- चीन ने हाइपरसोनिक मिसाइलों के लिए तारों पर आधारित नेविगेशन सिस्टम विकसित किया है जो GPS फेल होने पर काम करेगा
- इस तकनीक से मिसाइलें ध्वनि की रफ्तार से पांच गुना अधिक गति पर भी तारों की सहायता से दिशा पहचान सकेंगी
- वैज्ञानिकों ने कंप्यूटर सॉफ्टवेयर, स्टार सेंसर बनाया जो तेज गति में भी तारों के पैटर्न को सटीक पहचान सकता है
मान लीजिए की चीन की हाइपरसोनिक मिसाइल ध्वनि की रफ्तार से भी 5 गुना तेज उड़ान भर रही है. ऐसे में दुश्मन देश ने उसका GPS जाम कर दिया. अब उसे रास्ता कौन बताएगा? बिना किसी गाइडेंस वह मिसाइल कहां जाकर फटेगी? चीन इसका जवाब आसमान के तारों में ढूंढ लिया है. चीनी वैज्ञानिकों ने ऐसी टेक्नोलॉजी बना ली हैं, जिसमें GPS और BeiDou जैसे सैटेलाइट सिस्टम काम न करने पर मिसाइल तारों को देखकर अपनी दिशा और जगह पहचान सकेगी. वैसे इतनी तेज रफ्तार में यह काम बेहद मुश्किल है. लेकिन चीन के वैज्ञानिकों ने राह के उस पत्थर को भी पार कर लिया है.
चीनी मिसाइलों को रास्ता दिखाएंगे तारें
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार चीन की ग्वांगडोंग एयरोस्पेस रिसर्च एकेडमी की अगुवाई वाले एक प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल गई है. इस प्रोजेक्ट से चीन के हाइपरसोनिक हथियार सैटेलाइट सिस्टम के जाम होने या फेल होने पर रास्ता खोजने के लिए तारों का इस्तेमाल कर सकते हैं. एकेडमी की 10 अगस्त को छपी रिपोर्ट के मुताबिक, रिसर्चर्स ने तारों पर आधारित नेविगेशन सिस्टम बनाने की चुनौती को हल करने का काम शुरू किया, जो हाइपरसोनिक उड़ान की बहुत ज़्यादा स्पीड, मैक 5 (ध्वनि की रफ्तार का 5 गुना) और उससे ज्यादा पर काम कर सके.
क्यों मुश्किल है तारों को गाइड बनाना?
आज के दौर में हाइपरसोनिक हथियार किसी भी देश की सैन्य ताकत के लिए अहम रणनीतिक हथियार हैं. वजह है कि इन्हें रोकना मुश्किल होता है. दूसरी तरफ आम तौर पर उन्हें ऐसे नेविगेशन सिस्टम की जरूरत होती है जो पूरी तरह से खुद काम करने वाले और सटीक हों. लेकिन अगर जंग की स्थिति में GPS ही जाम हो जाए तो फिर क्या होगा. चीन के वैज्ञानिकों ने कहा कि क्यों नहीं हम तारों की मदद लें. याद कीजिए कि कंपास की खोज से पहले, नाविक आसमान में ध्रुव तारे को देखकर दिशा की पहचान करते थे और यात्रा करते थे.
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गैस की यह असमान और तेजी से चलने वाली परत फ्रॉस्टेड ग्लास की तरह काम करती है, जो अपने से गुजरने वाली तारों की रोशनी को मोड़ देती है और साथ ही तेज इन्फ्रारेड रेडिएशन छोड़ती है. यह रेडिएशन एक तेज टॉर्च की तरह काम करता है, जो तारों की हल्की रोशनी को दबा देता है और सेंसर के लिए तारों के बिंदुओं का पता लगाना मुश्किल बना देता है. यानी जब तारे दिखेंगे ही नहीं तो उनकी मदद से ये मिसाइलें अपना रास्ता कैसे खोजेंगी? जवाब चीन के वैज्ञानिकों ने निकाला है. वैज्ञानिकों ने गर्म हवा से निकलने वाली रोशनी और उससे पैदा होने वाली रुकावट का डेटा जुटाकर खास कंप्यूटर सॉफ्टवेयर बनाया, जिससे यह पता लगाया जा सके कि तेज गति से उड़ते विमान के आसपास हवा की वजह से तारों की रोशनी कैसे मुड़ती है. इसके आधार पर उन्होंने ऐसा स्टार सेंसर बनाया, जो इस रुकावट के बावजूद तारों को पहचान सके. टेस्ट में बिना किसी रुकावट के इस सेंसर ने 99% से ज्यादा बार तारों के पैटर्न को सही पहचाना है.
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