आने वाले दिनों में युद्ध सिर्फ जमीन, आसमान या समंदर में नहीं, बल्कि बादलों और बारिश के लिए भी लड़े जा सकते हैं. दुनिया इस समय भीषण जलवायु संकट से जूझ रही है, लेकिन कुछ देश इस संकट का समाधान खोजने के बजाय मौसम को ही अपना गुलाम बनाने की होड़ में लग गए हैं.
इस रेस में चीन ने तो सारी हदें ही पार कर दी हैं. चीन की इन हरकतों ने भारत सहित दुनिया के तमाम देशों की चिंता बढ़ा दी है. विशेषज्ञों को डर है कि भविष्य में मौसम पर कब्जे की यह तकनीक देशों के बीच भू-राजनीतिक दबाव और बड़े संघर्षों का नया जरिया बन सकती है.
चीन का 'स्काई रिवर' प्रोजेक्ट: आखिर क्या है यह आफत?
चीन बड़े पैमाने पर मौसम के साथ छेड़छाड़ करने की तकनीकों पर काम कर रहा है. इसमें सबसे ज्यादा चर्चा चीन की महत्वाकांक्षी और विशालकाय परियोजना 'स्काई रिवर' की हो रही है.
इस प्रोजेक्ट के तहत चीन कृत्रिम रूप से बादलों का रुख मोड़ने और बड़े पैमाने पर बारिश कराने की तकनीक विकसित कर रहा है. इसके लिए तिब्बत के पठार जैसे इलाकों में हजारों बर्निंग चैंबर लगाए जा रहे हैं, जो हवा में सिल्वर आयोडाइड छोड़ते हैं. इससे मानसून की हवाओं का रुख बदल जाता है और बादलों को उस इलाके में बरसने के लिए मजबूर किया जाता है, जहां चीन चाहता है.
भारत समेत पड़ोसी देशों पर मंडरा रहा है खतरा
चीन की इस 'मौसम चोरी' की सनक का सबसे बड़ा खामियाजा उसके पड़ोसी देशों, खासकर भारत को भुगतना पड़ सकता है. इस तकनीक के कारण सीमा-पार सुरक्षा और पर्यावरण को लेकर गंभीर जोखिम पैदा हो गए हैं.
अगर चीन ने युद्ध या तनाव की स्थिति में सीमा के पास अचानक भारी कृत्रिम बारिश करा दी, तो भारतीय नदियों में अचानक विनाशकारी बाढ़ आ सकती है. ब्रह्मपुत्र जैसी प्रमुख नदियां तिब्बत से होकर भारत में आती हैं. मौसम के इस चक्र में बदलाव से इन नदियों के जलस्तर पर बहुत बुरा असर पड़ेगा.
भू-राजनीतिक हथियार बनता मौसम
वैश्विक विचार मंचों और पर्यावरणविदों का मानना है कि मौसम को नियंत्रित करने की तकनीक अब सिर्फ विज्ञान का प्रयोग नहीं रह गई है. यह एक खतरनाक भू-राजनीतिक हथियार बनती जा रही है.
चीन की इन हरकतों पर लगाम लगाने के लिए फिलहाल कोई सख्त अंतरराष्ट्रीय कानून या संधि नहीं है, जिसका फायदा उठाकर वह तेजी से इस दिशा में आगे बढ़ रहा है.
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