- अमेरिका में पढ़ाई के बाद नौकरी के लिए देने होंगे 1 करोड़, डोनाल्ड ट्रंप सरकार बना रही नया प्लान
- NDTV से केतन ने कहा कि "मेरे पास 1 करोड़ रुपये नहीं हैं. मुझे नहीं पता कि पढ़ाई पूरी करने के बाद क्या होगा"
- केतन विनोद अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स में डेटा साइंस में पीएचडी कर रहे हैं
"मेरे पास 1 करोड़ रुपये की फीस भरने के लिए पैसे नहीं हैं. मुझे नहीं पता कि यहां पढ़ाई पूरी करने के बाद क्या होगा."
यह कहना है केतन विनोद का, जो अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स में डेटा साइंस में पीएचडी कर रहे हैं. मूल रूप से केरल के रहने वाले केतन ने हाल ही में 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की एक ऐसी रिपोर्ट पढ़ी, जिसने उन्हें परेशान कर दिया. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका उन विदेशी छात्रों के वीजा पर 1 लाख डॉलर (करीब 1 करोड़ रुपये) की फीस लगाने की योजना बना रहा है, जो अमेरिकी यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद वहीं काम करना चाहते हैं. NDTV ने केतन और उनके रूममेट से बात कर यह समझने की कोशिश की कि अगर ट्रंप सरकार यह फीस लागू कर देती है, तो अमेरिका में पढ़ रहे 3.3 लाख भारतीय छात्र कितनी परेशानी में आ जाएंगे.
पहले ट्रंप सरकार का प्रस्ताव समझिए
ट्रंप सरकार का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिकी अदालत H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर की फीस लगाने के प्रस्ताव को खारिज कर चुकी है. 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' के मुताबिक, अब डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी 'ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग' (OPT) प्रोग्राम पर भारी फीस लगाने पर विचार कर रहा है.
OPT, छात्रों को दिए जाने वाले F-1 वीजा का ही एक विस्तार है. इसके तहत विदेशी छात्र अपनी पढ़ाई से जुड़े क्षेत्रों में एक से तीन साल तक काम कर सकते हैं.
"फिलहाल तो इंतजार करने का समय है"
NDTV से बातचीत में केतन विनोद ने कहा कि अगर 1 लाख डॉलर (करीब 1 करोड़ रुपये) की यह फीस लागू हो जाती है, तो इसका भारतीय और दूसरे विदेशी छात्रों पर बहुत बड़ा असर पड़ेगा.
दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर चुके केतन कहते हैं, "अमेरिका में ग्रेजुएशन के बाद काम का अनुभव हासिल करने के लिए बहुत से छात्र OPT पर निर्भर रहते हैं. पढ़ाई के बाद नौकरी पाने का यही सबसे बड़ा रास्ता है. अगर यह प्रस्ताव पास हो जाता है, तो ग्रेजुएशन के बाद नौकरी पाना छात्रों के लिए काफी मुश्किल हो जाएगा."
उन्होंने आगे कहा, "मेरे और मेरे जैसे कई छात्रों के लिए ग्रेजुएशन के बाद नौकरी का अनुभव हासिल करने का सबसे स्वाभाविक रास्ता OPT ही है. इसलिए अगर यह नियम लागू होता है, तो इसका असर मुझ पर भी पड़ेगा. जाहिर है, मेरे पास 1 लाख डॉलर की फीस भरने के लिए पैसे नहीं हैं. ऐसे में मुझे नहीं पता कि पढ़ाई पूरी होने के बाद क्या होगा. फिलहाल यह सिर्फ योजना के स्तर पर है, इसलिए अभी इंतजार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है."
इस पर केतन के रूममेट और यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स में डेटा साइंस में मास्टर्स कर रहे ओजस का कहना है कि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि नियम इसकी इजाजत देते हैं या नहीं.
उन्होंने कहा, "अगर नियम इसकी इजाजत भी देते हैं, तब भी यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां उस कर्मचारी को कितना अहम मानती हैं. मुझे लगता है कि ज्यादातर कंपनियां इतनी बड़ी रकम नहीं चुकाना चाहेंगी. ऐसे में बहुत संभव है कि छात्र और कंपनियां, दोनों ही दूसरे विकल्प तलाशने लगें."
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं