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ईरान, सैन्य अड्डा और 99 साल की लीज- हिंद महासागर के एक छोटे से द्वीप के लिए ब्रिटेन से क्यों उलझ रहे ट्रंप?

UK Chagos Island deal Explained: ईरान से जंग की स्थिति में अमेरिका के लिए डिएगो गार्सिया पर बना एयरबेस अहम क्यों होगा, यहां समझिए.

ईरान, सैन्य अड्डा और 99 साल की लीज- हिंद महासागर के एक छोटे से द्वीप के लिए ब्रिटेन से क्यों उलझ रहे ट्रंप?
हिंद महासागर के एक छोटे से द्वीप के लिए ब्रिटेन से क्यों उलझ रहे ट्रंप?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किसी भी वक्त ईरान पर सैन्य हमला कर सकते हैं. इसके लिए वो हर तरह के पत्ते अपने हाथ में रखना चाहते हैं. ईरान पर एक ऐसी ही रणनीतिक बढ़त बनाए रखने के लिए उन्होंने ब्रिटेन को हड़का दिया है. ट्रंप ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से कहा है कि वह हिंद महासागर में मौजूद चागोस द्वीप समूह को मॉरिशस को न सौंपें. इस द्वीप समूह में सबसे बड़ा द्वीप डिएगो गार्सिया है, जिसपर अमेरिका और ब्रिटेन का एयर बेस है. ब्रिटेन इसे डील के तहत 99 साल के लीज पर लेगा. कमाल की बात यह है कि एक दिन पहले ही ब्रिटेन के इस प्लान को अमेरिका ने हरी झंडी दिखाई थी. ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब परमाणु समझौता न होने की स्थिति में अमेरिका और ईरान के बीच जंग की आशंका जताई जा रही है. 

चलिए आपको बताते हैं कि ब्रिटेन का यह समझौता है क्या, ट्रंप ने अब ब्रिटिश पीएम से क्या कहा है और आखिर ईरान से जंग की स्थिति में अमेरिका डिएगो गार्सिया एयरबेस का इस्तेमाल कैसे कर सकता है.

Q- ब्रिटेन और मॉरिशस के बीच क्या डील हुई है?

2025 के एक समझौते के तहत ब्रिटेन चागोस द्वीप समूह मॉरिशस को लौटाने वाला है, जबकि उसके सबसे बड़े द्वीप डिएगो गार्सिया में मौजूद अमेरिका-ब्रिटेन के सैन्य अड्डे को 99 साल की लीज पर रखा जाएगा. मॉरिशस को 1968 में ब्रिटेन से आजादी मिली थी, लेकिन चोगोस ब्रिटिश नियंत्रण में ही रहा. 2019 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के फैसले और बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद 2025 में समझौता करना पड़ा. लेकिन अब ट्रंप को यह समझौता रास नहीं आ रहा है.

Q- ट्रंप ने ब्रिटेन से क्या कहा है?

ट्रंप ने कहा कि चागोस द्वीप सौंपना और डिएगो गार्सिया के एयरबेस को लीज पर लेना एक बड़ी गलती है. उनका कहना है कि अगर ईरान परमाणु समझौते पर राजी नहीं होता, तो अमेरिका डिएगो गार्सिया का इस्तेमाल ईरान से होने वाले किसी संभावित हमले को रोकने के लिए कर सकता है. उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि ब्रिटेन को किसी भी हाल में डिएगो गार्सिया का नियंत्रण नहीं छोड़ना चाहिए. उन्होंने लिखा कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर नाटो सहयोगी ब्रिटेन के लिए लड़ने को तैयार है, लेकिन ब्रिटेन को मजबूत बने रहना होगा और डिएगो गार्सिया किसी को नहीं देना चाहिए.

Q- अमेरिका के लिए डिएगो गार्सिया क्यों अहम है?

डिएगो गार्सिया हिंद महासागर में सबसे महत्वपूर्ण सैन्य बेस में से एक की मेजबानी करता है. इसे अमेरिका और ब्रिटेन के सशस्त्र बलों द्वारा ज्वाइंट बेस के रूप में संचालित किया जाता है. इसे व्यापक रूप से मध्य पूर्व, पूर्वी अफ्रीका और भारत-प्रशांत में फैले इन दोनों देशों से सैन्य अभियानों के लिए एक महत्वपूर्ण आधार माना जाता है. ट्रंप ने बेस के लोकेशन की अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि यह बेस "रणनीतिक रूप से हिंद महासागर में स्थित" है.

Q- एक दिन पहले अमेरिका का स्टैंड क्या था?

ट्रंप का यह बयान बुधवार को आया है और उससे एक दिन पहले यानी मंगलवार को अमेरिकी विदेश विभाग ने ब्रिटेन-मॉरिशस डील का समर्थन किया था. उसने डिएगो गार्सिया बेस को अपने पास बनाए रखने पर मॉरीशस के साथ अगले सप्ताह तीन दिनों की बातचीत की घोषणा भी की थी. अपने बयान में अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा: "अमेरिका चागोस द्वीपसमूह के संबंध में मॉरीशस के साथ समझौते को आगे बढ़ाने के यूनाइटेड किंगडम के फैसले का समर्थन करता है."

लेकिन अब ट्रंप ने एक दिन में ही अपने विदेश विभाग के उलट बात कर दी है.

Q- ट्रंप को ब्रिटेन ने क्या जवाब दिया है?

ट्रंप के बयान के बाद ब्रिटेन ने समझौते का तेजी से बचाव तेजी किया. ब्रिटेन ने इस समझौते को राजनयिक तौर पर कदम पीछे खींचने की बजाय एक सुरक्षा उपाय के रूप में पेश किया. ब्रिटेन के विदेश कार्यालय ने कहा कि चागोस डील "यूके और हमारे प्रमुख सहयोगियों की सुरक्षा और ब्रिटिश लोगों को सुरक्षित रखने के लिए महत्वपूर्ण था".

इसमें कहा गया, "हम जिस समझौते पर पहुंचे हैं वह इस महत्वपूर्ण सैन्य अड्डे के दीर्घकालिक भविष्य की गारंटी देने का एकमात्र तरीका है." ब्रिटेन का तर्क है कि लंबे समय तक कानूनी अनिश्चितता के बजाय बातचीत और समझौते के जरिए समाधान निकालना बेहतर था. अगर कानूनी अनिश्चितता बनी रहेगी तो वह सैन्य बेस के संचालन को खतरे में डाल सकता है.

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