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घाटे में कंपनियां, 13% घटा एक्सपोर्ट...भारत की 'सोलर एनर्जी' की चमक से चीन को चपत

चीनी सोशल मीडिया पर भारत के सोलर बूम की तारीफ हो रही है. चीनी लोग इस बात को लेकर भी घबराए हैं कि भारत ने कैसे चीन की सोलर मैनुफैक्चरिंग में सेंध लगा दी.

घाटे में कंपनियां, 13% घटा एक्सपोर्ट...भारत की 'सोलर एनर्जी' की चमक से चीन को चपत
सोलर मैनुफैक्चरिंग में चीन को भारत से सीधी चुनौती मिल रही है.
AFP
नई दिल्ली:

सोलर मैनुफैक्चरिंग में एक समय चीन का दबदबा हुआ करता था. अभी भी है लेकिन इस दबदबे को अब भारत से सीधी चुनौती मिल रही है. सोलर मैनुफैक्चरिंग में जितनी तेजी से भारत आगे बढ़ रहा है, उसने चीन को हिलाकर रख दिया है. 

चीनियों की सोशल मीडिया पोस्ट में यह डर साफ दिखाई पड़ता है. सोशल मीडिया पर चीन के लोग मीम बनाते हुए लिख रहे हैं कि भारत ने चीन के सोलर किले के अंदर सेंध लगा दी है. चीनी यूजर्स इंटरनेट पर भारत की बढ़ती सोलर मैनुफैक्चरिंग पर बहस कर रहे हैं.

चीन की सोशल मीडिया में जो जो बहस हो रही है, उसके स्क्रीनशॉट यहां भी वायरल हो रहे हैं और ये दिखा रहे हैं कि कैसे भारत सोलर मैनुफैक्चरिंग में चीन को सीधी टक्कर दे रहा है.

क्या कह रहे हैं चीन के लोग?

चीन तो पहले ही भारत सी बढ़ती सोलर मैनुफैक्चरिंग से घबराया हुआ था. तभी तो पिछले साल दिसंबर में उसने वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (WTO) में भारत की शिकायत की थी और आरोप लगाया था कि भारत सोलर सब्सिडी दे रहा है, जिससे चीन को नुकसान पहुंच रहा है.

लेकिन अब ये घबराहट चीन के लोगों में साफ दिखने लगी है. X पर एक यूजर ने चीनी सोशल मीडिया की पोस्ट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा, 'भारत के सोलर बूम के बारे में पोस्ट चीनी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. भारत ने चीन के फोटोवोल्टिक (सोलर पैनल) के किले में सेंध लगा दी है.'

एक पोस्ट में बताया गया कि 2018 के बाद से भारत में सोलर कंपोनेंट मैनुफैक्चरिंग में 17 गुना की बढ़ोतरी हुई है और इससे चीनी कंपनियों को नुकसान हो रहा है. 

एक यूजर ने X पर अपनी पोस्ट में लिखा, 'कभी नहीं सोचा था कि यह दिन आएगा. चीनी नेटिजन्स 2018 के बाद से भारतीय सोलर कंपोनेंट मैनुफैक्चरिंग में 17 गुना बढ़ोतरी और इससे टॉप चीनी सोलर कंपनियों को हो रहे भारी नुकसान की शिकायत कर रहे हैं.'

भारत की बढ़ती सोलर मैनुफैक्चरिंग की तुलना 'चीन के स्टालिनग्राद' से की जा रही है. स्टालिनग्राद असल में वह जगह है, जहां दूसरे विश्व युद्ध के दौरान सोवियत सेना ने जर्मन सेना को घेरकर हरा दिया था और इसे युद्ध का टर्निंग पॉइंट माना जाता है, क्योंकि इसके बाद ही हिटलर की हार हो गई थी. आज के समय में 'स्टालिनग्राद' का इस्तेमाल तब किया जाता है, जब किसी मजबूत प्रतिद्वंद्वी को पहली बड़ी चुनौती या बड़ा झटका लगता है.

एक यूजर ने लिखा, 'चीन कैसे भारतीय मैनुफैक्चरिंग को खत्म कर रहा है से लेकर भारतीय मैनुफैक्चरिंग के कारण चीनी कंपनियां नुकसान में हैं. पीएम मोदी के नेतृत्व में हमने लंबा सफर तय किया है.'

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चीन कितना बड़ा 'सोलर किंग' है?

सोलर इंडस्ट्री के लिए जिन-जिन चीजों की जरूरत है, उन सभी की मैनुफैक्चरिंग में चीन का दबदबा है. इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के मुताबिक, ग्लोबल सोलर मैनुफैक्चरिंग में चीन की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत से ज्यादा है.

सोलर इंडस्ट्री में पॉलिसिलिकॉन, वेफर्स, सेल्स और मॉड्यूल की जरूरत पड़ती है और इन सभी की मैनुफैक्चरिंग में चीन बादशाह है. 

