- लिंकन मेमोरियल रिफ्लेक्टिंग पूल को रेनोवेट करने का ट्रंप का प्लान विवादों में घिर गया है, इसमें काई जम गई है
- बढ़ते खर्च और खराब नतीजों की वजह से ट्रंप के इस प्रोजेक्ट की आलोचना हो रही है
- इस रेनोवेशन प्रोजेक्ट का ठेका बिना किसी टेंडर के ट्रंप के करीबियों को मिला था
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अंदर का न बिजनेसमैन बाहर जा रहा, न विवादों में रहने की उनकी आदत में कोई बदलाव हो रहा है. हर दूसरे दिन अमेरिका में एक नया लफड़ा सामने आ जाता है और पहले वाले से भी नायाब. कुछ ही दिन में अमेरिका की आजादी के 250 साल पूरे होने वाले हैं और ट्रंप चाहते थे कि वॉशिंगटन का मशहूर लिंकन मेमोरियल रिफ्लेक्टिंग पूल पहले से ज्यादा शानदार दिखे. लेकिन देशभक्ति का प्रतीक बनाने की यह कोशिश अब बड़ी विवादित कहानी बन गई है.
ट्रंप चले तो थे इसको अमेरिका का झंडा जैसा नीला बनाने लेकिन इसमें ऐसी काई जमी की यह पाकिस्तान के झंडे जैसा हरा दिखना लगा है. बढ़ते खर्च और खराब नतीजों की वजह से ट्रंप का यह प्रोजेक्ट आलोचनाओं में घिर गया है. अब लोगों की गिरफ्तारी हो रही है. चलिए आपको पूरा विवाद समझाते हैं.

ट्रंप का सपना क्या था?
अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन, डीसी में यह रिफ्लेक्टिंग पूल 1922 में बनाया गया था. इसकी लंबाई 2,000 फीट (लगभग 600 मीटर) से भी ज्यादा है और यह लिंकन मेमोरियल तथा वॉशिंगटन मॉन्यूमेंट के बीच स्थित है. साल 1963 में मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने अपना मशहूर "आई हैव अ ड्रीम" भाषण इसी रिफ्लेक्टिंग पूल के सामने दिया था. जब अमेरिका आजादी के 250 साल पूरे होने का जश्न मनाने वाला है, तब डोनाल्ड ट्रंप नया प्रोजेक्ट लेकर आए. ट्रंप ने कहा कि पहले के राष्ट्रपतियों ने इस पूल पर ध्यान नहीं दिया, इसे गंदा रहने दिया, मैं इसे साफ कराऊंगा और इसमें अमेरिका का झंडा पेंट कराउंगा. इसका पानी इतना साफ होगा कि उपर से इस पूल में अमेरिकी झंडा दिखेगा.
ट्रंप ने कितना खर्चा बताया था?
शुरू में ट्रंप ने कहा था कि रिफ्लेक्टिंग पूल की मरम्मत और दोबारा रंगाई पर 18 लाख डॉलर (16 करोड़ रुपए के आसपास) खर्च होंगे. लेकिन द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार सरकारी ठेके के डॉक्यूमेंट बताते हैं कि अब इसकी लागत बढ़कर लगभग 1.5 करोड़ डॉलर (लगभग 130 करोड़ रुपए) तक पहुंच गई है.

