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This Article is From Feb 24, 2026

कनाडा ने भारत के साथ संबंधों में बड़े बदलाव के संकेत दिए, PM कार्नी और मोदी की जोड़ी बन सकती है गेमचेंजर

भारत इस यात्रा का पहला और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव होगा, जो तनावपूर्ण और छूटे हुए अवसरों के दौर के बाद दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के साथ संबंधों को मजबूत करने के ओटावा के इरादे को रेखांकित करता है.

कनाडा ने भारत के साथ संबंधों में बड़े बदलाव के संकेत दिए, PM कार्नी और मोदी की जोड़ी बन सकती है गेमचेंजर
मार्क कार्नी की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के संबंधों में नई गर्माहट आ सकती है.
  • कनाडा भारत के साथ व्यापार, ऊर्जा, तकनीक, रक्षा और संस्कृति क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की योजना बना रहा है
  • भारत कनाडा का सातवां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और 2030 तक व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है
  • कनाडा वैश्विक सप्लाई चेन पुनर्गठन में भारत को आर्थिक विविधता और लचीलेपन के लिए महत्वपूर्ण साझेदार मानता है

कनाडा भारत के साथ संबंधों में निर्णायक बदलाव के संकेत दे रहा है. प्रधानमंत्री मार्क कार्नी भारत की अपनी पहली बड़ी विदेश यात्रा की तैयारी कर रहे हैं. इस यात्रा के तहत नई दिल्ली को एक व्यापक हिंद-प्रशांत रणनीति के केंद्र में रखा गया है, जिसका उद्देश्य व्यापार में विविधता लाना, निवेश आकर्षित करना और अस्थिर वैश्विक अर्थव्यवस्था में दीर्घकालिक साझेदारियों को मजबूत करना है.26 फरवरी से 7 मार्च तक भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान की अपनी आगामी यात्राओं की घोषणा करते हुए, प्रधानमंत्री कार्नी ने कहा कि कनाडा की नई सरकार तेजी से विभाजित और अनिश्चित होती दुनिया में "जिन चीजों पर हमारा नियंत्रण है" उन पर ध्यान केंद्रित कर रही है. उन्होंने जोर देकर कहा कि इस फोकस का अर्थ है घरेलू स्तर पर आर्थिक मजबूती लाना और साथ ही विदेशों में कनाडा के वैश्विक संबंधों का विस्तार और पुनर्संतुलन करना.

किन मामलों पर होगी बात

भारत इस यात्रा का पहला और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव होगा, जो तनावपूर्ण और छूटे हुए अवसरों के दौर के बाद दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के साथ संबंधों को मजबूत करने के ओटावा के इरादे को रेखांकित करता है. कार्नी मुंबई और नई दिल्ली की यात्रा करेंगे, जहां वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे और कनाडा-भारत संबंधों में एक महत्वाकांक्षी नए चरण की रूपरेखा तैयार करेंगे. बातचीत में व्यापार, ऊर्जा, टेक और AI, टैलेंट मोबिलिटी, संस्कृति और रक्षा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित होने की उम्मीद है. कार्नी भारतीय व्यापार जगत के नेताओं से सीधे बातचीत करेंगे और कनाडा को स्वच्छ ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों से लेकर उन्नत मैन्यूफैक्चरिंग और डिजिटल टेक्नोलॉजिज तक के क्षेत्रों में पूंजी निवेश के लिए एक स्थिर और अनुकूल गंतव्य के रूप में प्रस्तुत करेंगे.

भारत पहले से ही कनाडा का सातवां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, और 2024 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार 30.8 अरब डॉलर का था. दोनों सरकारों ने इससे भी अधिक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है: प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते के माध्यम से 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना से अधिक बढ़ाकर 70 अरब डॉलर करना शामिल है. पिछले वर्ष के जी20 नेताओं के शिखर सम्मेलन के बाद औपचारिक रूप से वार्ता शुरू की गई थी, और कार्नी की यात्रा से इन वार्ताओं को नई राजनीतिक गति मिलने की उम्मीद है.

