- वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर के फंड से खरीदी गई जमीन की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग
- संपत्तियों की कीमतों में गड़बड़ी, रिकॉर्ड में विसंगतियां और विवादित जमीन की खरीद की जांच की बात
- मंदिर की हाई-पावर कमेटी के एक सदस्य ने वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सही लगने और जांच की जरूरत बताई
अयोध्या के राम मंदिर कथित चढ़ावा चोरी मामले की जांच चल रही है. इस बीच वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर के फंड पर भी विवाद खड़ा हो गया है. स्थानीय निवासियों ने शनिवार को बांके बिहारी मंदिर के कामकाज की निगरानी करने वाली हाई-पावर कमेटी के गोस्वामी सदस्यों को एक ज्ञापन सौंपा. इसमें प्रस्तावित विकास कार्यों के लिए मंदिर के फंड से खरीदी गई जमीन की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समय-सीमा के भीतर जांच की मांग की गई.
स्थानीय लोगों ने की जांच की मांग
ज्ञापन में संपत्तियों के कीमत में कथित गड़बड़ियों, एक ही मूल संपत्ति के अलग-अलग हिस्सों के लिए प्रति-वर्ग-मीटर दरों में भारी अंतर, सड़क की चौड़ाई से जुड़े रिकॉर्ड में विसंगतियों, कुछ संपत्तियों के बारे में शिकायतों, विवादित जमीन की खरीद और गोस्वामी समुदाय के सदस्यों को रिकॉर्ड न देने की कथित विफलता की जांच की मांग की गई.
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित श्री बांके बिहारी मंदिर हाई-पावर कमेटी के एक गोस्वामी सदस्य ने PTI को बताया कि वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सच लगते हैं और उन्होंने जोर देकर कहा कि जांच होनी चाहिए.
जिम्मेदार लोगों पर हो कानूनी कार्रवाई
उन्होंने मांग की कि कोई स्वतंत्र और सक्षम एजेंसी मंदिर के फंड से की गई जमीन की खरीद की जांच करे, जिसमें मूल्यांकन रिपोर्ट, भुगतान रिकॉर्ड, उप-समिति की कार्यवाही, मंजूरी और अन्य संबंधित दस्तावेज शामिल हों.
ज्ञापन में कहा गया है कि अगर कोई वित्तीय अनियमितता, नियमों का उल्लंघन या मंदिर के फंड का दुरुपयोग पाया जाता है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए और बिक्री रजिस्ट्रेशन को रद्द कर दिया जाना चाहिए.
इसमें मंदिर के फंड से संपत्ति की खरीद के लिए एक समान, पारदर्शी और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध मूल्यांकन नीति अपनाने की भी मांग की गई, ताकि मंदिर प्रशासन में लोगों का भरोसा मजबूत हो सके.
'किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है ज्ञापन'
स्थानीय निवासी दीपक पाराशर ने कहा कि ज्ञापन किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं था, बल्कि इसका उद्देश्य मंदिर के फंड, लाखों भक्तों की आस्था और जनता के भरोसे की रक्षा करना था.
उन्होंने कहा, 'अगर स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच में यह पाया जाता है कि सभी प्रक्रियाओं का पालन नियमों के अनुसार किया गया था, तो इससे लोगों का भरोसा और मजबूत होगा. अगर कोई अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना भी उतना ही जरूरी है.'
श्री बांके बिहारी मंदिर की हाई-पावर्ड कमिटी के सदस्य और सेवायत हिमांशु गोस्वामी ने पुष्टि की कि व्यापारियों और स्थानीय निवासियों ने जमीन की रजिस्ट्री में वित्तीय गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए एक ज्ञापन सौंपा है. गोस्वामी ने कहा, 'हम इसे हाई-पावर्ड कमिटी के सामने रखेंगे. पहली नजर में वित्तीय गड़बड़ी सच लगती है. इसकी जांच होनी चाहिए.'
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