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LIVE: पश्चिम बंगाल की बीजेपी सरकार का पहला पूर्ण बजट आज, जानें- क्‍या हैं आम बंगाली की उम्‍मीदें?

पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार आज अपना पहला पूर्ण बजट पेश करेगी, जिसमें वित्त मंत्री स्वप्न दासगुप्ता व्यावहारिक और वैचारिक संतुलन लाने का प्रयास करेंगे. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के लिए यह बजट राजनीतिक संदेश होगा, जो सरकार की विकास और कल्याणकारी योजनाओं की प्राथमिकता को दर्शाएगा.

LIVE: पश्चिम बंगाल की बीजेपी सरकार का पहला पूर्ण बजट आज, जानें- क्‍या हैं आम बंगाली की उम्‍मीदें?
कोलकाता:

पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार आज अपना पहला पूर्ण बजट पेश करेगी. बंगाल विधानसभा में करीब 12 बजे बजट पेश किया जाएगा. शुभेंदु सरकार इस दौरान कई घोषणाएं कर सकती है, जिस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं. विधानसभा में स्वप्न दासगुप्ता बजट भाषण देंगे. स्वप्न दासगुप्ता एक अनुभवी पत्रकार, कमेंटेटर और सांसद हैं और अब राज्य के वित्त मंत्री हैं. दासगुप्ता से उम्मीद है कि वे बजट में व्यावहारिकता और वैचारिक स्पष्टता का मेल लाएंगे. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के लिए यह बजट एक राजनीतिक संदेश देने का भी मौका होगा, जिससे पता चलेगा कि  

बंगाल की आर्थिक-राजनीति के लिए अहम दिन

वित्त मंत्री स्वप्न दासगुप्ता अगर ऐसा बजट पेश कर पाते हैं, जो वित्तीय अनुशासन और विकास के कदमों के बीच संतुलन बनाए रखे और साथ ही आम बंगालियों की उम्मीदों को भी पूरा करे, तो यह राज्य की आर्थिक-राजनीति में एक अहम मोड़ साबित होगा. लगभग आधी सदी तक, राज्य की वित्तीय नीति या तो लेफ्ट फ्रंट या तृणमूल कांग्रेस द्वारा तय की गई, जिन्होंने राज्य की अनदेखी करने के लिए पिछली केंद्र सरकारों को लगातार दोषी ठहराया है.

क्‍या अतीत से अलग होगा बजट?
 

अब, 'डबल-इंजन' सरकार के आने के बाद समाज के हर वर्ग- आम आदमी से लेकर उद्योगपतियों तक में यह उम्मीद है कि क्या यह बजट अतीत से सचमुच अलग होगा. दासगुप्ता के काम पर कड़ी नजर रहेगी, क्योंकि पश्चिम बंगाल दशकों से आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है. इसकी अर्थव्यवस्था लंबे समय से संरचनात्मक समस्याओं से जूझ रही है. बेरोजगारी, बुनियादी ढांचे की रुकावटें, पर्याप्त सहायता सुविधाओं की कमी और बंदरगाह के आधुनिकीकरण व कनेक्टिविटी में देरी ने कथित तौर पर निवेश को धीमा कर दिया है.

क्‍या है आम बंगाली की बजट से उम्‍मीद?

पश्चिम बंगाल पर कर्ज का बोझ एक और बड़ी चिंता माना जाता है, क्योंकि लगातार सरकारों ने कल्याणकारी योजनाओं के लिए कर्ज पर बहुत ज्‍यादा निर्भरता दिखाई है. कृषि क्षमता से कम उत्पादकता और आधुनिक सिंचाई सुविधाओं की कमी से जूझ रही है. इस बीच, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर दशकों से बड़े निवेश की कमी और उद्योगों के पलायन के बाद अपनी स्थिति को फिर से मजबूत करने के लिए संघर्ष कर रहा है. आम आदमी की मांग साफ है, बढ़ती कीमतों से राहत और रोजगार के बेहतर अवसर. खाने-पीने की चीजों और ईंधन की महंगाई ने घरों के बजट पर बुरा असर डाला है, और उम्मीद है कि भाजपा सरकार सब्सिडी या खास कल्याणकारी उपायों की घोषणा करेगी. 

  • बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाएं भी लोगों की इच्छाओं की सूची में सबसे ऊपर हैं, खासकर अर्ध-शहरी और ग्रामीण इलाकों में जहां सरकारी सेवाएं अभी भी ठीक नहीं हैं.
  • कारोबारी और व्यापारी टैक्स सिस्टम को आसान बनाने और बेहतर लॉजिस्टिक्स चाहते हैं. व्यापारी समुदाय लंबे समय से नौकरशाही की बाधाओं और नियमों को ठीक से लागू न किए जाने की शिकायत करता रहा है. 
  • ऐसा बजट जो प्रक्रियाओं को आसान बनाए, अनुपालन की लागत कम करे और ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाए, वह उन्हें खुश कर सकता है.
  • उद्योगपति बड़े और ठोस संकेतों की उम्मीद कर रहे हैं. वे ऐसी जमीन अधिग्रहण नीतियां चाहते हैं जो पारदर्शी और निवेशकों के अनुकूल हों, बिजली की दरें प्रतिस्पर्धी हों और कुछ खास सेक्टर के लिए प्रोत्साहन मिलें.
  • इसका मकसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस बात के अनुरूप होना चाहिए जिस पर उन्होंने जोर दिया है कि भारत के विकसित राष्ट्र बनने के सफर के लिए बिहार और ओडिशा (अंग, बंग, कलिंग) के साथ-साथ एक मजबूत बंगाल भी जरूरी है.
  • इस क्षेत्र के रणनीतिक महत्व पर जोर इस विश्वास को दिखाता है कि इसमें दक्षिण-पूर्व एशिया का प्रवेश द्वार बनने की क्षमता है. यह इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या राज्य सरकार निवेश के लिए एक स्थिर और भरोसेमंद माहौल बना पाती है.

बीजेपी के पास राजनीतिक संदेश देने का मौका 

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के लिए यह बजट एक राजनीतिक संदेश देने का भी मौका होगा. ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से हटाने के बाद, उनके प्रशासन को यह साबित करना होगा कि वे प्रभावी ढंग से शासन कर सकते हैं और विकास कर सकते हैं. बजट को सिर्फ आवंटन और घाटे के नजरिए से ही नहीं देखा जाएगा. यह सरकार की मंशा के बारे में भी होगा. इसे इस आधार पर परखा जाएगा कि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश को प्राथमिकता देती है या कल्याणकारी योजनाओं पर ज्यादा जोर देती है; क्या वह कर्ज की समस्या से सीधे निपटती है या मुश्किल फैसलों को टालती है.

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तिलकराज
Deputy News Editor
पत्रकारिता में एक मिशन लेकर आया था, और आज भी उसी मिशन पर बदस्‍तूर सफर जारी है. दिल्‍ली में ही पढ़े-लिखे और लिखते-लिखते पत्रकारिता से कब जुड़े और कब ये... और पढ़ें
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