विज्ञापन

होर्मुज में नाकेबंदी और अमेरिका की साख का सवाल... IRGC के सामने अब भी बेबस दिख रही ट्रंप की सेना

ट्रंप की होर्मुज नाकेबंदी की डेडलाइन बीत गई, लेकिन IRGC के सामने अमेरिका सफल नहीं हुआ. चीन‑यमन ईरान के साथ, यूरोप समर्थन से दूर है. वैश्विक सप्लाई और युद्धविराम टूटने का खतरा बढ़ता रहा है.

होर्मुज में नाकेबंदी और अमेरिका की साख का सवाल... IRGC के सामने अब भी बेबस दिख रही ट्रंप की सेना
  • अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नाकेबंदी की चेतावनी के बाद भी यह जमीन पर लागू नहीं हो सकी है.
  • अमेरिका ने फारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी और अरब सागर में 16 से अधिक युद्धपोत तैनात कर दिए हैं.
  • ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने अमेरिकी जहाजों के प्रवेश को युद्धविराम उल्लंघन करार दिया है.
नई दिल्ली:

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दी गई नाकेबंदी की चेतावनी अब 24 घंटे से ज्यादा का वक्त बीतने के बावजूद जमीन पर लागू नहीं हो सकी है. हालांकि अमेरिका ने इसे अंजाम देने के लिए फारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी और अरब सागर के अहम हिस्सों में 16 से अधिक युद्धपोत तैनात कर दिए हैं. इनमें प्लेन कैरियर USS अब्राहम लिंकन और 11 अत्याधुनिक डिस्ट्रॉयर शामिल हैं. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक ट्रंप के आदेश के बाद सैन्य तैनाती और सख्त कर दी गई है, ताकि ईरानी बंदरगाहों की समुद्री आवाजाही पर नियंत्रण किया जा सके.

‘ऑपरेशन क्लियर वाटर' और अमेरिकी तैयारी

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, ऑपरेशन क्लियर वाटर के तहत दो अत्याधुनिक गाइडेड‑मिसाइल डिस्ट्रॉयर USS फ्रैंक पीटरसन और USS माइकल मर्फी को भी तैनात किया गया है. इनका प्राथमिक मिशन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को समुद्री बारूदी सुरंगों से मुक्त रखना है. ये युद्धपोत दुनिया के सबसे आधुनिक रडार और मिसाइल डिफेंस सिस्टम से लैस हैं, जिन्हें ईरान की छोटी नावों और अंडरवॉटर ड्रोन के खतरे से निपटने के लिए तैयार किया गया है.

यह भी पढ़ें- ट्रंप के लिए पोप और धर्म से उलझना ईरान जंग से भी बड़ी गलती क्यों हो सकती है?

ईरान का पलटवार और IRGC का दावा

ईरानी मीडिया ने ट्रंप की नाकेबंदी की चेतावनी का खुलेआम मजाक उड़ाया है. ईरान का दावा है कि अमेरिका युद्ध में भी नाकाम रहा और होर्मुज में भी उसे सफलता नहीं मिलेगी. ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य में दाखिल होते हैं तो इसे युद्धविराम का उल्लंघन माना जाएगा और इनसे सख्ती से निपटा जाएगा. ईरान ने साफ कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज उसके नियंत्रण में है.

तेल कीमतों में उछाल, वैश्विक सप्लाई पर खतरा

होर्मुज में बढ़ते तनाव का असर सीधे वैश्विक बाजारों पर पड़ा है. तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं. इसी रास्ते से दुनिया की करीब 20% तेल सप्लाई होती है. पहले इस समुद्री मार्ग से हर दिन करीब 138 जहाज़ गुजरते थे, लेकिन अब 10 के आसपास जहाज़ ही मुश्किल से पार कर पा रहे हैं.

