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चीन ने बनाया कभी न टूटने वाला हीरा! हथौड़े की तेज चोट भी क्यों हो जाती है बेअसर?

चीन के वैज्ञानिकों ने हीरे के बेहद बारीक पाउडर और कार्बन नैनोट्यूब्स को कुछ ऐसे मिलाया है कि इससे अटूट डायमंड बन गए हैं. जानिए क्यों खास है यह रिसर्च.

चीन ने बनाया कभी न टूटने वाला हीरा! हथौड़े की तेज चोट भी क्यों हो जाती है बेअसर?
China unbreakable Diamond: चीन ने बनाया कभी न टूटने वाला हीरा (प्रतिकात्मक फोटो)

हीरा दुनिया में मिलने वाला सबसे कठोर प्राकृतिक यानी नेचुरल चीज माना जाता है. लेकिन इसकी एक बड़ी कमजोरी भी है. यह बेहद सख्त होने के बावजूद कांच की तरह भंगुर होता है. यह तेज चोट लगने पर टूटकर बिखर सकता है. अब चीन के वैज्ञानिकों ने इसी कमजोरी को दूर करने का दावा किया है. उन्होंने ऐसा हीरा तैयार किया है, जिसकी कठोरता पहले जैसी ही बनी रहती है, लेकिन उसकी टूटने से बचने की क्षमता करीब छह गुना बढ़ जाती है. चीन के इन वैज्ञानिकों का दावा है कि यह नया पदार्थ इतना मजबूत है कि हथौड़े की तेज चोट भी इसे तोड़ नहीं सकती.

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार इस रिसर्च को को पीयर-रिव्यू जर्नल नेचर सिंथेसिस में छापा गया है. इस रिसर्च चीन के चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज के इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिक्स और बेइहांग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने अंजाम दिया है. रिसर्च पेपर 9 जुलाई को ऑनलाइन प्रकाशित हुआ था.

हीरा अब नहीं टूटेगा! कैसे किया कमजोरी को दूर?

हीरे को मजबूत बनाने की कोशिश लंबे समय से होती रही है. समस्या यह थी कि उसकी एक खूबी बढ़ाने पर दूसरी कम हो जाती थी. यानी अगर हीरे को टूटने से बचाने की क्षमता बढ़ाई जाती, तो उसका असाधारण कठोरता वाला गुण कमजोर पड़ने लगता था. इंडस्ट्रियल इस्तेमाल में यह संतुलन खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि हीरे का इस्तेमाल काटने और पॉलिश करने वाले औजारों में होता है.

चीनी वैज्ञानिकों ने इस समस्या का एक अलग तरीका खोजा. रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने हीरे के अंदर एक बेहद मजबूत सहारा देने वाला ढांचा तैयार किया. इसके लिए उन्होंने मल्टी-वॉल्ड कार्बन नैनोट्यूब्स का इस्तेमाल किया. ये कार्बन से बने बेहद पतले, लेकिन बहुत मजबूत रेशे जैसे ढांचे होते हैं. इनकी मोटाई इंसान के बाल की चौड़ाई की करीब 10,000वीं हिस्से जितनी होती है, लेकिन ये स्टील से दर्जनों गुना ज्यादा मजबूत हो सकते हैं.

वैज्ञानिकों ने हीरे का बेहद बारीक पाउडर और नैनोट्यूब्स अच्छी तरह मिलाए. इसके बाद इस मिश्रण को 2,000 डिग्री सेल्सियस तापमान और 15 गीगापास्कल के दबाव (प्रेशर) में रखा गया. यह दबाव सामान्य वायुमंडलीय दबाव से करीब 1.5 लाख गुना ज्यादा है. इस दबाव को बेहद सावधानी से चुना गया. इतना कि दोनों पदार्थ मजबूती से जुड़ जाएं, लेकिन इतना ज्यादा नहीं कि कार्बन नैनोट्यूब्स खुद हीरा बन जाएं. वहीं दबाव बहुत कम होने पर पाउडर ग्रेफाइट में बदल सकता था.

नतीजे में नैनोट्यूब्स अपनी रेशेदार शक्ल में बने रहे और उन्होंने हीरे के साथ परमाणु स्तर पर मजबूत केमिकल बॉन्ड बना लिया. रिसर्च के मुताबिक, ये नैनोट्यूब्स सीमेंट में इस्तेमाल होने वाली लोहे की सरियों की तरह काम करते हैं. वे हीरे के दानों के बीच एक लगातार 3D जाल बनाते हैं, जबकि हीरे के दाने भी सीधे एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं. कमाल की बात है कि इन वैज्ञानिकों का दावा है कि तैयार किया गया यह पदार्थ आर्मर-पियर्सिंग यानी कवच भेदने वाली गोलियों में इस्तेमाल होने वाले टंगस्टन मिश्रधातुओं से भी ज्यादा मजबूत है.

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