सफाई करते वक्त पूल से हरा गंदा पानी निकल रहा (फोटो- AFP)
ट्रंप सरकार का कहना था कि यह काम "ट्रंप की रफ्तार" से होना चाहिए. इसलिए आमतौर पर सरकारी परियोजनाओं में अपनाई जाने वाली टेंडर प्रक्रिया को छोड़ दिया गया और सीधे ठेका दे दिया गया. यह ठेका अटलांटिक इंडस्ट्रियल कोटिंग्स नाम की कंपनी को मिला. कमाल की बात है कि इस कंपनी को इससे पहले कभी कोई संघीय (फेडरल) सरकारी ठेका नहीं मिला था. ट्रंप ने कहा था कि यह कंपनी पहले उनके गोल्फ क्लब में भी काम कर चुकी है, लेकिन कंपनी ने इस संबंध की पुष्टि नहीं की.
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जमी काई से हरा दिख रहा यह तालाब
रिफ्लेक्टिंग पूल का निचला हिस्सा (तल) पहले हल्के भूरे रंग का होता था. इसे इस तरह बनाया गया था ताकि आसपास मौजूद स्मारकों की छवि पानी में साफ दिखाई दे सके. लेकिन ट्रंप इसे "अमेरिकी झंडे जैसा नीला" बनाना चाहते थे. इसके लिए उन्होंने गहरे नेवी ब्लू रंग का इस्तेमाल करने की योजना बनाई, जिसे आधिकारिक तौर पर "ओल्ड ग्लोरी ब्लू" कहा जाता है.
कई लोगों को यह प्रोजेक्ट पूरी होने के तुरंत बाद दिखाई दिया गहरा नीला रंग इतना ज्यादा गहरा लगा कि वह लगभग काला नजर आ रहा था. इसके कुछ ही दिनों बाद पानी हरा दिखाई देने लगा. इसकी वजह पानी में तेजी से फैल रही काई (एल्गी) थी, जो रुके हुए पानी में पैदा हो गई थी. शुरू में तो ट्रंप सरकार ने दावा किया कि पानी "बिल्कुल साफ और शीशे जैसा पारदर्शी" है, जबकि देखने में ऐसा नहीं लग रहा था.
और तो और, रेनोवेशन के दौरान की गई पेंट की कोटिंग भी उखड़ने लगी. हाल के दिनों में लोगों ने पूल की तली से अलग होकर तैरते हुए पेंट के टुकड़ों को बाहर निकाला है.

आखिर यह हरा क्यों हुआ?
गर्मियों में कम गहरे और रुके हुए पानी में काई (एल्गी) का पनपना आम बात है और ऐसा रिफ्लेक्टिंग पूल के मामले में होता है. पानी को खाली करने और बदलने से इसके बढ़ने की रफ्तार और तेज हो सकती थी. स्विमिंग पूल के जानकार स्टीव गुडेल ने NPR को बताया कि इसे 'न्यू पॉन्ड सिंड्रोम' कहा जाता है. इनके अनुसार जब आप खुले वातावरण में मौजूद पानी के किसी प्राकृतिक और साफ स्रोत को इस्तेमाल में लाने की कोशिश करते हैं, तो अक्सर पानी लगभग तुरंत ही हरा हो जाता है.
'द अटलांटिक' मैगजीन ने यहां से काई को वैज्ञानिक जांच के लिए भेजा. उन्हें विशेषज्ञों से पता चला कि जिन कर्मचारियों ने पूल से काई हटाने के लिए उसमें हाइड्रोजन पेरोक्साइड डाला था, उन्होंने अनजाने में ही शैवाल की एक दूसरी प्रजाति को पनपने में मदद कर दी. एक्सपर्ट ने बताया कि यह बहुत तेज़ी से फैलने वाली प्रजाति है. पहले मौजूद नीले-हरे शैवाल की जगह अब नया हरा शैवाल तेजी से फैल रहा है और पूरी जगह पर कब्जा कर रहा है.
ट्रंप फिर लगाने लगे आरोप, हो रही गिरफ्तारी
ट्रंप ने सरकार की गलती मानने की जगह इन समस्याओं के लिए असमाजिक तत्वों या तोड़फोड़ करने वालों (वैंडल्स) को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने दावा किया कि कुछ लोगों ने चाकू या किसी तेज धार वाले औजार से पूल की बाहरी सतह पर लगभग 250 फीट लंबा कट लगा दिया है. हालांकि वॉशिंगटन पोस्ट के पत्रकार जब रविवार को पूल देखने पहुंचे, तो उन्हें ट्रंप द्वारा बताए गए ऐसे किसी नुकसान का कोई सबूत नहीं मिला.
अब इस मामले में गिरफ्तारी भी हो रही है. सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार शनिवार तक पूल में तोड़फोड़ करने के आरोप में 5 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका था. इसके अलावा 5 अन्य लोगों को संघीय नोटिस (फेडरल सिटेशन) जारी किए गए थे. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार नेशनल गार्ड और U.S. पार्क पुलिस को यहां गश्ती पर भी लगाया गया है.
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