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क्यूबा का हाल हो रहा बेहाल, अमेरिकी प्रतिबंध की मार झेल रहे लोग; तेल की किल्लत के बीच बैलगाड़ी से ढो रहे सामान

क्यूबा में अमेरिका प्रतिबंधों के वजह से सड़क सूना हो चुका है. लोगों के पास गाड़ियां तो है लेकिन उसमें डालने के लिए तेल नहीं है. लोग बैलगाड़ी पर राहत समाग्री ढोने को मजबूर हैं.

क्यूबा का हाल हो रहा बेहाल, अमेरिकी प्रतिबंध की मार झेल रहे लोग; तेल की किल्लत के बीच बैलगाड़ी से ढो रहे सामान
क्यूबा में ट्रांसपोर्ट का अब बैलगाड़ी ही सहारा बचा है.
AFP

जब पेट खाली हो और छत गायब हो, तो मदद का हाथ चाहे जहां से आए, वह जिंदगी की नई उम्मीद बन जाता है. पिछले साल अक्टूबर में आए भीषण चक्रवाती तूफान 'मेलिसा' ने क्यूबा में जो तबाही मचाई थी, उसके जख्म आज भी हरे हैं. इस संकट के बीच, अमेरिका की ओर से भेजी गई राहत सामग्री क्यूबा के प्रभावित इलाकों में पहुंच रही है. लेकिन इस कहानी में एक बड़ा विरोधाभास है. एक तरफ वाशिंगटन ने क्यूबा पर कड़े आर्थिक और ईंधन प्रतिबंध लगा रखे हैं, जिससे पूरा देश तेल के भीषण संकट से जूझ रहा है और दूसरी तरफ वही अमेरिका यहां के पीड़ितों के लिए राशन और दवाइयां भेज रहा है. हालात यह हैं कि तेल की भारी किल्लत के कारण अमेरिकी राहत सामग्री को पीड़ितों तक पहुंचाने के लिए कार या ट्रक नहीं, बल्कि पारंपरिक बैलगाड़ियों का सहारा लेना पड़ रहा है.

यह विरोधाभास क्यूबा के ग्रामीण इलाकों में साफ देखा जा सकता है, जहां लोग बुनियादी जरूरतों के लिए तरस रहे हैं. चक्रवात मेलिसा ने सैकड़ों लोगों के आशियाने उजाड़ दिए थे. इस दौर में भी अमेरिकी प्रतिबंधों की मार ऐसी है कि मदद का सामान बंदरगाहों और गोदामों से निकालकर गांवों तक ले जाना किसी चुनौती से कम नहीं है. जब पेट्रोल और डीजल पूरी तरह खत्म हो चुका है, तो वालंटियर्स हार मानने के बजाय बैलगाड़ियों पर अनाज और दवाइयों के बक्से लादकर निकल पड़े हैं.

मजबूर हैं लोग

सैंटियागो डे क्यूबा प्रांत के एल कोबरे कस्बे के बाहरी इलाके में रहने वाले तियोदार्दो देबार्देत की कहानी इस त्रासदी को बयां करने के लिए काफी है. एक हादसे में अपने दोनों पैर गंवा चुके तियोदार्दो इन दिनों एक मॉडिफाइड साइकिल (ट्राईसाइकिल) को अपने हाथों से धकेलते हुए घर लौट रहे हैं. उनकी इस साइकिल पर अमेरिका से आया राहत का एक बड़ा पैकेट रखा हुआ है. तूफान मेलिसा ने उनके घर की छत उड़ा दी थी और उनका शौचालय भी पूरी तरह तबाह कर दिया था. बिजली और पानी की भारी किल्लत से जूझ रहे अपने छोटे से गांव में वह जैसे-तैसे गुजारा कर रहे हैं.

तियोदार्दो तक पहुंची इस मदद के पीछे कैथोलिक गैर-सरकारी संगठन (NGO) 'कारिटास' के वालंटियर्स की कड़ी मेहनत है. अमेरिकी पाबंदियों के बावजूद, वाशिंगटन इसी संगठन के जरिए क्यूबा के लोगों तक मानवीय सहायता पहुंचा रहा है.

