- रूस ने उस रिपोर्ट का खंडन किया है, जिसमें उसके ईरान के साथ खुफिया जानकारी साझा करना बंद करने की पेशकश की थी.
- रिपब्लिकन सांसद अन्ना पॉलिना लूना ने पॉलिटिको को युद्ध समर्थक तंत्र का मुखपत्र बताते हुए इसकी कड़ी आलोचना की.
- रूस ने अमेरिकी युद्धपोतों और विमानों के ठिकानों की जानकारी ईरान को देने की रिपोर्ट का भी खंडन किया.
रूस ने उस मीडिया रिपोर्ट का खंडन किया है जिसमें दावा किया गया था कि क्रेमलिन ने ईरान के साथ खुफिया जानकारी साझा करना बंद करने की पेशकश की थी, बशर्ते अमेरिका यूक्रेन को रूस के बारे में खुफिया जानकारी देना बंद कर दे. अमेरिकी मीडिया फर्म पॉलिटिको की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दूत किरिल दिमित्रीव ने पिछले सप्ताह मियामी में ट्रंप प्रशासन के दूतों स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के साथ बैठक के दौरान खुफिया जानकारी साझा नहीं करने का प्रस्ताव रखा था.
पॉलिटिको ने अमेरिका-रूस वार्ता से परिचित दो सूत्रों के हवाले से बताया कि अमेरिका फरवरी 2022 में रूस द्वारा हमला किए जाने के बाद से यूक्रेन के साथ खुफिया जानकारी साझा कर रहा है. हालांकि अमेरिका ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया. हालांकि, दिमित्रीव ने शुक्रवार को एक्स पर अपनी एक पोस्ट के जरिए इस रिपोर्ट को फर्जी बताया है.
रिपब्लिकन सांसद ने भी की आलोचना
उधर, रिपब्लिकन सांसद अन्ना पॉलिना लूना ने पॉलिटिको की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह यूक्रेन में युद्ध समर्थक तंत्र का मुखपत्र है. उन्होंने एक्स पर लिखा कि व्हाइट हाउस या रूस के साथ आंतरिक चर्चाओं या शांति वार्ता से संबंधित किसी भी जानकारी तक उनकी कोई पहुंच नहीं है. साथ ही कहा कि रूस और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ाने के उनके प्रयासों को नजरअंदाज करें.
अमेरिकी अखबार द वाशिंगटन पोस्ट ने इस महीने की शुरुआत में अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि रूस ने अमेरिका और इजराय के खिलाफ युद्ध के दौरान ईरान को संवेदनशील खुफिया जानकारी दी थी. इस जानकारी में मध्य पूर्व में अमेरिकी युद्धपोतों और विमानों के ठिकाने शामिल थे. हालांकि, रूस ने इस रिपोर्ट का खंडन किया था.
28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से रूस ने मानवीय सहायता भेजी है, लेकिन उसने ईरान को दी गई किसी भी प्रकार की सहायता के बारे में सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है.
ईरान ने की रूस को ड्रोन की आपूर्ति!
यूक्रेन युद्ध के दौरान ईरान, रूस के प्रमुख सहयोगियों में से एक बनकर उभरा है. संघर्ष की शुरुआत में ईरान ने कथित तौर पर रूस को यूक्रेन के शहरों पर हमला करने के लिए ड्रोन की आपूर्ति की थी.
पिछले हफ्ते व्हाइट हाउस की ओर से कहा गया कि अगर रूस मध्य पूर्व युद्ध के दौरान ईरान के साथ खुफिया जानकारी साझा कर रहा है तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुश नहीं होंगे.
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने एक ब्रीफिंग में कहा कि राष्ट्रपति और उनके विशेष दूत (स्टीव) विटकॉफ दोनों ने कहा है कि उन्होंने रूस को यह संदेश भेजा है कि अगर ऐसा हो रहा है तो वे इससे खुश नहीं होंगे और उन्हें उम्मीद है कि ऐसा नहीं हो रहा है.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा था कि अगर रूस ने ईरान को अमेरिकी सैन्य कर्मियों और संपत्तियों को निशाना बनाने में मदद करने के लिए जानकारी दी भी है, तो इसका कोई महत्व नहीं है.
उन्होंने 8 मार्च को पत्रकारों से कहा था कि पिछले हफ्ते ईरान के साथ जो हुआ है, उसे देखें तो अगर उन्हें जानकारी मिल भी रही है तो उससे उन्हें कोई खास मदद नहीं मिल रही है.
रूस की बात पर विश्वास किया जाना चाहिए: विटकॉफ
हाल के महीनों में रूस और ईरान दोनों के साथ अमेरिकी वार्ता का नेतृत्व कर रहे विटकॉफ ने कहा कि जब रूस की ओर से ईरान के साथ खुफिया जानकारी साझा करने से इनकार किया जा रहा है तो उसकी बात पर विश्वास किया जाना चाहिए.
जब उनसे पूछा गया कि क्या रूस ने खुफिया जानकारी साझा की है तो विटकॉफ ने अमेरिकी समाचार चैनल सीएनबीसी को बताया कि मैं खुफिया अधिकारी नहीं हूं, इसलिए मैं आपको कुछ नहीं बता सकता.
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