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पाकिस्तान की धरती से आया भारत के लिए खुला समर्थन

बलूचिस्तान के प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता मीर यार बलूच ने कहा है कि बलूचिस्तान का आजाद देश 2026 के पहले सप्ताह को "2026 बलूचिस्तान ग्लोबल डिप्लोमैटिक वीक" मनाएगा. अब बलूचिस्तान सीधे दुनिया भर के देशों से बात करेगा.

पाकिस्तान की धरती से आया भारत के लिए खुला समर्थन
बलोच नेता मीर यार बलोच ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर को लिखा खुला पत्र
  • 'आजाद' बलूचिस्तान 2026 के पहले सप्ताह में बलूचिस्तान ग्लोबल डिप्लोमैटिक वीक मना रहा, देशों से सीधी बात कर रहा
  • मीर यार बलूच ने भारत के विदेश मंत्री को पत्र लिखकर भारत के साथ बलूचिस्तान की मजबूत साझेदारी की पुष्टि की है
  • बलूचिस्तान पाकिस्तान और चीन के बढ़ते गठबंधन को खतरनाक मानता है और चीनी सैन्य तैनाती की संभावना जताई है- मीर
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बलूचिस्तान के लोगों ने खुद को पाकिस्तान के अलग करने का मन बना लिया है. बलूचिस्तान के प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता मीर यार बलूच ने मई 2025 में ही  पाकिस्तान से "बलूचिस्तान गणराज्य" की स्वतंत्रता की घोषणा की थी. अब उन्होंने कहा है कि बलूचिस्तान गणराज्य 2026 के पहले सप्ताह को "2026 बलूचिस्तान ग्लोबल डिप्लोमैटिक वीक" मनाएगा, अब बलूचिस्तान सीधे दुनिया भर के देशों से बात करेगा. इसी आउटरिच के तहत मीर यार बलूच ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को लेटर लिखा है और कहा है कि बलूचिस्तान की जनता भारत के साथ मजबूती से खड़ी है.

बलूचिस्तान गणराज्य के बलूच प्रतिनिधि के रूप में मीर यार बलूच ने यह लेटर लिखा है. उन्होंने इसमें लिखा है, "हम (बलूच लोग) पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के जरिए मोदी सरकार द्वारा की गई साहसिक और दृढ़ कार्रवाइयों की सराहना करते हैं, जिसमें विशेष रूप से पाकिस्तान द्वारा समर्थित आतंकवाद केंद्रों को निशाना बनाया गया था और पहलगाम आतंकवादी हमले के जवाब में पाकिस्तानी सेना के खिलाफ शुरू किया गया था. यह कार्रवाई अनुकरण करने लायक साहस, क्षेत्रीय सुरक्षा और न्याय के लिए दृढ़ प्रतिबद्धता को दिखाती है."

उन्होंने आगे लिखा है, "बलूचिस्तान के लोगों ने पिछले 79 साल से पाकिस्तान के कब्जे, सरकार द्वारा पोषित आतंकवाद और गंभीर मानवाधिकार अत्याचारों को सहन किया है. अब समय आ गया है कि इस विकराल पीड़ा को जड़ से खत्म किया जाए और हमारे देश के लिए स्थायी शांति और संप्रभुता सुनिश्चित की जाए. बलूचिस्तान के लोगों की ओर से, हम शांति, समृद्धि, विकास, व्यापार, रक्षा, सुरक्षा, भविष्य की ऊर्जा चुनौतियों और छिपे हुए खतरों के खात्मे सहित मित्रता, विश्वास और पारस्परिक हितों को बढ़ावा देने में भारत और उसकी सरकार को अपने अटूट समर्थन की पुष्टि करते हैं."

"भारत और बलूचिस्तान के बीच सहयोग समय की मांग है"

भारत और बलूचिस्तान के बीच सहयोग समय की मांग करार देते हुए मीर बलूच ने लिखा, "भारत और बलूचिस्तान के सामने खतरे वास्तविक और आसन्न हैं. इसलिए, हमारे द्विपक्षीय संबंध समान रूप से ठोस और कार्रवाई योग्य होने चाहिए. बलूचिस्तान पाकिस्तान और चीन के बीच बढ़ते रणनीतिक गठबंधन को बेहद खतरनाक मानता है. हम चेतावनी देते हैं कि चीन ने पाकिस्तान के साथ मिलकर चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) को अपने अंतिम चरण तक पहुंचा दिया है."

उन्होंने आगे लिखा है, "अगर बलूचिस्तान की सेना की क्षमताओं को और अधिक मजबूत नहीं किया गया और यदि उन्हें लंबे समय से चले आ रहे पैटर्न के अनुसार नजरअंदाज किया जाता रहा तो यह अनुमान लगाया जा सकता है कि चीन कुछ महीनों के भीतर बलूचिस्तान में अपने सैन्य बलों को तैनात कर सकता है. 6 करोड़ बलूच लोगों की इच्छा के बिना बलूचिस्तानी धरती पर चीनी सेना की मौजूदगी, भारत और बलूचिस्तान दोनों के भविष्य के लिए एक अकल्पनीय खतरा और चुनौती पैदा करेगी."

कौन हैं मीर यार बलूच?

मीर यार बलूच एक प्रमुख बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता, लेखक और फ्री बलूचिस्तान आंदोलन के प्रतिनिधि हैं. उन्होंने बार-बार कई मंचों से पाकिस्तान से बलूचिस्तान की आजादी की वकालत की है और इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है. 14 मई 2025 को, मीर यार बलूच ने औपचारिक रूप से पाकिस्तान से "बलूचिस्तान गणराज्य" की स्वतंत्रता की घोषणा की थी. उन्होंने इसे पाकिस्तानी सरकार और सेना के दशकों के नरसंहार और मानवाधिकारों के उल्लंघन के बाद एक "राष्ट्रीय फैसला" बताया था. 

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से बलूचिस्तान की संप्रभुता को मान्यता देने, शांति सेना तैनात करने और पाकिस्तानी सैन्य उपस्थिति की वापसी की सुविधा देने का आग्रह किया है. उन्होंने 2026 से 190 देशों में राजनयिक मिशन खोलने की योजना की भी घोषणा कर दी है.

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