- शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप के बीच अमेरिका में दोस्ताना माहौल में मुलाकात हुई, लेकिन यह दिखावे तक सीमित दिखी
- दोनों ने व्यापार विवाद सुलझाने के लिए पिछले समझौते को दो महीने और बढ़ाने और बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई
- शी जिनपिंग ने ताइवान के मुद्दे पर अमेरिका को सावधानी बरतने और ताइवान की स्वतंत्रता का समर्थन न करने को कहा
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अमेरिका पहुंचे तो उनका स्वागत करने के लिए खुद डोनाल्ड ट्रंप एयरपोर्ट पहुंच गए. ट्रंप ने उन्हें अपना दोस्त बताया, घूम-घूमकर व्हाइट हाउस दिखाया और स्टेट डिनर में शानदार खाना भी खिलाया. चीन-अमेरिका की दुश्मनी और तनाव के बीच दोनों नेताओं की ये तस्वीरें काफी अलग नजर आईं. लेकिन क्या इन खूबसूरत तस्वीरों का मतलब वाकई दोनों देशों के रिश्ते सुधरने लगे हैं? या फिर यह सिर्फ माहौल को बेहतर दिखाने की कोशिश थी? आखिर किन मुद्दों पर ट्रंप और शी एक साथ खड़े दिखे और किन मुद्दों पर दोनों के बीच तनाव अभी भी बना हुआ है? आइए चीन-अमेरिका की इस बैठक के 5 बड़े मायनों और अहम टेकअवे को समझते हैं.
बस माहौल बनाने की कोशिश
अमेरिका की विपक्षी पार्टी ने शी के साथ ट्रंप की बैठक की आलोचना करते हुए कहा कि इसमें अहम मुद्दों पर असल काम के बजाय दिखावे को ज़्यादा अहमियत दी गई. AI, व्यापार, ताइवान और ईरान के साथ युद्ध जैसे मुश्किल मुद्दों पर बंद दरवाजे के पीछे हुई छोटी सी बैठक से कोई बड़ी कामयाबी मिलने के संकेत नहीं मिले. द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार ओबामा सरकार में काम कर चुके पूर्व अमेरिकी राजनयिक डैनी रसेल ने चिंता जताई कि दोनों नेताओं ने असल मीटिंग (जो लगभग 90 मिनट की थी) के बजाय फोटो खिंचवाने वाले इवेंट्स में ज्यादा समय बिताया.
व्यापार
अमेरिका और चीन ने पिछले ट्रेड समझौते को 2 महीने और बढ़ाने पर सहमति जताई. इससे दोनों देशों को टैरिफ, चीन की खरीदारी, रेयर अर्थ और टेक्नोलॉजी से जुड़े विवादों पर बातचीत के लिए और समय मिलेगा. अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने इसकी जानकारी दी. चीन 2.5 करोड़ टन सोयाबीन खरीदने की अपनी शर्त पूरी कर रहा है, लेकिन अमेरिका से 17 अरब डॉलर के दूसरे कृषि सामान खरीदने में पीछे है. अमेरिका का कहना है कि रेयर अर्थ की सप्लाई भी उम्मीद से कम है.
ताइवान
शी जिनपिंग ने ट्रंप से ताइवान के मुद्दे पर सावधानी बरतने को कहा. चीन चाहता है कि अमेरिका ताइवान की आजादी का समर्थन न करे. हालांकि अमेरिका की लंबे समय से चली आ रही नीति में फिलहाल बदलाव के संकेत नहीं हैं. उम्मीद थी कि शी, ट्रंप पर ताइवान को हथियार बेचने से रोकने के लिए दबाव डालेंगे. मई में चीन के दौरे के बाद, ट्रंप ने कहा था कि वह ताइवान के लिए लगभग 14 अरब डॉलर के हथियारों की डील को रोक रहे हैं और इसे बातचीत के लिए बहुत अच्छा दांव बताया था. ट्रंप के इस कदम से एशिया में अमेरिका के कुछ सहयोगी देश परेशान हो गए थे.
AI
दोनों नेताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर अलग-अलग राय ज़ाहिर की. ट्रंप तो पहले ही कह चुके हैं कि AI को 'सुपर इंटेलिजेंस' या SI कहा जाना चाहिए. अब उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि वह इसे "जैसा है, वैसा ही रहने देना" चाहते हैं और कोई नए नियम लागू करने के बजाय अमेरिकी न्याय विभाग पर भरोसा करना चाहते हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि चीन का भी यही रुख है.
टकराव से बचने की बात, साथ काम करने पर जोर
शी जिनपिंग ने अमेरिका और चीन को उस स्थिति से बचने की चेतावनी दी जिसमें उभरती ताकत और मौजूदा बड़ी ताकत के बीच संघर्ष युद्ध में बदल सकता है. उन्होंने दोनों देशों के बीच नियमित सैन्य बातचीत और संकट के समय तनाव कम करने की व्यवस्था मजबूत करने की बात कही. ट्रंप ने भी दोनों देशों के साझा हितों पर साथ काम करने की संभावना पर जोर दिया. उन्होंने अमेरिका और चीन के पुराने युद्धकालीन सहयोग का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देश मिलकर काफी कुछ हासिल कर सकते हैं.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं