- ब्रिटेन के पूर्व राजकुमारको Jeffrey Epstein मामले में गिरफ्तारी के बाद हिरासत में रखा गया था
- उनकी गिरफ्तारी 1640 के दशक में राजा चार्ल्स प्रथम की गिरफ्तारी से तुलना की जा रही है
- राजशाही ने माउंटबेटन-विंडसर को सभी आधिकारिक खिताबों से वंचित कर दिया है और सिंहासन से हटाने पर विचार कर रही है
एक ऐसी राजशाही जिसके बारे में कहा जाता था कि इस साम्राज्य का कभी सूर्य अस्त नहीं होता. पूरब से पश्चिम तक जिसका राज था और उसका एक अदना सा अधिकारी भी दूसरे देशों पर राज किया करता था, आज वही अपने सबसे बड़े संकट में फंस गया है. ब्रिटेन का शाही परिवार यूं तो अपनी ताकत कबका खो चुका है, मगर इस बार जनता के दिलों से भी उतरने के खतरे को झेल रहा है.
1640 ये हो रही तुलना
बृहस्पतिवार दोपहर ब्रिटेन के राजा चार्ल्स तृतीय के भाई को गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस उनके घर तक पहुंच गई. पूर्व राजकुमार एंड्रयू की गिरफ्तारी से राजशाही के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है. इसे कम करने के लिए राजा ने अपने भाई की जेफरी एपस्टीन से दोस्ती की पुलिस जांच में सहयोग देने पर जोर दिया. उन्होंने "चार्ल्स आर." के हस्ताक्षर वाले एक बयान में कहा, "मेरा परिवार और मैं आप सभी के प्रति अपने कर्तव्य और सेवा को निभाते रहेंगे." चार्ल्स आर. रेक्स का संक्षिप्त रूप है, जो राजा के लिए लैटिन शब्द है. चार्ल्स की तरफ से यह बयान देना ही इस बात का प्रमाण है कि राजा के 66 वर्षीय भाई, जिन्हें अब एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर के नाम से जाना जाता है, की गिरफ्तारी से कितनी बड़ी समस्या खड़ी हो गई है. उन्हें 11 घंटे तक हिरासत में रखा गया और फिर जांच के तहत रिहा कर दिया गया, जिसका अर्थ है कि उन पर न तो कोई आरोप लगाया गया और न ही उन्हें बरी किया गया. यह घटना इतनी अभूतपूर्व थी कि टिप्पणीकारों को इसकी तुलना करने के लिए 1640 के दशक में हुए अंग्रेजी गृहयुद्ध के दौरान राजा चार्ल्स प्रथम की गिरफ्तारी और फांसी की घटना का सहारा लेना पड़ा.

1936 का स्कैंडल
सार्वजनिक पद पर कदाचार के संदेह में माउंटबेटन-विंडसर की गिरफ्तारी, 1936 में एडवर्ड अष्टम द्वारा एक अमेरिकी तलाकशुदा महिला, वालिस सिम्पसन से शादी करने के लिए पदत्याग करने के बाद से राजशाही के लिए सबसे बड़ा संकट साबित हो रही है. उस स्कैंडल ने राजशाही के प्रति जनता के समर्थन को कमजोर कर दिया, जिसे पूरी तरह से उबरने में 15 साल लग गए. यह बदलाव तभी आया जब एडवर्ड के उत्तराधिकारी, राजा जॉर्ज VI ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटेन छोड़कर भागने से इनकार कर दिया, जिससे नाजी बमों से तबाह देश के प्रति उनके प्रेम को जनता ने देखा. सिंहासन पर बैठने से पहले ही, महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए सार्वजनिक रूप से ब्रिटेन की सेवा में अपना जीवन समर्पित करने का संकल्प लिया. हालांकि एडवर्ड के पदत्याग का प्रभाव वर्षों तक बना रहा, लेकिन संकट कुछ ही दिनों में चरम पर पहुंच गया. उस मामले में समाधान अपेक्षाकृत सरल था: एडवर्ड ने पद छोड़ दिया, और उनके सबसे बड़े भाई ने उनका स्थान ग्रहण कर लिया. इसके विपरीत, माउंटबेटन-विंडसर से जुड़ा नाटक अभी भी जारी है, और इसका कोई अंत नजर नहीं आ रहा है.
मौजूदा संकट
मौजूदा संकट पूर्व राजकुमार और एपस्टीन के बीच संबंधों के खुलासे से उपजा है, जिसका खुलासा तब हुआ जब अमेरिकी न्याय विभाग ने पिछले महीने एपस्टीन की जांच से जुड़े लाखों पन्नों के दस्तावेज जारी किए. पुलिस ने पहले उन रिपोर्टों का हवाला दिया था, जिनमें कहा गया था कि माउंटबेटन-विंडसर ने 2010 में एपस्टीन को व्यापारिक जानकारी भेजी थी, जब पूर्व राजकुमार ब्रिटेन के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के विशेष दूत थे. ब्रिटेन की कम से कम आठ पुलिस बलों ने कहा है कि वे दस्तावेजों से उठे मुद्दों की जांच कर रहे हैं.

डायना स्कैंडल
"आफ्टर एलिजाबेथ: कैन द मोनार्की सेव इटसेल्फ?" पुस्तक के लेखक एड ओवेन्स ने कहा, "पिछले शाही स्कैंडल्स की तुलना में, इस बार कोई स्पष्ट रास्ता नजर नहीं आता है. राजशाही और उससे जुड़े संगठन इन आरोपों से कैसे निपटेंगे, इस बारे में कोई तय योजना नहीं है." राजशाही को आखिरी बार इस तरह के सवालों का सामना तब करना पड़ा था, जब चार्ल्स की पूर्व पत्नी राजकुमारी डायना का निधन हो गया था. एलिजाबेथ और चार्ल्स की आलोचना की गई थी, क्योंकि उन्होंने जनता के शोक की लहर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी. हजारों लोग दिवंगत राजकुमारी के घर के बाहर फूल चढ़ाने के लिए केंसिंग्टन गार्डन में उमड़ पड़े थे. कुछ लोगों ने तो चार्ल्स से सिंहासन के उत्तराधिकारी के रूप में अपने बेटे विलियम के पक्ष में पद छोड़ने की मांग भी की थी. बाद में महारानी ने जनता की मनोदशा को बेहतर ढंग से समझने और यह पता लगाने के लिए फोकस ग्रुप गठित किए कि लोग उस व्यक्ति के बारे में इतना भावुक क्यों थे, जिससे वे कभी मिले भी नहीं थे. इस संकट ने शाही परिवार को यह स्वीकार करने पर मजबूर कर दिया कि डायना के सरल स्वभाव ने लोगों को उन तरीकों से जोड़ा था, जो विंडसर परिवार को पहले कभी समझ में नहीं आए थे.
सवाल तो होंगे
इन अनुभवों ने डायना के बेटों, राजकुमार विलियम और हैरी सहित अन्य शाही सदस्यों को अधिक अनौपचारिक और सुलभ होने के लिए प्रेरित किया है. लेकिन यह समय अलग है, आंशिक रूप से इसलिए क्योंकि यह तेजी से बदलते मीडिया परिवेश में ऐसे समय में हो रहा है जब लोग अपने नेताओं से पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं. परिवार के सदस्यों को माउंटबेटन-विंडसर की गतिविधियों के बारे में क्या पता था? ये सवाल तो राजपरिवार से होंगे ही. राजमहल ने पूर्व राजकुमार को उनके सभी खिताबों से वंचित करके, जिनमें राजकुमार कहलाने का अधिकार भी शामिल है, उन्हें राजशाही से अलग करने की कोशिश की है. पूर्व राजकुमार के लिए एक और झटका यह है कि ब्रिटिश सरकार उन्हें औपचारिक रूप से सिंहासन के उत्तराधिकार क्रम से हटाने पर विचार कर रही है. अपना दर्जा और सम्मान खोने के बावजूद, एंड्रयू सिंहासन के उत्तराधिकार क्रम में आठवें स्थान पर हैं. इसे केवल कानून बनाकर ही बदला जा सकता है.

राजपरिवार से पूछताछ हुई तो...
लंदन विश्वविद्यालय के रॉयल हॉलोवे में राजशाही विशेषज्ञ क्रेग प्रेस्कॉट ने कहा, "चार्ल्स पहले ऐसे सम्राट हैं, जिन्हें सार्वजनिक जीवन में हमारी अपेक्षाओं पर खरा उतरना होगा, यानी जवाबदेह होना और अपने कार्यों की व्याख्या करना होगा. आपको हमेशा जनता का समर्थन हासिल करने के लिए मेहनत करनी पड़ती है और यह एक विशेष चुनौती है जब आप एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर जैसे विवाद का सामना कर रहे हों." आलोचकों का तर्क है कि राजशाही ने दबाव पर प्रतिक्रिया देने में देरी की, जबकि माउंटबेटन-विंडसर के एपस्टीन से संबंधों पर एक दशक से अधिक समय से चर्चा हो रही है. बीबीसी के पूर्व राज संवाददाता पीटर हंट के अनुसार, राजशाही के लिए सबसे अच्छा परिणाम यह होगा कि पुलिस जांच केवल एपस्टीन फाइलों में मौजूद जानकारी और माउंटबेटन-विंडसर से उसके संबंध पर केंद्रित हो. सबसे बुरा परिणाम यह होगा कि पुलिस अपनी जांच का दायरा बढ़ाकर यह पता लगाए कि राजपरिवार को ये सब कबसे और कैसे पता था. हंट ने बीबीसी पर कहा, "क्या उन 10 वर्षों में व्यापार दूत के रूप में उनके व्यवहार पर सवाल उठाए गए थे? क्या उनका जवाब दिया गया था?
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