चीन और यमन खुलकर ईरान के साथ

चीन ने भी ईरान का समर्थन करते हुए कहा है कि कोई तीसरा देश होर्मुज से जुड़े ईरान के द्विपक्षीय मामलों में दखल नहीं दे सकता. चीनी जहाज लगातार होर्मुज से आ‑जा रहे हैं, क्योंकि यह मार्ग चीन के लिए खुला रखा गया है. उधर, ईरान के समर्थन में यमन भी खुलकर सामने आ गया है. हूती विद्रोहियों ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान की नाकेबंदी की गई, तो वे लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाले बाब‑अल‑मंदेब जलमार्ग को बंद कर देंगे.

यह भी पढ़ें- 33 साल बाद फिर आमने-सामने होंगे इजरायल और लेबनान, वाशिंगटन में मार्को रूबियो की मौजूदगी में होगी सीधी बातचीत

अगर ऐसा हुआ तो वैश्विक ऊर्जा सप्लाई बुरी तरह प्रभावित होगी. अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन को भारी नुकसान पहुंचेगा. इस रास्ते से भी दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है.

अमेरिकी नाकेबंदी के बीच चीनी टैंकर की एंट्री

शिपिंग डेटा संकेत दे रहा है कि अमेरिकी नाकेबंदी के बावजूद पहला चीनी टैंकर होर्मुज पार कर चुका है. एसईजी मरीन ट्रैफिक और केपलर के आंकड़ों के मुताबिक ‘Rich Starry' नाम का यह टैंकर नाकेबंदी के बाद खाड़ी से बाहर निकलने वाला पहला जहाज़ है. यही जहाज वह है, जिस पर अमेरिका ने वर्षों पहले प्रतिबंध लगाए थे.

यूरोप का साथ नहीं मिला

ट्रंप के आह्वान के बावजूद अमेरिका को इस नाकेबंदी पर यूरोपीय देशों का समर्थन नहीं मिल सका. कई यूरोपीय देशों ने नाकेबंदी में शामिल होने से इनकार कर दिया. ब्रिटेन और फ्रांस ने साफ कहा कि वे ईरान की नाकेबंदी का हिस्सा नहीं बनेंगे.  अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत कोई भी देश अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग को रोक नहीं सकता. अब सवाल यह है कि अमेरिका इस कानून की अनदेखी करेगा या नहीं.

ईरान की ‘छोटी नावों' से अमेरिका परेशान

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का दावा है कि अमेरिका ने ईरान के 150 से ज्यादा जहाज़ नष्ट कर दिए हैं और उसकी नौसेना लगभग खत्म हो चुकी है, लेकिन असली चुनौती अब भी ईरान की छोटी और तेज़ रफ्तार नावें हैं.

यह भी पढ़ें- चीन के सामने फेल होर्मुज पर ट्रंप की नाकेबंदी? गुजर गया वो शिप जिसपर अमेरिका ने लगा रखा है बैन

बता दें कि ईरान के पास 3,000 से 5,000 स्पीडबोट्स हैं. सेराज‑1 जैसी मिसाइल‑सक्षम नावें हैं. खराब मौसम और ऊंची लहरों में भी हमला करने की क्षमता है. ईरान की रणनीति है सैकड़ों छोटी नावों से एक साथ बड़े अमेरिकी युद्धपोतों को चारों तरफ से घेर लेना. इन नावों पर मिसाइलें, मशीनगन और समुद्री बारूदी सुरंगें लगी होती हैं, जिन्हें रोकना बेहद मुश्किल है. वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज पर नियंत्रण रखने वाला ईरानी दस्ता अब तक काफी हद तक सुरक्षित है.

होर्मुज में तनाव अगर और बढ़ा, तो जो युद्धविराम अगले हफ्ते खत्म होने वाला है, वह उससे पहले ही टूट सकता है. अब असली सवाल यही है कि क्या अमेरिका बल के दम पर होर्मुज से ईरानी नियंत्रण खत्म कर पाएगा, या यह नाकेबंदी ‘अमेरिकी नाक' का सवाल बनकर रह जाएगी?

लेखक के बारे में
img
राजीव रंजन
Editor - Defence & Political Affairs
पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
IRGC, IRGC Hormuz Attacks, Hormuz Blockade, Hormuz Ceasefire Impact, Hormuz Blockade Fertiliser
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com