मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग ने पूरी दुनिया को संकट में डाल दिया है, लेकिन इस तबाही के बीच एक देश ऐसा भी है जिसकी लॉटरी लग गई है. वह देश है रूस. जहां एक तरफ दुनिया भर में तेल की सप्लाई रुकने से हाहाकार मचा है, वहीं रूस हर दिन करोड़ों डॉलर की एक्स्ट्रा कमाई कर रहा है. आखिर कैसे अमेरिका-इजरायल- ईरान युद्ध रूस के लिए वरदान साबित हो रहा है और इसका भारत पर क्या असर पड़ेगा. आइए जानते हैं...
रूस की चांदी, हर दिन हो रही $150 मिलियन की एक्स्ट्रा कमाई
ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस इस युद्ध में सीधे तौर पर शामिल नहीं है, लेकिन वह इसका असली बिनर बनकर उभर रहा है. द फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में बताया गया है कि तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से रूस को हर दिन लगभग 150 मिलियन डॉलर यानी करीब 1200 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई हो रही है. ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को बंद किए जाने से दुनिया भर के देश अब रूस की तरफ रुख कर रहे हैं.
रूस का कच्चा तेल हुआ महंगा, फिर भी मची है लूट
कुछ महीने पहले तक रूस का यूराल क्रूड (Urals Crude) $52 प्रति बैरल पर बिक रहा था, लेकिन अब इसकी कीमत उछलकर $70 से $80 प्रति बैरल तक पहुंच गई है. मिडिल ईस्ट युद्ध के शुरुआती 12 दिनों में ही रूस ने तेल निर्यात से करीब $1.3 बिलियन से $1.9 बिलियन का एक्स्ट्रा टैक्स रेवेन्यू कमा लिया है.
अगर ईरान का रुख ऐसा ही रहा, तो इस महीने के अंत तक रूस की यह एक्स्ट्रा कमाई $5 बिलियन यानी करीब 42,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है.
भारत और चीन ने बढ़ाया रूस पर भरोसा
जब दुनिया भर में सप्लाई चेन टूट गई, तो भारत और चीन जैसे बड़े तेल खरीदारों ने अपने पुराने और भरोसेमंद दोस्त रूस का हाथ थाम लिया. फरवरी के मुकाबले रूस से भारत और चीन का तेल आयात 22% तक बढ़ गया है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत इस समय रूस से हर दिन करीब 15 लाख बैरल तेल खरीद रहा है. रूस पर अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद, ट्रंप प्रशासन ने युद्ध के चलते 30 दिनों की राहत दी है, जिसका फायदा भारत को भी मिल रहा है.
ट्रंप की चेतावनी और IEA का प्लान,आगे क्या होगा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है कि अगर उसने तेल टैंकरों पर हमले नहीं रोके, तो अमेरिका ईरान के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर सीधा हमला करेगा. दूसरी तरफ, इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने तेल की कमी को दूर करने के लिए अपने इमरजेंसी तेल भंडार से 40 करोड़ बैरल तेल बाजार में छोड़ने का फैसला किया है. हालांकि, बाजार अभी भी डरा हुआ है क्योंकि एलपीजी (LPG) और फ्यूल की कीमतों में उछाल से महंगाई बढ़ सकती हैं.
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