बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय का गुस्सा एक बार फिर सातवें आसमान पर है. गाइबांधा जिले के पलाशबाड़ी में एक जुलूस के दौरान भगवान राम की तस्वीर पर जूते फेंकने की शर्मनाक घटना के बाद पूरे देश में तनाव फैल गया है. इसके अलावा राधा-गोबिंद मंदिर में स्थापित भगवान राम की मूर्ति को भी तोड़ने की धमकियां दी गई हैं. इस घटना ने जलती आग में घी का काम किया. इसके बाद राजधानी ढाका समेत देश के कई हिस्सों में हजारों की संख्या में हिंदू सड़कों पर उतर आए और जमकर विरोध प्रदर्शन किया.
शुक्रवार रात से शुरू हुआ यह आक्रोश शनिवार को और ज्यादा भड़क गया. रविवार (21 जून 2026) को भी प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस गंभीर मामले में प्रशासन का रवैया बेहद सुस्त रहा है. उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह अल्पसंख्यकों की सुरक्षा करने और दोषियों पर कार्रवाई करने में पूरी तरह नाकाम रही है. प्रदर्शन कर रहे लोगों ने सरकार से मांग की है कि इस घिनौनी हरकत को अंजाम देने वालों को तुरंत गिरफ्तार कर सख्त से सख्त कानूनी सजा दी जाए.
हिंदू संगठनों ने संभाली कमान
डेली स्टार के मुताबिक, इस बड़े विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व 'बांग्लादेश पूजा उद्यापन परिषद' ने किया. इसे 'बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई ओइक्या परिषद' का भी पूरा समर्थन मिला. इन संगठनों के आह्वान पर पूरे देश में मानव श्रृंखला, रैलियां और विरोध मार्च निकाले गए. आंदोलन का मुख्य केंद्र राजधानी ढाका में नेशनल प्रेस क्लब के सामने का इलाका रहा. यहां हिंदू समुदाय के बड़े नेताओं ने मंच संभालते हुए इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की और इसे सीधे तौर पर अपनी धार्मिक भावनाओं पर हमला करार दिया.
हिंदू संगठनों के नेताओं ने मंच से दो टूक कहा कि यह कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि देश में अल्पसंख्यक समुदायों को जानबूझकर निशाना बनाने का एक चिंताजनक पैटर्न बनता जा रहा है. उन्होंने प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि अगर उनकी चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया गया और दोषियों पर तुरंत एक्शन नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में इससे भी बड़ा और उग्र देशव्यापी आंदोलन खड़ा किया जाएगा.
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