- भूटान के लेमथांग में शिंताफू ग्लेशियर झील फटने से पुनाखा में सोलर सिंचाई सिस्टम को नुकसान पहुंचा है
- पुनाखा के डोचुखा-जोमलिंगथांग-रित्सा चिवोग में स्थित सोलर इरिगेशन लिफ्टिंग सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया
- सोलर सिंचाई सिस्टम इसी साल लगाया गया था ताकि चिवोग इलाके में सिंचाई की समस्याओं का समाधान हो सके
भूटान के लेमथांग में गुरुवार रात को एक ग्लेशियर झील, शिंताफू झील फटने से हड़कंप मच गया है. झील का पानी तेजी से आगे बढ़ रहा है. बाढ़ के पानी की वजह से पुनाखा में सोलर इरिगेशन लिफ्टिंग सिस्टम को भी नुकसान पहुंचा है, इसने काम करना ही बंद कर दिया है. हालंकि हल्के-पुल्के नुकसान खबर सामने आई है. भूटान का कहना है कि पुनाखा के गुमा गेवोग के तहत डोचुखा-जोमलिंगथांग-रित्सा चिवोग में स्थित 'सोलर इरिगेशन लिफ्टिंग सिस्टम' को 'मो छू' नदी में आए फ्लैश फ्लड से हल्का नुकसान पहुंचा है.
पुनाखा में सोलर सिंचाई सिस्टम को नुकासन
एक स्थानीय नेता ने बताया कि बाढ़ के पानी से हुए नुकसान की वजह से सोलर इरिगेशन लिफ्टिंग सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया है. हालांकि नुकसान कितना हुआ है, ये अब तक पता नहीं चला है. आकलन किए जाने के बाद ही इसका अंदाजा लगाया जा सकेगा. इस सोलर सिस्टम तो इसी साल की शुरुआत में लगाया गया था, ताकि चिवोग इलाके के लोगों की सिंचाई से जुड़ी समस्याएं खत्म हो सकें. लेकिन अचानक आई बाढ़ की वजह से इसने काम करना बंद कर दिया है. फ्लैश फ्लड की वजह से बहकर आया मलबा जोमलिंगथांग इलाके में पुनाखा-गासा हाईवे तक पहुंच गया है. जिसकी वजह से इस पर आवाजाही प्रभावित हुई है.

इसी साल लगा था सोलर इरिगेशन लिफ्टिंग सिस्टम
भूटान में सोलर इरिगेशन लिफ्टिंग सिस्टम एक आधुनिक और जलवायु-अनुकूल पहल है. इसका मकसद पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि और सिंचाई को आसान बनाना है. जानकारी के मुताबिक, भूटान की करीब 20% जमीन पर ही सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, बाकी जगहों पर किसानों तो बहुत दिक्कत होती है. इसी परेशानी को हल करने के लिए यह सिस्टम को करीब 30 मिलियन की लागत से इसी साल लगाया गया था. बाढ़ ने इसे भी नुकसान पहुंचाया है.

तक्तसिमाखांग में रखी जा रही जल स्तर पर नजर
तक्तसिमाखांग में अब तक खतरे की कोई खबर सामने नहीं आई है. नेशनल सेंटर फॉर हाइड्रोलॉजी एंड मेटियोरोलॉजी के एक अधिकारी के मुताबिक, तक्तसिमाखांग में जल-स्तर की निगरानी करने वाला एक स्टेशन है, जो पानी पर नजर रखता है. लेकिन बाढ़ आने के बाद अभी तक वहां कोई अलर्ट नहीं मिला है. इससे पता चलता है कि बाढ़ का पानी अभी तक उस स्टेशन तक नहीं पहुंचा है. बता दें कि शिंताफू झील को संभावित रूप से खतरनाक 17 हिमनद झीलों (ग्लेशियल लेक्स) में से एक माना जाता है. यह झील 'मो छू' (Mo Chhu) नदी के उद्गम स्थल पर स्थित है.
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