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पृथ्वी की सतह पर सबसे निचला स्थान 'डेड सी', यहां नहीं पनप पाता कोई जीव, नासा भी रखता है नजर

1947 से 1956 के बीच डेड सी के उत्तर-पूर्वी किनारे की गुफाओं में 'डेड सी स्क्रॉल्स' नामक प्राचीन पांडुलिपियां मिली थीं. ये 972 से ज्यादा टेक्स्ट हिब्रू बाइबिल और अन्य यहूदी-ईसाई ग्रंथों के सबसे पुराने सुरक्षित हिस्से हैं.

पृथ्वी की सतह पर सबसे निचला स्थान 'डेड सी', यहां नहीं पनप पाता कोई जीव, नासा भी रखता है नजर
डेड सी इजरायल और जॉर्डन की सीमा पर स्थित है.
  • डेड सी अत्यधिक खारे पानी के कारण जीवों के लिए उपयुक्त नहीं है और इसे मृत सागर कहा जाता है
  • यह इजरायल और जॉर्डन की सीमा पर स्थित है और समुद्र तल से लगभग चार सौ मीटर नीचे है
  • डेड सी के पानी का घनत्व इतना अधिक है कि इसमें कोई वस्तु डूबती नहीं बल्कि सतह पर तैरती है
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डेड सी या मृत सागर दुनिया की सबसे अनोखी झीलों में से एक है. इसका नाम सुनते ही सवाल उठता है कि इसे 'मृत' क्यों कहा जाता है? हैरत में डालने वाली बात यह है कि इसमें कोई भी जीव पनप नहीं पाता है.अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा इस बारे में विस्तार से जानकारी देती है. इसका मुख्य कारण इसका अत्यधिक नमक वाला पानी है. यहां नमक की मात्रा इतनी ज्यादा है कि मछलियां, पौधे और ज्यादातर जीव-जंतु यहां जीवित नहीं रह सकते. यही वजह है कि इसे 'डेड सी' या 'मृत सागर' का नाम मिला. यह कोई आम समुद्र नहीं, बल्कि एक खारा जलाशय है, जो इजरायल और जॉर्डन की सीमा पर स्थित है और पृथ्वी की सतह पर सबसे निचला स्थान है. समुद्र तल से लगभग 400 मीटर या 1,300 फीट नीचे होने के कारण यह दुनिया का सबसे निचला स्थान माना जाता है.यहां का पानी सामान्य समुद्र के पानी से 8-10 गुना ज्यादा खारा है.

नमक की मात्रा इतनी अधिक होने से डेड सी के पानी का घनत्व काफी अधिक होता है. इसके चलते यहां कोई भी चीज डूबने की जगह सतह पर तैरती रहती है.

कैसा दिखता है

नासा के लैंडसैट सैटेलाइट्स से ली गई तस्वीरें इसकी खासियत को और स्पष्ट करती हैं. साल 1972, 1989 और 2011 में ली गई तस्वीरों में गहरे नीले रंग के पानी, चमकीले नीले और हल्के गुलाबी दिखाई देते हैं.हरे और चमकीले लाल रंग से थोड़ी बहुत हरी भरी जमीन का पता चलता है. इन तस्वीरों में बीच में लिसान प्रायद्वीप भी साफ नजर आता है, जो डेड सी को दो हिस्सों में बांटता हुआ एक प्राकृतिक पुल जैसा बनाता है. गर्मियों के सूखे दिनों में यहां का पानी बहुत तेजी से वाष्पित होता है. एक दिन में पानी का स्तर 2-3 सेंटीमीटर तक नीचे गिर सकता है. यही कारण है कि पिछले कई दशकों में इसके स्तर में काफी कमी आई है.

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डेड सी का इतिहास

डेड सी का इतिहास भी बहुत पुराना है. हजारों साल पहले से यह जगह पर्यटकों और इंडस्ट्री को आकर्षित करती रही है. प्राचीन मिस्रवासियों ने इसके नमक का इस्तेमाल ममी को संरक्षित करने, खाद के रूप में और पोटाश बनाने में किया था.आज के समय में यहां से निकाले जाने वाले सोडियम क्लोराइड और पोटेशियम सॉल्ट का उपयोग पानी शुद्धिकरण, सड़कों से बर्फ हटाने और पीवीसी प्लास्टिक बनाने में होता है.पिछले 40 सालों में नमक निकालने के बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स बढ़े हैं, जो सैटेलाइट तस्वीरों में भी साफ दिखते हैं.

धार्मिक महत्व भी है

इस इलाके का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व भी कम नहीं है. 1947 से 1956 के बीच डेड सी के उत्तर-पूर्वी किनारे की गुफाओं में 'डेड सी स्क्रॉल्स' नामक प्राचीन पांडुलिपियां मिली थीं. ये 972 से ज्यादा टेक्स्ट हिब्रू बाइबिल और अन्य यहूदी-ईसाई ग्रंथों के सबसे पुराने सुरक्षित हिस्से हैं.ये खोज इतिहासकारों के लिए बहुत बड़ी उपलब्धियों में रही. नासा और अमेरिकी भूवैज्ञानिक मिलकर लैंडसैट प्रोग्राम चलाते हैं. इसकी तस्वीरें और डेटा इंटरनेट पर सबके लिए उपलब्ध हैं. इनके जरिए वैज्ञानिक डेड सी के बदलावों पर नजर रखते हैं.

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