विशाखापत्तनम में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और उनके मंत्री बेटे नारा लोकेश के कथित डीपफेक वीडियो कॉल के जरिए एक पूर्व सैनिक से 80 हजार रुपये की ठगी की गई. जालसाज ने नेता बनकर वीडियो कॉल किया और टैक्स से जुड़े उनके रुके हुए मामलों और पब्लिक पार्क के विकास से जुड़ी मांगों को सरकारी दखल से हल करने का भरोसा दिया. प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए उनसे एक फॉर्मेलिटी अमाउंट देने को कहा गया. उनको लगा कि वाकई ये कॉल उनको नेताओं की तरफ से आई है.
नेताओं के नाम पर 80 हजार की ठगी
फिर क्या था, उन्होंने जालसाज की बात पर भरोसा कर UPI ट्रांजैक्शन के जरिए 80,000 रुपये ट्रांसफर कर दिए. पैसे मिलने के तुरंत बाद,जालसाज ने कथित तौर पर उनसे और भी कई वादे किए. उसके बाद उसका कुछ पता नहीं चला. इस घटना ने एक बार फिर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के गलत इस्तेमाल को लेकर चिंता बढ़ा दी है. इस घटना को लेकर 44 साल के बोदिरेड्डी श्रीनिवास रेड्डी की शिकायत पर साइबर क्राइम पुलिस ने मामला दर्ज किया है.
TDP नेता की वॉट्सऐप फोटो से किया गुमराह
श्रीनिवास रेड्डी ने आरोप लगाया कि एक सालसाज ने प्रभावशाली नेताओं और सरकारी अधिकारियों का सहारा लेकर वॉट्सऐप कॉल, नकली स्क्रीनशॉट और AI वीडियो के जरिए उनसे 80,000 रुपये ठग लिए. पीड़ित ने शिकायत में कहा कि आरोपी ने वॉट्सऐप कॉल पर पूर्व मंत्री और सीनियर TDP नेता देवीनेनी उमा बनकर बात की. उसके प्रोफाइल पर भी उनकी फोटो लगी थी. जालसाज ने पीड़ित का भरोसा जीतने के लिए कथित तौर पर नेताओं और सीनियर अधिकारियों के साथ बातचीत के नकली स्क्रीनशॉट दिखाए.
वीडियो कॉल पर दिखा सीएम चंद्रबाबू नायडू जैसा शख्स
उनको इस तरह से वीडियो कॉल की गई, जिसमें मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और मंत्री नारा लोकेश जैसे दिखने वाले लोग शामिल थे. अब जांचकर्ताओं को शक है कि ये वीडियो मशहूर हस्तियों के रूप-रंग और हाव-भाव की नकल करने के लिए डीपफेक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके बनाए गए होंगे. शिकायतकर्ता ने कहा कि ये वीडियो कॉल बिल्कुल असली लग रही थी. इसीलिए उनको उसके सभी दावों पर यकीन हो गया. .
डीपफेक वीडियो के जरिए जालसाजी का शक
पुलिस अब सभी डिजिटल सबूतों की जांच कर रही है, जिनमें वॉट्सऐप चैट, स्क्रीनशॉट और कथित डीपफेक वीडियो कॉल शामिल हैं. ताकि आरोपी और एआई के इस्तेमाल से जालसाजी की पहचान की जा सके. अधिकारियों ने कहा कि साइबर अपराधी जालसाजी के लिए एआई का इस्तेमाल तेजी से कर रहे हैं. वे नेताओं, मशहूर हस्तियों और सरकारी अधिकारियों के नाम का सहारा लेते हैं. वे डीपफेक वीडियो और वॉयस क्लोनिंग टेक्नोलॉजी से धोखाधड़ी करते हैं. साइबर क्राइम पुलिस अपनी जांच जारी रखे हुए है.
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