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इस केयर पैकेज में सिर्फ खाने-पीने का सामान ही नहीं है, बल्कि तियोदार्दो जैसे सैकड़ों जरूरतमंदों को चावल, बीन्स, कुकिंग ऑयल, डिब्बाबंद खाना, नहाने और कपड़े धोने का साबुन, टूथब्रश और पानी साफ करने वाली क्लोरीन की गोलियां भी दी जा रही हैं. इसके साथ ही, इस अभियान के तहत पीड़ितों की मेडिकल जांच की जा रही है और उनके बाल भी काटे जा रहे हैं.

ईंधन संकट ने बढ़ाई मुश्किलें

लगभग 130 निवासियों वाले तियोदार्दो के इस ग्रामीण समुदाय में आधे से भी कम घरों में बिजली है और नल का पानी तो गिने-चुने लोगों को ही नसीब है. चक्रवात को गुजरे महीनों हो चुके हैं, लेकिन पैसों और संसाधनों की कमी के कारण बहुत से लोग आज तक अपने घरों की छतें ठीक नहीं कर पाए हैं. ऐसे में कारिटास संस्था के लिए राहत सामग्री बांटना किसी अग्निपरीक्षा जैसा है. एल कोबरे में कारिटास की प्रमुख कातिया साइमन कहती हैं, "हमारे लिए काम करना बेहद मुश्किल हो गया है. हमें पहले गाड़ी ढूंढनी पड़ती है, फिर ईंधन का इंतजाम करना पड़ता है और फिर किसी से लिफ्ट मांगनी पड़ती है."

जब गाड़ियां तेल के बिना खड़ी हो जाती हैं, तब ग्रामीण इलाकों की लाइफलाइन कही जाने वाली बैलगाड़ियां काम आती हैं. मुश्किल परिस्थितियों में भी मदद पाकर 63 वर्षीय उस्मानी वेदेई कहते हैं, "यह मदद चाहे जहां से भी आए, हम इसका स्वागत करते हैं. अगर यह अमेरिका के लोगों की तरफ से है, तो भी बहुत अच्छी बात है." क्यूबा के लोगों के लिए इस समय राजनीति से ज्यादा पेट भरना और सिर छुपाने की जगह ढूंढना पहली प्राथमिकता बन चुका है.

2022 में चक्रवात आने के बाद क्यूबा की हालत और बदतर हो गई है.

2022 में चक्रवात आने के बाद क्यूबा की हालत और बदतर हो गई है.

किस किसने बढ़ाया मदद का हाथ

चक्रवात मेलिसा के पीड़ितों की मदद के लिए केवल अमेरिका ही आगे नहीं आया है. संयुक्त राष्ट्र (UN), यूरोपीय संघ (EU), चीन, वेनेजुएला और मैक्सिको जैसे देशों ने भी इस आपदा के बाद क्यूबा को बड़े पैमाने पर राहत सामग्री भेजी है. इसके अलावा, तूफान पीड़ितों के लिए भेजी गई लाखों डॉलर की राहत के अतिरिक्त, वाशिंगटन ने क्यूबा को अलग से 100 मिलियन डॉलर की सहायता देने की पेशकश भी की है.

हालांकि, क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल का नजरिया इस मदद को लेकर थोड़ा अलग है. उनका तर्क है कि अमेरिका की ओर से दी जाने वाली इस तरह की टुकड़ों-टुकड़ों की सहायता से क्यूबा का भला नहीं होने वाला. उनका कहना है कि अगर अमेरिका वाकई क्यूबा के लोगों की तकलीफ कम करना चाहता है, तो उसे पिछले छह दशकों से अधिक समय से क्यूबा पर लगाए गए कड़े व्यापारिक प्रतिबंधों को पूरी तरह से हटा लेना चाहिए.

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लेखक के बारे में
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चंदन सिंह राजपूत
Senior Sub Editor
चंदन सिंह राजपूत एनडीटीवी हिंदी में बतौर सीनियर सब एडिटर कार्यरत हैं. डिजिटल मीडिया में करीब 5 साल का अनुभव है. एनडीटीवी से पहले बीबीसी हिंदी, क्विंट... और पढ़ें
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