- स्पेन की पुलिस ने 16 साल के रोमानियाई लड़के को KillSec हैकिंग ग्रुप के मुख्य ऑपरेटर के रूप में गिरफ्तार किया
- KillSec ग्रुप ने दो सालों में लगभग एक हजार रैंसमवेयर हमलों के जरिए यूरोप में अपराध किए थे
- इस हैकिंग ग्रुप ने कंपनियों की संवेदनशील जानकारी चुराकर उसे सार्वजनिक करने की धमकी देकर फिरौती वसूली थी
जिस उम्र में बच्चे वीडियो गेम खेलने का शौक रखते हैं, कोई नया हुनर जिंदगी भर के लिए अपना लेते हैं या फिर थोड़ी-बहुत बदमाशी करते हैं, उस उम्र का एक ऐसा बच्चा भी है जिसने पूरे यूरोप की नाक में दम कर दिया था. मात्र 16 साल का यह बच्चा खतरनाक हैंकिंग ग्रुप का लीडर था. बच्चे जिस उम्र में बहुत शैतान होने
पर एक क्लास बंक कर लेते हैं, उस उम्र में यह बच्चा हैंकिग के जरिए ब्लैकमेल करके पैसा उगाही करता था. अब यह बच्चा पुलिस की गिरफ्त में है.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार स्पेन की पुलिस ने गुरुवार, 1 अक्टूबर को बताया कि उन्होंने 'KillSec' नाम के हैकर ग्रुप के मुख्य ऑपरेटर माने जा रहे 16 साल के एक लड़के को गिरफ्तार किया है. यह गिरफ्तारी दो साल में हुए लगभग 1,000 रैंसमवेयर हमलों की यूरोप-भर में चल रही जांच के तहत की गई है. स्पेन की पुलिस ने एक बयान में कहा कि स्पेन के एलिकांटे शहर में गिरफ्तार किया गया यह लड़का रोमानिया का नागरिक है.
खतरनाक है 16 साल के बच्चे का बनाया हैकिंग ग्रूप
यूरोपियन यूनियन की कानून लागू करने वाली एजेंसी, यूरोपोल के एक प्रवक्ता ने कहा कि 16 साल के इस लड़के पर 'किलसेक' नाम के इस हैकिंग ग्रूप का 'एडमिनिस्ट्रेटर' होने का शक है. एडमिनिस्ट्रेटर यानी ग्रूप का हेड, क्या कब और कैसे किया जाएगा, वह यह बच्चा ही तय करता था. उसके अलावा पुलिस ने 20 से 30 साल की उम्र के दो और लोगों को गिरफ्तार किया है एक ब्रिटेन में और दूसरा रोमानिया में गिरफ्तार हुआ है. इसके अलावा एक चौथे व्यक्ति की भी पहचान की गई है, जो एक सॉफ्टवेयर डेवलपर है. अगस्त में वह 18 साल का हुआ था, लेकिन जब उसने कुछ अपराध किए गए थे, तब वह नाबालिग था. उसे अभी गिरफ्तार नहीं किया गया है.
कैसे अंजाम देते थे अपराध?
यूरोपोल ने एक बयान में कहा कि इस हैकिंग ग्रूप ने कंपनियों की संवेदनशील जानकारी की कॉपी बनाने के लिए सॉफ्टवेयर की कमियों और खराब सुरक्षा वाले एक्सेस पॉइंट्स, खासकर क्लाउड स्टोरेज का फायदा उठाया. संवेदनशील जानकारी लेने के बाद हैकर्स ने संगठनों को धमकी दी कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो वे उनका डेटा सार्वजनिक कर देंगे. बयान में कहा गया कि इस ग्रुप ने फिरौती के तौर पर 2 साल में काफी रकम वसूली है.
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