भाव को रियल-टाइम में ठीक-ठीक बदल सकते हैं.
कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के डेविड रैंड ने AFP को बताया, "टेक्नोलॉजी तेजी से बेहतर हो रही है और संभावना है कि जल्द ही रियल-टाइम वीडियो डीपफेक और भी बेहतर हो जाएंगे. एक बार ऐसा होने पर, यह पता लगाना लगभग नामुमकिन हो जाएगा कि आमने-सामने न होने वाली कोई बातचीत असली है या नहीं."
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