अधिकारी खुश

अधिकारियों का कहना है कि भारत पर जोर देना केवल व्यापारिक आंकड़ों से कहीं अधिक है. जैसे-जैसे ग्लोबल चेन सप्लाई का पुनर्गठन हो रहा है और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तीव्र हो रही है, ओटावा नई दिल्ली को कनाडा के लिए अधिक लचीले और विविध आर्थिक भविष्य के निर्माण में एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देख रहा है. टेक्नोलॉजी, मैन्यूफैक्चरिंग और ग्लोबल व्यापार में भारत का बढ़ता प्रभाव, कुछ चुनिंदा बाजारों पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने के कनाडा के प्रयासों के साथ निकटता से मेल खाता है.

नयी साझेदारी की उम्मीद

एक वरिष्ठ सरकारी सूत्र ने कहा, “भारत एक शक्तिशाली अर्थव्यवस्था है और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक प्रमुख भूमिका निभाता है.इस साझेदारी को मजबूत करना कनाडा की दीर्घकालिक समृद्धि और सुरक्षा के लिए आवश्यक है.”

भारत से, कार्नी ऑस्ट्रेलिया की यात्रा करेंगे, जहां वे सिडनी और कैनबरा में प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज से मिलेंगे. वहां भी चर्चा रक्षा और समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों, व्यापार और एआई सहित उन्नत प्रौद्योगिकियों पर केंद्रित होगी. संबंधों की निकटता को दर्शाने वाले एक प्रतीकात्मक संकेत के रूप में, कार्नी ऑस्ट्रेलिया की संसद के दोनों सदनों को संबोधित करेंगे - लगभग दो दशकों में ऐसा करने वाले वे पहले कनाडाई प्रधानमंत्री होंगे.

यात्रा के अंतिम चरण में कार्नी टोक्यो में जापान के प्रधानमंत्री से मुलाकात करेंगे, जिसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत मैन्यूफैक्चरिंग, खाद्य सुरक्षा और रक्षा क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करना है. जापान एशिया में कनाडा के सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदारों में से एक है, जिसके साथ द्विपक्षीय व्यापार सालाना 36.4 अरब डॉलर का है.

नई हिंद-प्रशांत रणनीति

ये तीनों यात्राएं मिलकर सरकार द्वारा आर्थिक व्यावहारिकता और साझा हितों पर आधारित एक नई हिंद-प्रशांत रणनीति की रीढ़ बनती हैं. कार्नी ने कहा कि कनाडा के पास वह सब कुछ है, जो वैश्विक साझेदार तलाश रहे हैं: प्रचुर ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, अत्याधुनिक तकनीकी विशेषज्ञता और विश्व स्तरीय प्रतिभा. उन्होंने कहा, “अधिक अनिश्चित दुनिया में, कनाडा उन चीजों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिन पर हमारा नियंत्रण है. हम अपने व्यापार में विविधता ला रहे हैं और अपने श्रमिकों और व्यवसायों के लिए नए अवसर पैदा करने के लिए बड़े पैमाने पर नए निवेश को आकर्षित कर रहे हैं. हम घरेलू स्तर पर अधिक निश्चितता, सुरक्षा और समृद्धि लाने के लिए विदेशों में नई साझेदारियां बना रहे हैं.” भारत के लिए, यह दौरा एक स्पष्ट संकेत है कि ओटावा अतीत के मतभेदों को भुलाकर विश्वास के पुनर्निर्माण के लिए राजनीतिक और आर्थिक रूप से निवेश करने को तैयार है. जैसे-जैसे कनाडा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपने भविष्य के विकास को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, नई दिल्ली अब ओटावा के राजनयिक और आर्थिक एजेंडे में मजबूती से शीर्ष पर लौट आई है.

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