IEA का डेटा बताता है कि मॉड्यूल्स की मैनुफैक्चरिंग में चीन की हिस्सेदारी 74.7%, सेल्स में 85.1%, वेफर्स में 96.8% और पॉलिसिलिकॉन में 79.4% की हिस्सेदारी है. ये आंकड़े दिखाते हैं कि सोलर मैनुफैक्चरिंग और सप्लाई चेन में चीन की कितनी मजबूत पकड़ है.

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IEA के मुताबिक, पिछले दशक में सोलर इंडस्ट्री में चीन की क्षमता यूरोप, जापान और अमेरिका की तुलना में कहीं ज्यादा बढ़ी है. चीन ने इस सेक्टर में 50 अरब डॉलर से ज्यादा की रकम लगाई है, जो यूरोप के निवेश से 10 गुना ज्यादा है. इतना ही नहीं, 2011 से अब तक इस इंडस्ट्री में चीन ने 3 लाख से ज्यााद नौकरियां भी पैदा की हैं.

आज के समय में सोलर इक्विपमेंट सप्लाई करने वाली दुनिया की टॉप-10 कंपनियां चीन में ही हैं. IEA का कहना है कि चीन सस्ते में इन्हें बना रहा है, जिस कारण दुनियाभर में इसकी लागत कम हुई है और क्लीन एनर्जी की ओर बढ़ने में फायदे पहुंचे हैं.

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भारत ने कैसे लगाई चीन के किले में सेंध?

सोलर मैनुफैक्चरिंग में चीन के किले में अगर किसी ने सेंध लगाई है तो वह है- भारत. 2018 तक भारत में हर साल 10 गीगावॉट से कम सोलर पैनल बनते थे लेकिन अब ये कैपेसिटी बढ़कर 172 GW तक पहुंच गई है. यानी, लगभग 17 गुना.

केंद्र सरकार के मुताबिक, अब भारत 274.68 GW की इंस्टॉल्ड रिन्यूएबल एनर्जी कैपेसिटी के साथ दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है. इसमें 150 GW से ज्यादा सोलर कैपेसिटी शामिल है. पहले नंबर पर चीन और दूसरे पर अमेरिका है.

सोलर मैनुफैक्चरिंग को बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने तीन बड़े कदम उठाए हैं. पहला- PLI स्कीम के जरिए कंपनियों को फैक्ट्री बनाने के लिए इंसेंटिव दिया. दूसरा- विदेशी पैनल पर 25 से 40% इंपोर्ट टैक्स लगाया. और तीसरा- सरकारी सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए सिर्फ भारतीय मैनुफैक्चरर्स से ही सामान खरीदने की शर्त रखी.

भारत की मैनुफैक्चरिंग क्षमता बढ़ने से चीन से इंपोर्ट काफी कम हो गया है. 2020 में चीन से सोलर मॉड्यूल का इंपोर्ट 8.2 GW था, जो 2025 में घटकर 2.1 GW हो गया.

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रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन का सोलर एक्सपोर्ट लगातार दो साल से घट रहा है. जनवरी से अक्टूबर 2025 के बीच यह सालाना आधार पर 13.2% घटकर 24.42 अरब डॉलर रह गया. इसके लिए भारत बड़ी वजह है. तभी दिसंबर 2025 में चीन ने WTO में भारत की शिकायत की थी. चीन ने आरोप लगाया था कि भारत सब्सिडी और टैरिफ के जरिए अपने मैनुफैक्चरर्स को अनुचित लाभ पहुंचा रहा है, जिससे चीन के हितों को नुकसान पहुंच रहा है.

इतना ही नहीं, चीन की सोलर इंडस्ट्री से जुड़ी कंपनियों को भी अब भारी घाटा उठाना पड़ा रहा है. चीनी मीडिया के मुताबिक, 2025 में चीन की 15 बड़ी कंपनियों में से 11 को लगभग 50 अरब युआन का नुकसान हुआ था. भारतीय करंसी में यह रकम 70 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा होती है.

चीन की टॉप-5 कंपनियां- TCL झोंगहुआन, जिंको सोलर, लॉन्गी ग्रीन एनर्जी, JA सोलर और ट्रिना सोलर को ही 28.9 अरब युआन (लगभग 41 हजार करोड़ रुपये) का घाटा हुआ था. भारत से मिल रही चुनौतियों के कारण चीन की कंपनियां लगातार 2 साल से बड़े घाटे से जूझ रही हैं. 

भारत का निश्चित तौर पर फायदा मिल रहा है लेकिन सोलर कंपोनेंट में इंपोर्ट पर निर्भरता भी कम करना जरूरी है. सोलर पैनल बनाने के लिए जो कंपोनेंट लगते हैं, उनमें से ज्यादातर अभी इंपोर्ट किए जा रहे हैं. इसलिए अब सरकार इन कंपोनेंट की मैनुफैक्चरिंग बढ़ाने पर भी जो र दे रही है.

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