वैश्विक कूटनीति के लिहाज से अगले कुछ दिन अहम रहने वाले हैं. एक तरह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के तीन दिनी दौरे पर बीजिंग पहुंच गए हैं, वहीं दूसरी तरफ भारत में ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक गुरुवार से शुरू होने जा रही है. इस बैठक में शामिल होने के लिए ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची, रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव समेत कई नेता दिल्ली पहुंच चुके हैं.
ईरानी विदेश मंत्री भी पहुंचे
ब्रिक्स दुनिया की उभरती हुई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं का संगठन है. भारत इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है. सितंबर में इसका वार्षिक शिखर सम्मेलन आयोजित होना है. उससे पहले विदेश मंत्रियों का ये सम्मेलन हो रहा है. बैठक में शिखर सम्मेलन का एजेंडा तय किया जाएगा. ब्रिक्स सम्मेलन के पहले दिन सदस्य देशों के विदेश मंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे.
पश्चिम एशिया संकट पर होगी चर्चा
ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर पड़ रहे असर को लेकर मुख्य रूप से चर्चा हो सकती है. ईरान ने ब्रिक्स के मौजूदा अध्यक्ष भारत से आग्रह किया था कि वह संघर्ष रोकने में अपनी स्वतंत्र भूमिका का उपयोग करे. इस बैठक के लिए ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची दिल्ली पहुंच चुके हैं. अमेरिका-इजराइल से युद्ध छिड़ने के बाद उनकी यह पहली भारत यात्रा है.
क्यों अहम है ब्रिक्स?
- ब्रिक्स दुनिया की उभरती हुई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं का संगठन है.
- शुरू में इसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे.
- 2024 में इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान और यूएई को शामिल किया गया. इंडोनेशिया 2025 में शामिल हुआ.
- ब्रिक्स पिछले कुछ वर्षों में एक प्रभावशाली संगठन के तौर पर उभरा है.
- दुनिया की 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं को यह एक मंच पर लाता है.
- ये देश वैश्विक आबादी के लगभग 49.5 प्रतिशत, ग्लोबल जीडीपी का लगभग 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार का लगभग 26 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं.
ब्रिक्स के विरोधी हैं ट्रंप
ट्रंप ब्रिक्स के सख्त विरोधी हैं. वह इसे अमेरिका के लिए एक चुनौती की तरह देखते हैं. ट्रंप अमेरिका फर्स्ट की नीति पर चलते हैं. उन्हें लगता है कि ब्रिक्स जैसे ग्रुप अमेरिकी बाजार का अनुचित फायदा तो उठाते हैं, लेकिन रणनीतिक मामलों में उसका साथ नहीं देते. उन्हें लगता है कि चीन ब्रिक्स का इस्तेमाल विकासशील देशों को अमेरिका के खिलाफ एकजुट करने के लिए करता है. वह ईरान जैसे देशों के ब्रिक्स में शामिल होने के भी खिलाफ हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप चीन की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर बीजिंग में हैं. इसे देखते हुए भारत में हो रही ब्रिक्स की बैठक में चीन के विदेश मंत्री वांग यी शामिल नहीं ह रहे हैं. विदेश मंत्री वांग की ओर से भारत में चीनी राजदूत शी फीहोंग बैठक में शामिल होंगे.
यह देखने की बात होगी कि विदेश मंत्रियों के इस सम्मेलन में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर सर्वसम्मति से कोई बयान जारी हो पाता है या नहीं. पिछले महीने ब्रिक्स के उप विदेश मंत्रियों और पश्चिम एशिया व उत्तरी अमेरिका मामलों के विशेष दूतों की बैठक के दौरान, ईरान युद्ध को लेकर यूएई से तीखे मतभेद की वजह से सर्वसम्मति नहीं बन पाई थी.
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