- अमेरिका और ईरान के बीच की जंग में अमेरिका से ज्यादा नुकसान राष्ट्रपति ट्रंप को उठाना पड़ रहा है
- युद्ध के कारण ट्रंप की लोकप्रियता के प्रतिशत में गिरावट आई है, क्यों कि उनको लेकर जनता में नाराजगी बढ़ी है
- ट्रंप प्रशासन में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी है, कई उच्च पदाधिकारियों को युद्ध के बीच हटाया गया है
ईरान संग 40 दिन चली जंग में अमेरिका को भी काफी नुकसान हुआ है. CSIS के मुताबिक, इस युद्ध में अमेरिका 7.49 लाख करोड़ रुपये ($80.4 बिलियन) स्वाहा कर चुका है. हालांकि ईरान की तुलना में उसका नुकसान थोड़ा कम है. ईरान ने तो इस जंग में अपने 3000 से ज्यादा लोग खो दिए और 25,000 से ज्यादा घायल भी हैं. ईरानी सेना की तुलना में भी अमेरिका का नुकसान ऑपरेशन एपिक फ्यूरी में काफी कम है. लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि ट्रंप को नुकसान नहीं उठाना पड़ा है. यह जंग ट्रंप की छवि और उनके प्रशासन के लिए काफी नुकासनदेह साबित हुई है. जानें जंग से डोनाल्ड ट्रंप को कैसे हो रहा नुकसान?
राजनीतिक अस्थिरता और उथल-पुथल
इस युद्ध की वजह से ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़ा आंतरिक संकट पैदा हो गया. अमेरिकी राष्ट्रपति ने युद्ध के बीच अपनी सहयोगी और अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी और गृह सुरक्षा सचिव क्रिस्टी नोएम जैसे उच्च पदों पर बैठे अफसरों को हटा दिया. बोंडी की जगह उन्होंने पूर्व डिप्टी टॉड ब्लैंच अटॉर्नी जनरल नियुक्त किया गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक बोंडी को आंतरिक तनाव, राजनीतिक दबाव और कुछ बड़े मुद्दों पर मतभेदों की वजह से हटाया गया. रिपोर्टों का तो ये भी कहना है कि ट्रंप अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गाबार्ड और हॉवर्ड लटनिक (वाणिज्य सचिव) से भी नाराज़ हैं.
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लोकप्रियता रेटिंग गिरी: जंग के बीच ट्रंप की लोकप्रियता में भी कमी आई है. उनकी अनुमोदन रेटिंग 36% तक गिर गई है, जो उनके वर्तमान कार्यकाल में बहुत कम है. दरअसल 60% अमेरिकी, इज़रायल संग मिलकर युद्ध लड़ने के उनके फैसले से नाराज हैं.
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आर्थिक नुकसान और बाज़ार में अस्थिरता
अमेरिका अभी भी तेल निर्यातक देश है, लेकिन होर्मुज़ के बंद होने से पैदा हुए वैश्विक आर्थिक संकट से ट्रंप प्रशासन को भारी नुकसान उठाना पड़ा है.
तेल की कीमतें: ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जिसकी वजह से अमेरिकी पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल की कीमतों में 20% की बढ़ोतरी हो गई.
वित्तीय लागत: ईरान संग जंग के शुरुआती कुछ हफ्तों में ही, अमेरिकी सेना की युद्ध की लागत करीब 18 अरब डॉलर आंकी गई थी. पेंटागन ने इमरजेंसी फंड के तौर पर अतिरिक्त 200 अरब डॉलर की मांग की थी.
महंगाई: जंग में हुए आर्थित नुकसान की वजह से अमेरिका पर दीर्घकालिक मुद्रास्फीति का खतरा फिर से मंडराने लगा है. जिसकी वजह से ट्रंप प्रशासन के "अमेरिका फर्स्ट" के संदेश को बड़ा झटका लगा है.

कूटनीतिक और रणनीतिक मोर्चे पर नुकसान
ट्रंप को बाहर ही नहीं अपनों के बीच भी आलोचना झेलनी पड़ रही है. ट्रंप प्रशासन को उनकी रणनीति के लिए अपने साथियों के बीच कड़ी आलोचना मिल रही है.
अलगाव: एक्टिव न्यूक्लियर नेगोशिएशन के दौरान ईरान और उसके सहयोगियों पर हमले शुरू करने के फैसले को ट्रंप के आलोचक उनकी लापरवाही बता रहे हैं, जिसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ तनाव पैदा हो गया है.
"अमेरिका फर्स्ट" को झटका: इस युद्ध की वजह से ट्रंप समर्थकों के बीच दरार पैदा हो गई है. "अमेरिका फर्स्ट" को सपोर्ट करने वाले विदेशी हस्तक्षेपों और लंबे समय तक चलने वाले युद्धों को लेकर असमंजस में हैं.
जानी नुकसान: अमेरिकी हमलों में ईरान में बड़ी संख्या में नागरिक मारे गए हैं.की मौतें हुई हैं. ईरान में अब तक 7,300 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं और 25,000 से ज्यादा लोग घायल हैं. मरने वालों में स्कूल पर हुए हमले में 165 बच्चियां भी शामिल है. ट्रंप के इस कदम की अंतरराष्ट्रीय मीडिया में कड़ी आलोचना हो रही है.
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