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नौकरी के लिए गया था, 8 महीने बाद ताबूत में लौटा शव; रूस-यूक्रेन युद्ध में मारा गया लुधियाना का लाल

करीब आठ महीने पहले घर छोड़कर रूस गए 21 वर्षीय समरजीत सिंह का शव शुक्रवार को ताबूत में उसके घर पहुंचा. बताया गया कि रूस-यूक्रेन युद्ध में लड़ते हुए उसकी मौत हो गई.समरजीत लुधियाना के डाबा इलाके की अमरपुरी कॉलोनी का रहने वाला था.

नौकरी के लिए गया था, 8 महीने बाद ताबूत में लौटा शव; रूस-यूक्रेन युद्ध में मारा गया लुधियाना का लाल
ludhiana news
  • समरजीत सिंह नामक 21 वर्षीय युवक आठ महीने पहले बेहतर रोजगार की तलाश में रूस गया था, जहां उसकी मौत हो गई
  • परिवार का दावा है कि उसे नौकरी का झांसा देकर रूस में जबरन सेना में भर्ती कर युद्ध में भेज दिया गया
  • समरजीत को किसी सैन्य प्रशिक्षण के बिना युद्ध के मोर्चे पर भेजे जाने और संपर्क टूटने की जानकारी परिवार ने दी
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लुधियाना:

बेहतर रोजगार की तलाश में करीब आठ महीने पहले घर छोड़कर रूस गए 21 वर्षीय समरजीत सिंह का शव शुक्रवार को ताबूत में उसके घर पहुंचा. बताया गया कि रूस-यूक्रेन युद्ध में लड़ते हुए उसकी मौत हो गई.समरजीत लुधियाना के डाबा इलाके की अमरपुरी कॉलोनी का रहने वाला था.परिजनों के मुताबिक समरजीत जुलाई 2025 में एजेंटों के माध्यम से रूस गया था. परिवार का कहना है कि उसे अच्छी नौकरी और कमाई का झांसा दिया गया था, लेकिन वहां पहुंचने के बाद कथित तौर पर उसे जबरन रूसी सेना में भर्ती कर लिया गया.

कोई सैन्य ट्रेनिंग नहीं दी और युद्ध पर भेज दिया

परिवार का दावा है कि समरजीत को किसी भी तरह की सैन्य ट्रेनिंग नहीं दी गई और सीधे युद्ध के मोर्चे पर भेज दिया गया.परिजनों के अनुसार सितंबर 2025 में उससे आखिरी बार संपर्क हुआ था, जिसके बाद से वह युद्ध क्षेत्र में लापता हो गया था. गुरुवार को उसका शव नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचा, जहां से उसे लुधियाना लाया गया.

भावुक पिता की एक अपील

शुक्रवार को गमगीन माहौल में उसका अंतिम संस्कार किया गया.अपने बेटे की चिता के पास खड़े समरजीत के पिता चरणजीत सिंह ने भावुक अपील करते हुए लोगों से कहा कि वे अपने बच्चों को एजेंटों के झांसे में आकर विदेश न भेजें. चरणजीत सिंह अमरपुरी इलाके में एक छोटी किराना दुकान चलाते हैं. आंसुओं को रोकते हुए उन्होंने कहा, “मैं सभी से अपील करता हूं कि एजेंटों के जरिए विदेश भेजने के लालच में अपने बच्चों की जिंदगी जोखिम में न डालें.चाहे आर्थिक हालात कितने भी खराब हों, ऐसा कदम न उठाएं. मैंने सब कुछ खो दिया है.

चरणजीत सिंह ने बताया कि बेटे के लापता होने के बाद परिवार ने कई महीनों तक अलग-अलग अधिकारियों और नेताओं से मदद की गुहार लगाई थी. उनका कहना है कि उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय नेताओं, राज्य के मंत्रियों और स्थानीय विधायकों तक से संपर्क किया, लेकिन कोई ठोस मदद नहीं मिली.

समरजीत का एक वीडियो भी आया था

सोशल मीडिया पर कुछ महीने पहले समरजीत का एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें वह रूसी सेना में भर्ती अन्य भारतीय युवकों के साथ दिखाई दे रहा था. वीडियो में उन्होंने मदद की गुहार लगाते हुए कहा था कि उन्हें बिना उचित प्रशिक्षण के युद्ध के मोर्चे पर भेजा जा रहा है. परिजनों का कहना है कि समरजीत केवल परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए विदेश गया था. पिता ने कहा, “अगर यहां रोजगार होता तो मेरा बेटा कभी विदेश नहीं जाता. वह हमारी मदद करना चाहता था, इसलिए गया.”

नहीं मिली कोई मदद

परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि न तो रूसी अधिकारियों और न ही भारत या पंजाब सरकार की ओर से अब तक उनसे संपर्क किया गया है और न ही किसी मुआवजे या मौत की परिस्थितियों के बारे में जानकारी दी गई है. गमगीन पिता ने कहा, “हमें यह भी नहीं पता कि उसके साथ आखिरी समय में क्या हुआ. हमें सिर्फ शव मिला है, लेकिन यह भी पूरी तरह पक्का नहीं कि वह हमारे बेटे का ही है। फिर भी हमें उसे स्वीकार करना पड़ा.”

परिवार के शोक के बीच चरणजीत सिंह ने कहा कि यह घटना उन परिवारों के लिए चेतावनी है जो विदेश में जल्दी पैसा कमाने के सपने देखते हैं.उन्होंने कहा, “एजेंट गरीब परिवारों को झूठे वादों से फंसाते हैं और जब सच सामने आता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है.”

 लुधियाना से सुनील कुमार की रिपोर्ट
 

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