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एक पिता की मदद के लिए चीन में जमा हो गए हजारों लोग, सोशल मीडिया ने दिखाया इंसानियत जिंदा है

चीन में जब 20 साल की युवती को लगा कि उसके पिता अब इतने बुज़ुर्ग हो गए हैं कि चीनी नए साल से पहले होने वाले पारंपरिक सामुदायिक भोज के लिए दो सूअर खुद नहीं काट पाएंगे, तो उसने सोशल मीडिया का सहारा लिया.

एक पिता की मदद के लिए चीन में जमा हो गए हजारों लोग, सोशल मीडिया ने दिखाया इंसानियत जिंदा है
चीन में एक पिता की मदद करने हजारों लोग आ गए (स्क्रीनशॉट)
  • चीन के किंगफू गांव की 20 वर्षीय दाइदाइ ने सोशल मीडिया पर अपने बुजुर्ग पिता की मदद के लिए अपील की थी
  • सोशल मीडिया पर दाइदाइ की पोस्ट को दस लाख से अधिक लाइक्स मिले और हजारों लोग गांव मदद के लिए पहुंचे
  • गांव में सूअर काटकर पारंपरिक सामुदायिक भोज का आयोजन हुआ, जिसे एक लाख से अधिक लोग ऑनलाइन लाइव देखे
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कभी कभी दुनिया के किसी और हिस्से में ऐसा वाकया होता है, जिसे सुनकर हमें फिर से यकीन हो जाता है कि भले इंसानियत कमजोर हो रही हो, लेकिन यह अभी भी जिंदा है. भारत से हजारों किलोमीटर दूर चीन में यही हुआ है. यहां एक 20 साल की लड़की की गुहार पर हजारों लोग पहुंच गए. दरअसल दाइदाइ नाम की इस युवती को जब लगा कि उसके पिता अब इतने बुज़ुर्ग हो गए हैं कि चीनी नए साल से पहले होने वाले पारंपरिक सामुदायिक भोज के लिए दो सूअर खुद नहीं काट पाएंगे, तो उसने सोशल मीडिया का सहारा लिया. वह नहीं चाहती थीं कि उसके पिता को बुरा लगे.

पिछले हफ्ते के आखिर में दाइदाइ में चीन के टिकटॉक जैसे ऐप डोयिन पर लिखा, “क्या कोई मेरी मदद कर सकता है? मेरे पिता बूढ़े हो गए हैं. मुझे डर है कि वह इन सूअरों को संभाल नहीं पाएंगे.” उसने वादा किया कि जो लोग उसके गांव किंगफू आकर मदद करेंगे, उन्हें सूअर के मांस का पारंपरिक भोज कराया जाएगा. दाइदाइ ने कहा, “मैं चाहती हूं कि मैं अपने गांव में गर्व से सिर उठा सकूं.”

और फिर सोशल मीडिया ने अपना कमाल दिखा दिया

दाइदाइ की यह अपील सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से फैल गई. इसे 10 लाख से ज्यादा लाइक्स मिले. जो हुआ, वह किसी शानदार फिल्म की कहानी जैसा था. हजारों गाड़ियां गांव की ओर चल पड़ीं, जिनमें जरूरत से कहीं ज्यादा लोग थे. इतने लोग आ गए कि दक्षिण-पश्चिम चीन के ग्रामीण चोंगछिंग इलाके की सड़कें जाम हो गईं. ड्रोन तस्वीरों में दिखा कि दोनों ओर धान के खेत हैं और बीच में गाड़ियों की लंबी कतारें गांव में घुसने का इंतजार कर रही हैं. कुछ लोग ट्रैफिक से बचने के लिए कई किलोमीटर पैदल भी चले.

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार एक व्यक्ति, जो 100 किलोमीटर से ज्यादा दूर से आया था, उसने कहा, “माहौल बहुत अच्छा था. इससे मुझे अपना बचपन याद आ गया, जब हमारे घर भी सूअर पाले जाते थे. बरसों बाद ऐसा महसूस हुआ.”

जब सूअर काटने और उसके बाद सामूहिक भोज हुआ, तो इसे ऑनलाइन लाइव देखा गया. एक लाख से ज्यादा लोग लाइव जुड़े और करीब 2 करोड़ लाइक्स मिले. स्थानीय सरकार ने भी इसे अचानक बढ़े पर्यटन के मौके के रूप में अपनाया. दो सूअर इतने लोगों के लिए काफी नहीं थे, इसलिए पर्यटन विभाग ने और सूअर दान किए. आसपास के छोटे ढाबों और रेस्टोरेंट्स ने भी बाहर कुर्सियां लगाकर लोगों को खाना परोस.

यह घटना दिखाती है कि सोशल मीडिया के दौर में एक छोटी सी बात कितनी जल्दी बहुत बड़ी बन सकती है. यह भोज दो दिन तक चला। 11 जनवरी को करीब 1,000 लोग आए, अगले दिन यह संख्या 2,000 हो गई. रात में अलाव जले, संगीत बजा और जमकर जश्न हुआ. आखिर में दाइदाइ ने पोस्ट कर बताया कि उनका आयोजन खत्म हो गया है. उसने लोगों से कहा कि वे इलाके का आनंद लें, लेकिन अब उनके घर न आएं. दो दिन में सिर्फ चार घंटे सोने के बाद वह बहुत थक गई थीं. अब कहा जा रहा है कि गांव में यह आयोजन हर साल स्थानीय प्रशासन करवाएगा.

(इनपुट -बीबीसी)

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